- सिर्फ लक्षण वाले मरीजों को किया जा रहा है भर्ती, फिर भी मरीजों को नहीं मिल रहा ठीक से इलाज
कोरोना संक्रमण बढ़ने के साथ ही मेडिकल कॉलेज में लापरवाही का संक्रमण भी बढ़ने लगा है। कॉलेज में भर्ती एक मरीज को 7 घंटे तक रेमेडीसीवर इंजेक्शन नहीं दिया गया। जबकि, इस मरीज के बेहतर इलाज के लिए खुद भाजपा से जुड़े नेता लगे हुए थे। इधर, कॉलेज में सीटी स्कैन के लिए मरीजों को इंतजार करना पड़ा, क्योंकि, एम्बुलेंस नहीं मिल रही थी। शुक्रवार को कॉलेज में मरीजों का हाल जानने के लिए भी परिजनों को परेशान होना पड़ा। पढ़िए... मेडिकल कॉलेज में किस तरह परेशान होते रहे मरीज और परिजन...
ये गलत है : 48 घंटे में हो रहा सीटी स्कैन, मरीज-परिजन परेशान
- 24 मार्च को मेडिकल कॉलेज में भाजपा कार्यकर्ता राजेश लोनकर को भर्ती किया। उन्हें सांस लेने में तकलीफ थी। पूर्व महापौर शैलेंद्र डागा ने बताया मैं और भाजपा जिला महामंत्री प्रदीप उपाध्याय डॉक्टरों से मिलकर आए थे। 25 मार्च को राजेश के लिए कॉलेज से 6 रेमडेसीवीर इंजेक्शन लाने का कहा गया। मंडल अध्यक्ष आदित्य डागा और पूर्व पार्षद पवन सोमानी शाम 4 बजे इंजेक्शन देकर आए। रात 11 बजे पवन सोमानी का फोन आया कि कॉलेज में दस्तखत करवाने के लिए बुला रहे है। तब तक इंजेक्शन नहीं लगे थे, जबकि, 7 घंटे पहले इंजेक्शन दिए लग जाने चाहिए थे। राजेश की आज सुबह मौत हो गई।
- कॉलेज में ही एक 83 साल के बुजुर्ग भर्ती हैं। 23 मार्च को इन्हें कॉलेज में भर्ती किया था। बुजुर्ग का दो दिन तक सीटी स्कैन नहीं हो सका। परिजन परेशान होते रहे, अस्पताल प्रबंधन एम्बुलेंस व्यस्त होने की बात कहता रहा। 25 मार्च को इनका सीटी स्कैन हो पाया, शुक्रवार को डॉक्टर ने बुजुर्ग के ब्लड सैंपल का कहा, लेकिन रात तक रिपोर्ट ही पता नहीं चली। परिजन ने लैब में पूछताछ की तो सैंपल नहीं पहुंचने की बात कही। इधर, बुजुर्ग का 23 मार्च को ही सैंपल हो गया था, अब तक परिजन इस बात की किसी ने जानकारी नहीं दी है कि रिपोर्ट पॉजिटिव है... या निगेटिव।
भास्कर पड़ताल
11 बार फोन लगाया, नहीं बताई मरीज की स्थिति
मेडिकल कॉलेज में मरीज के परिजनों को उनकी स्थिति बताने के लिए हेल्पलाइन नंबर है। शुक्रवार को परिजनों की परेशानी पता करने के लिए भास्कर संवाददाता ने पूछताछ केंद्र के हेल्पलाइन नंबरों पर 11 बार फोन लगाया। इन नंबरों पर 5 बार तो किसी ने फोन ही नहीं उठाया। 6 मर्तबा ही बात हो सकी, इसमें हमने कर्मचारियों को मरीज का नाम, वार्ड के बारे में जानकारी देते हुए कहा कि इनकी हेल्थ कंडीशन के बारे में जानना है। लेकिन, पूछताछ केंद्र से व्यस्त होने की बात कहते रहे, कंडीशन नहीं बताई गई।
एक्सपर्ट व्यू
शुरुआती दिनों में कारगर है रेमेडीसीवर
^रेमेडीसीवर इंजेक्शन लगाने से पहले किडनी का फंक्शन अच्छा होना बहुत जरूरी है, इसके लिए मरीज की जांच की जाती है। रिपोर्ट ओके होने के बाद ही ये इंजेक्शन लगाए जाते हैं। रेमेडीसीवर एक अच्छा इंजेक्शन है, इसका प्रभाव देखने को मिलता है। कोरोना संक्रमण के शुुरुआती 5 दिनों में ये सबसे ज्यादा कारगर माना गया है। डॉ. राजेश शर्मा, एमडी, मेडीसीन, निजी अस्पताल
डॉ. शशि गांधी, डीन, मेडिकल कॉलेज, रतलाम
इंजेक्शन लगाने से पहले किडनी की रिपोर्ट देखना जरूरी है
भास्कर- मरीज के साथ वालों का आराेप है कि 7 घंटे इंजेक्शन नहीं लगाए।
डीन - इंजेक्शन लगाने से पहले किडनी की रिपोर्ट देखना जरूरी है, रिपोर्ट आने के बाद ही इंजेक्शन लगते हैं।
भास्कर - परिजन को रात 11 बजे साइन करवाने के लिए बुलवाया।
डीन - मरीज की हालत गंभीर थी, साइन इसलिए करवाए गए।
भास्कर - 48 घंटे तक मरीज का सीटी स्कैन नहीं हो रहा, परिजन परेशान हैं।
डीन - मरीज बढ़ने के कारण ऐसा हुआ, एम्बुलेंस व्यस्त थी। मामला जानकारी में आ गया था, ड्राइवर बढ़ा दिए हैं, 108 एम्बुलेंस को अटैच किया है।
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