चंबल नदी से ग्वालियर तक पानी लाने की सबसे बड़ी अड़चन दूर हो गई है। कई वर्षों से सरकारी प्रक्रिया में फॉरेस्ट विभाग की एनओसी उलझी हुई थी, जो कि अब मिल गई है। ये एनओसी ग्वालियर व मुरैना के लिए 240 एमएलडी (24 करोड़ लीटर प्रतिदिन) पानी लेने की शर्त पर जारी हुई है। जिसमें से चंबल नदी से 150 एमएलडी (मिलियन लीटर प्रतिदिन) पानी ग्वालियर के लिए लिया जाएगा, बाकी 90 एम एलडी पानी मुरैना के लिए।
एनओसी आने के बाद इस प्रोजेक्ट की डीपीआर का काम शुरू कराया गया है। अब एनएचएआई व रेलवे से भी एनओसी के प्रयास तेज कर दिए गए हैं। तिघरा में आएगा पानी: चंबल नदी का पानी तिघरा में लाया जाएगा। प्रारंभिक तौर पर किए गए सर्वे के अनुसार चंबल से हाइवे के किनारे लाइन आएगी और पुरानी छावनी क्षेत्र से पहले साडा क्षेत्र से तिघरा तक पहुंचेगी।
पानी लिफ्ट होने पर दूर होगी किल्लत: नई टंकियां भरने में होगी आसानी
अभी हर साल ग्वालियर में गर्मी के दिनों में पानी का संकट सामने आता है। इसके चलते पेयजल सप्लाई एक दिन छोड़कर दी जाती है। चंबल नदी से पानी लिफ्ट करने के बाद ये दिक्कत खत्म होगी। तिघरा में पर्याप्त पानी का स्टोरेज हो सकेगा और ककैटो, पेहसारी पर भी दबाव नहीं रहेगा। अभी इन दोनों बांध से तिघरा तक हर साल पानी लिफ्ट किया जाता है। चंबल नदी से पानी आने पर शहर में अमृत योजना के तहत बनी टंकियों को भी भरा जा सकेगा।
चंबल प्रोजेक्ट के लिए सबसे महत्वपूर्ण एनओसी वन विभाग की थी क्योंकि चंबल नदी पर बनी चंबल सेंक्चुरी में मौजूद घड़ियाल-डॉल्फिन को खतरा बताकर वन विभाग एनओसी जारी नहीं कर रहा था। अब मुरैना-ग्वालियर की एनओसी जारी हो पाई है। जिसके बाद चंबल नदी पर इंटकवेल तथा पाइप लाइन को लेकर डीपीआर का काम शुरू किया गया है। लेकिन इस पर निर्णय किया जाना शेष है कि नदी से पानी लिफ्ट करने के लिए मुरैना-ग्वालियर का एक ही इंटेकवेल बनाया जाएगा या अलग-अलग।
जल्द शुरू कराएंगे काम
^चंबल नदी से पानी लाने के लिए सबसे बड़ी दिक्कत फॉरेस्ट की एनओसी को लेकर थी। जो कि हमें मिल गई है, फॉरेस्ट ने ग्वालियर व मुरैना के लिए 240 एम एलडी पानी लेने की एनओसी दी है। जिसके बाद डीपीआर का काम शुरू करा दिया गया है।
कौशलेंद्र विक्रम सिंह, कलेक्टर
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