- वर्षों पुराने वादों का हिस्सा हैं नर्मदा एक्सप्रेस-वे, तारामंडल और कैंसर यूनिट जैसे प्रोजेक्ट, बस दे दिया नया कलेवर,
- इस बार ऐसा कुछ नया नहीं आया जबलपुर के हाथ जिससे विकास को मिले रफ्तार
कोरोना की मार से कराह रही अर्थव्यवस्था को राज्य के बजट से काफी उम्मीदें थीं। लोग टीवी और मोबाइल पर टकटकी लगाए निहारते रहे कि उद्योग, कृषि, स्वास्थ्य, शिक्षा समेत अन्य सेक्टर्स के लिए जबलपुर को कुछ ऐसा मिलेगा जो विकास को एक नई रफ्तार देगा, लेकिन निराशा ही हाथ लगी...। सरकार ने वैसे तो शिक्षा, स्वास्थ्य समेत अन्य क्षेत्रों में दिया बहुत कुछ, लेकिन जबलपुर के खाते में विशेष तौर पर कुछ नहीं आया...।
भेड़ाघाट के समीप तारामंडल का निर्माण, कृषि प्रयोगशाला व नर्मदा एक्सप्रेस-वे के अलावा छुटपुट एक-दो और प्रोजेक्ट में कुछ मिला भी तो उसमें कुछ नया नहीं है। यह सरकार की पुरानी घोषणाओं का ही हिस्सा हैं। किसी तरह का नया कर नहीं लगाने और पुराने करों में बढ़ोत्तरी नहीं करने को लोग थोड़ा राहत भरा कदम मान रहे हैं, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि इतने कुछ से कोरोना की त्रासदी से मिले दर्द से उबर पाना आसान नहीं है।
पूर्व से पश्चिमी हिस्से को जोड़ेगा 1300 किमी लंबा नर्मदा एक्सप्रेस-वे जबलपुर से गुजरेगा बड़ा हिस्सा
राज्य बजट में नर्मदा एक्सप्रेस-वे के लिए प्रावधान किया गया। प्रदेश के पूर्व से पश्चिमी हिस्से को यह एक्सप्रेस-वे जोड़ेगा और खास बात यह है कि औद्योगिक व व्यावसायिक गतिविधियों को इसके आसपास बढ़ावा दिया जाएगा। मंगलवार को राज्य बजट में बताया गया कि इसके लिए प्रारंभिक रूप से डीपीआर तैयार की जाएगी। वैसे 3 साल से इस नर्मदा एक्सप्रेस-वे पर चर्चा हो रही है। इसको नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इण्डिया ने पहले स्वीकृति दे दी थी। राज्य में भाजपा की सरकार जाने के बाद यह ड्रीम प्रोजेक्ट ठण्डे बस्ते में चला गया था, अब एक बार फिर बजट में इसके लिए प्रावधान किया गया है।
कहाँ-कहाँ से गुजरेगा
इस एक्सप्रेस-वे का बड़ा हिस्सा जबलपुर जोन से ही गुजरता है। अमरकंटक से आरंभ होकर डिण्डौरी, मण्डला, जबलपुर, नरसिंहपुर, पिपरिया, होशंगाबाद, हरदा से अलीराजपुर तक और उसके बाद इसको गुजरात की सीमा में बड़ौदा तक बनाया जाना है। कुल 1300 किलोमीटर के दायरे में इसका निर्माण होना है।
सगड़ा के नजदीक बनेगा रेल ब्रिज
बजट में प्रावधान किया गया है कि राज्य में 105 नये ब्रिज बनाए जाएँगे। इसमें जबलपुर में सगड़ा के नजदीक ब्रॉडगेज पर रेल ब्रिज बनेगा। गौर तलब है कि हाल ही में यह रेल लाइन चालू हुई है। नई सड़क सगड़ा से लम्हेटा रोड तैयार हुई। यातायात का दबाव आने वाले समय में इस हिस्से में बढ़ने वाला है, जिसको देखते हुए इस ब्रिज का निर्माण होगा।
