- पानी नहीं सहेजने वालों पर दो लाख तक के जुर्माने का था प्रावधान
विश्व जल दिवस पर प्रधानमंत्री ने कैच द रैन के नाम से वर्षा जल संजोने का अभियान 22 मार्च से शुरू किया। इंदौर जल संरक्षण पर दो साल से काम कर रहा है। 30 हजार से ज्यादा स्थानों पर वाटर हार्वेस्टिंग करा चुका है। इसे अनिवार्य करने के साथ ही ट्रीटेड वाटर के इस्तेमाल का कानून बनाने के लिए प्रस्ताव इंदौर निगम परिषद में पास हो चुका है। इसे प्रदेश सरकार के पास मंजूरी के लिए भेजा था, लेकिन सालभर हो गया, यह पेंडिंग है। इस कानून में वर्षा जल बचाने के साथ ही ट्रीटेड वाटर का इस्तेमाल नहीं करने पर दो लाख तक जुर्माने का प्रावधान है।
प्रस्ताव के तहत मौजूदा जी प्लस 2 या उससे बड़े घरों के लिए वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम लगाना अनिवार्य हो जाता। नए निर्माण की अनुमति भी तभी मिलती, जब व्यक्ति यह सिस्टम अपनी साइट पर लगवा लेता। यह नियम सभी रहवासी सोसायटी के साथ ही बिल्डर और कॉलोनाइजरों के लिए भी अनिवार्य होता। नई बोरिंग की अनुमति भी यह सिस्टम लगवाने के बाद ही मिलती। ऐसा नहीं करने वाले रहवासी के लिए 5 से 10 हजार रुपए जुर्माना का प्रावधान भी रखा गया। 60 दिन में सिस्टम नहीं लगाने पर तीन हजार रुपए प्रति दिन का फाइन रखा गया था।
ट्रीटेड वाटर की अलग से लाइन
इस कानून में ट्रीटेड वाटर के पुन: इस्तेमाल पर सबसे ज्यादा जोर दिया गया था। इसके तहत कोई भी नई बिल्डिंग या रहवासी सोसायटी में ट्रीटेड वाटर की लाइन डालना अनिवार्य होता। यह नियम शासकीय इमारतों के साथ ही व्यावसायिक इमारतों और इंडस्ट्री के लिए भी अनिवार्य होता।
इसलिए जरूरी है ट्रीटेड वाटर
भूजल वैज्ञानिक सुधींद्र मोहन शर्मा के मुताबिक एक परिवार 675 लीटर पानी में से 270 लीटर पानी फ्लश कर देता है। इसके पुन: इस्तेमाल से पानी के लिए इंदौर की नर्मदा पर निर्भरता कम हो जाएगी। निगमायुक्त प्रतिभा पाल ने बताया कि कोरोना के कारण प्रस्ताव आगे नहीं बढ़ सका। यह कानून बनने से इंदौर ट्रीटेड वाटर से बड़ा बदलाव ला सकेगा।
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