नगरीय प्रशासन विभाग ने दिए थे मवेशियों पर नियंत्रण करने के आदेश
आवारा कुत्तों के आतंक के साथ शहर में आवारा मवेशियों से सभी लोग बहुत परेशान हैं। अधिकार होने के बाद भी नपा आवारा कुत्तों और मवेशियों को नहीं पकड़ रही है। शहर की सड़कों पर गोवंश खड़े रहते हैं। इनकी लड़ाई से कई बाइक चालक घायल हो चुके हैं। कई बार बड़े वाहनों से भी ये मवेशी घायल हो जाते हैं।
आवारा कुत्तों के भौंकने से लोगों को बहुत परेशानी होती है आवारा पशुओं पर रिपोर्ट अब तक नहीं हाईकोर्ट के निर्देश पर नगरीय प्रशासन विभाग ने नगरीय निकायों को निर्देश दिए थे कि पशु मालिकों के साथ बैठक कर आवारा पशुओं के नियंत्रण को लेकर नियमों में संशोधन के लिए सुझाव दें।
सरकार की ओर से नगर पालिका के सीएमओ को इस संबंध में निर्देशित किया गया, लेकिन न तो बैठक हुई और न ही सरकार को सुझाव दिए गए। इतना ही नहीं इन दिनों पूरे शहर में सड़कों पर पशुओं का जमावड़ा है।
ये हैं नियम
मप्र नपा निगम अधिनियम 1956 की धारा 355, 356 व 358 तथा मप्र नगर पालिका अधिनियम 1961 की धारा 252 व 254 में नगरीय क्षेत्रों में आवारा पशुओं को नियंत्रित करने से संबंधित प्रावधान है।
स्थिति यह
सड़कों पर आवारा पशुओं को जमावड़ा होने से वाहन चालक परेशान हो रहे हैं। तो सड़कों पर गाय बैल के बैठने जाम स्थित निर्मित हो रही तो वाहन चालक रात में इनसे टकराकर दुर्घटना ग्रस्त हो रहे हैं।
ऐसे खतरा हैं आवारा जानवर
- आवारा जानवर सड़कों पर दुर्घटनाओं का कारण बन सकते हैं।
- आवारा कुत्तों के काट लेने से शहर के नागरिक गंभीर बीमारी का शिकार हो जाते है।
- आवारा पशु अक्सर विभिन्न बीमारियों के वाहक होते हैं।
- इस नियम के तहत आवारा पशु पर नियंत्रण जरूरी
ये हैं इनके जिम्मेदार
नगरपालिका और पशुपालक
सड़कों पर रात में गाय, भैंस व अन्य आवारा पशु बीच बैठे रहते हैं। रात को बीच रास्ते में बैठे यह पशु दिखाई नहीं देते, जिससे दुर्घटना की आशंका बनी रहती है। नपा टीम इन मवेशियों को पकड़ती नहीं और पशुपालक खुले में छोड़ देते हैं।
^आवारा कुत्तों और मवेशियों पर प्रतिबंध लगाने, नियंत्रण करने नपा लगातार कार्रवाई कर रही है।
-माधुरी शर्मा, सीएमओ

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