कैंसर इंस्टीट्यूट को मिलेगा फंड
कैंसर इंस्टीट्यूट के जल्द आरंभ होने की उम्मीद जागी। बजट में इसके लिए प्रावधान किया गया है। इसी तरह बताया गया कि रेस्पिरेटरी मेडिसिन, ऑर्थोपेडिक और आप्थैलमिक केन्द्र प्रक्रिया में है। इसके लिए कोशिशें जारी हैं।
बिजली, लेबर पेमेंट, बैंक ब्याज जैसी मदों में छूट की थी उम्मीद
महाकोशल चेंबर ऑफ काॅमर्स एंड इंडस्ट्री के पदाधिकारियों ने बजट की समीक्षा कर कहा कि कोरोना काल से टूटे उद्योगों को खड़ा होने बजट में कोई खास प्रावधान नहीं किया गया है। चेंबर के अध्यक्ष रवि गुप्ता, शंकर नाग्देव, राजेश चंडोक, हेमराज अग्रवाल, युवराज जैन गढ़ावाल, अखिल मिश्र, अनिल जैन पाली ने कहा कि कोरोना काल से प्रभावित उद्योग एवं व्यापार पर नए कर न लगाने व करों की दर न बढ़ाने से परेशानी नहीं बढ़ेगी। पर्यटन उद्योगों के प्रोत्साहन हेतु महाकोशल अंचल के विश्व स्तरीय स्थलों के विकास हेतु बजट में प्रावधान न होने से मायूसी है।
महाकोशल उद्योग संघ के डीआर जेसवानी ने कहा कि चिकित्सा क्षेत्र के साथ किसानों के हितों का ध्यान रखा गया। उद्योगों के लिए कोरोना काल में विद्युत बिलों में फिक्स चार्ज की वसूली में रोक लगाने की आशा की गई थी, लेकिन ऐसा नहीं हुआ है। संस्कारधानी चेंबर ऑफ काॅमर्स के चमन श्रीवास्तव, अशोक वाधवा, ज्ञानचंद गोलछा ने कहा कि बजट व्यवहारिता से परे है। सभी पुरानी योजनाओं को ही नए नाम व नए कलेवर में प्रस्तुत किया गया है।
इंडस्ट्रियल सेक्टर- टैक्स भले ही नहीं बढ़ा, मगर राहत भी नहीं
राज्य शासन के बजट से स्थानीय इंडस्ट्री को काफी कुछ मिलने की उम्मीद की जा रही थी मगर ऐसा नहीं होने से शहर के उद्योगपतियों में निराशा है। इंडस्ट्री से जुड़े अधिकांश लोगों का मानना है कि व्यापार-उद्योग की एक बार फिर उपेक्षा की गई है। यह बात अलग है कि कोई नया टैक्स नहीं लगाया मगर कुछ नया मिला भी नहीं है। काेरोना काल से बिखरीं इंडस्ट्रियों को विद्युत बिलों में फिक्स्ड चार्ज की वसूली में रोक लगाने की उम्मीद जताई गई थी मगर ऐसा नहीं हुआ।
खासकर लंबे समय से रेडीमेड गारमेंट्स, हर्बल, खनिज सेक्टर के साथ मिष्ठान्न क्लस्टर को विशेष पैकेज मिलने की आस थी इसमें भी निराशा हाथ लगी है। यह बात अलग है कि उद्योग के लिए 30 दिन के भीतर मंजूरी देने का प्रावधान लाया गया है।
काफी मिलने की थी उम्मीद, मगर हर वर्ग हुआ निराश -जबलपुर चेंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री के सदर स्थित कार्यालय में बजट समीक्षा बैठक आयोजित की गई, जिसमें चेंबर के चेयरमेन प्रेम दुबे ने कहा कि महँगाई से जूझ रही जनता को इस बजट से निराशा हुई है। फेडरेशन ऑफ मप्र चेम्बर्स ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री के उपाध्यक्ष हिमांशु खरे ने बताया कि आत्मनिर्भर मप्र की परिकल्पना को साकार करने यह बजट असफल साबित हुआ है। एमएसएमई सेक्टर में अनुदान के लिए 1437 करोड़ रुपए की राशि अपर्याप्त है।
