मंगलवार, 11 फ़रवरी 2020

6 घंटे बाद भी जवानों को लेने नहीं पहुंच सका हेलीकॉप्टर, इस बीच 2 शहीद हुए


जगदलपुर .बीजापुर जिले के पामेड़ थाना क्षेत्र के एंड्रापल्ली इलाके में सोमवार सुबह सीआरपीएफ की कोबरा बटालियन के जवानों और नक्सलियों के बीच मुठभेड़ हो गई। इस मुठभेड़ के बाद 2 जवान शहीद

हो गए हैं। हेलीकॉप्टर को घटनास्थल के पास पहुंचने में करीब 6 घंटे का समय लग गया अगर यह सही समय पर पहुंचता तो शायद दोनों जवानों की जान बचाई जा सकती थी।

सूत्रों की मानें तो मुठभेड़ में कोबरा के 4 जवानों के घायल होने की खबर हेडक्वार्टर से लेकर जिम्मेदारों को सुबह 11 बजे ही मिल गई थी। इसी दौरान तय हो गया था कि जवानों को बचाने के लिए हेलीकॉप्टर मौके पर भेजना जरूरी है। इसके बाद हेलीकॉप्टर को मौके पर भेजने केलिए प्लानिंग की शुरुआत हुई और सब कुछ सुरक्षित करने में करीब 5 घंटे का समय लग गया। इसी बीच 2 जवानों विकास कुमार और पूर्णानंद साहू ने जंगल में ही दम तोड़ दिया।

नई जगह थी, सेनेटाईजेशन में लगे 6 घंटे, नए स्थान पर किया लैंड, तब जाकर घायल आए बाहर

इधर, सूत्र बता रहे है कि हेलीकॉप्टर की मदद तो जवानों ने 11 बजे ही मांग ली थी लेकिन पामेड़ के एंड्रापल्ली इलाके के जिस स्थान पर जवान हेलीकॉप्टर उतरवाने की मांग कर रहे थे वहां पहले कभी लैंडिंग नहीं हुई थी। ऐसे में पूरे इलाके के सेनेटाइजेशन में लंबा समय लग गया। सेनटाइजेशन का अर्थ यह कि हेलीकॉप्टर को जिस स्थान में उतारा जाना है वह हेलीकॉप्टर को लैंड करवाने लायक इलाका है या नहीं, इसके अलावा हेलीकॉप्टर पर दुश्मन की ओर से हमला करने के क्या संभावनाएं हैं, हमला होने पर पहले से मौजूद जवान हमला कैसे रोकेंगे? इन बातों को तय करना होता है। कुल मिलाकर करीब 5 घंटे का समय यह तय करने में लग गया कि संबंधित इलाका हेलीकॉप्टर उतारने के लिए सुरक्षित है या नहीं। जानकार बताते हैं कि जिस इलाके में चौपर का आना-जाना अक्सर रहता है।

रिक्शा चलाकर पिता ने पढ़ाया था, मार्च में होने वाली थी शादी



मुठभेड़ में शहीद जवान पूर्णानंद साहू की शादी एक महीने बाद होने वाली थी। वे राजनांदगांव शहर से लगे ग्राम जंगलपुर निवासी थे। 6 मार्च को सगाई और 27 मार्च से शादी तय हो चुकी थी। अचानक दोपहर में घायल होने की खबर परिजन को मिली। शाम तक शहादत की खबर मिली। 27 वर्षीय पूर्णानंद का चयन 2013 में सीआरपीएफ में हुआ था। मंगलवार सुबह शव गृहग्राम लाया जाएगा, जहां पूरे सम्मान के साथ अंतिम संस्कार होगा। शहीद जवान पूर्णानंद बहुत ही गरीब परिवार के थे। उनके पिता पहले रिक्शा चलाते थे। उनकी 3 बहन और एक छोटा भाई भी है। इनमें एक बहन की शादी हो चुकी है, जबकि दो बहन और भाई की पढ़ाई की पूरी जिम्मेदारी पूर्णानंद पर ही थी।


हेलीकॉप्टर अगर यह सही समय पर पहुंचता तो शायद दोनों जवानों की जान बचाई जा सकती थी।




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