चेम्बर के सचिव नरिन्दर सिंह पांधे ने कहा कि शासन ने पेट्रोल-डीजल पर वैट में कमी न करके ट्रांसपोर्ट व्यवसाय को बहुत नुकसान पहुँचाया है। पंकज माहेश्वरी ने कहा कि अब अधिकतम 20 हेक्टेयर भूमि के साथ भू-स्वामी को गौण-खनिज के उत्खनन की अनुमति मिल सकेगी जो कि सार्थक पहल है। बजट विश्लेषण व परिचर्चा में अमरप्रीत छाबड़ा, दीपक सेठी, अभिषेक ध्यानी, राजेन्द्र श्रीवास्तव, शशिकांत पांडेय ने भी विचार रखे।
अपनी-अपनी राय
वर्तमान परिवेश में बजट प्रशंसनीय
बजट में हेल्थ व एजुकेशन पर विशेष फोकस किया गया है। सड़क व पुलों का निर्माण होगा, इससे बेहतर इन्फ्रास्ट्रक्चर तैयार होगा। बजट में कोई नए टैक्स का प्रावधान नहीं किया गया है और न ही पुराने टैक्सों में बढ़ोत्तरी की गई है। कोरोना काल की वर्तमान अर्थव्यवस्था को देखते हुए बजट प्रशंसनीय कहा जाएगा।
-प्रो. जयश्री जोशी, से.नि.प्राध्यापक
आम जनता को निराशा हाथ लगी
इस बजट से आम जनता को निराशा हाथ लगी है। पेट्रोल और डीजल को राज्य सरकार अपने स्तर पर कम कर सकती थी जो नहीं किया। अगर राज्य सरकार चाहती तो पेट्रोल डीजल की कीमतें कम करके शराब पर वैट बढ़ा सकती थी, इससे आम जनता को फायदा होता और सरकार को रेवेन्यू का घाटा भी नहीं होता।
अभिषेक ध्यानी, कर अधिवक्ता
प्रभावी और वाजिब बजट
राज्य सरकार के इस बजट में कुल प्राप्तियाँ 164677 करोड़ व कुल व्यय 241375 करोड़ रुपए का प्रावधान है। किसी भी नए कर का प्रावधान नहीं किया गया है। किसानों के लिए अनेक योजनाओं जैसे शून्य दर पर ऋण, फसल बीमा अन्य में 86000 करोड़ रुपए का आवंटन है। आत्मनिर्भर भारत पर एवं चिकित्सा क्षेत्र पर विशेष महत्व दिया गया है।
प्रदीप बिंदुरानी, चार्टर्ड एकाउंटेंट
रियायत की उम्मीद पर फिरा पानी
रियल एस्टेट कारोबार में कोरोना काल में बहुत असर पड़ा जिसके बाद उम्मीद की जा रही थी कि बजट में सरकार इस सेक्टर के लिये कोई रियायत देगी लेकिन हमारी उम्मीदों पर पानी फिर गया। प्रदेश में स्टाम्प ड्यूटी सबसे ज्यादा है। अगर कहीं राहत मिलती तो निश्चित तौर पर जनता को भी फायदा मिलता।
दीपक अग्रवाल, सचिव क्रेडाई जबलपुर बिल्डर एसोसिएशन
खेती की लागत हो जाती कम
बजट में किसान और खेती की चिंता तो की गई है लेकिन जितनी राहत मिलनी थी वह नहीं मिली है। किसानों को उम्मीद थी कि सरकार डीजल पर वैट कम करेगी जिससे खेती की लागत कम हो सकेगी। हालाँकि एक जिला एक उत्पाद में किसी एक फसल के चुने जाने से लाभ होगा। इसके साथ ही किसानों को बिना ब्याज ऋण देने का निर्णय भी अच्छा है।
भानू पटेल, कृषक पाटन
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