- दिसंबर 2019 में पूरा करना था काम, अब भी 274 किमी काम बाकी
भूमिगत सीवरेज लाइन प्रोजेक्ट एक बार फिर कठघरे में आ गया है। अब तक धीमी रफ्तार को लेकर चर्चा में रहा लेकिन अब चैंबर के सड़क से ऊपर या नीचे होने से हादसे का कारण बन रहा है। 11 क्षेत्र में 76 चैंबर सड़क से ऊपर हैं जबकि 59 सड़क से नीचे हैं। जिम्मेदारों का कहना है कि वे नॉमिनल हैं। इतना अंतर चलता है। कहीं भी ज्यादा ऊपर या नीचे नहीं हैं।
शिप्रा की शुद्घि और शहर को खुले नाले-नालियों से मुक्ति दिलाने के लिए नगर निगम ने चार साल पहले टाटा प्रोजेक्ट्स कंपनी को भूमिगत सीवरेज लाइन बिछाने का ठेका दिया था। तय हुआ था कि कंपनी दो साल में 439 किलोमीटर भूमिगत सीवरेज पाइपलाइन बिछाएगी। साथ ही सुरासा में 92.5 मिलियन लीटर प्रति दिन (एमएलडी) जल क्षमता का सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट बनाएगी।
सभी घरों के टॉयलेट को सीवरेज पाइपलाइन से जोड़ेगी। कंपनी की रफ्तार शुरू से ही धीमी रही। इससे प्रोजेक्ट अनुबंधित समय सीमा में पूरा नहीं हो सका। कंपनी ने फरवरी तक 165 किलोमीटर में ही पाइपलाइन बिछाई है। सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट का काम भी पूरा नहीं हुआ। जिम्मेदारों का कहना है कि वह 85 फीसदी पूरा हो गया है।
पेनल्टी लगाई, प्रोजेक्ट समय सीमा भी बढ़ाई
समय पर प्रोजेक्ट पूरा न करने पर निगम ने कंपनी ने पेनल्टी लगाई और प्रोजेक्ट पूरा करने की समय सीमा बढ़ाकर 20 दिसंबर 2020 तक तय कर दी। इसके बाद भी रफ्तार नहीं आई। काम में तेजी लाने का दबाव बढ़ा तो कंपनी ने बेतरतीब तरीके से चैंबर डालकर सड़क की मरम्मत भी करवा दी। नतीजा यह हुआ कि चैंबर या तो सड़क से दो से तीन इंच ऊपर हैं या उतने ही नीचे।
टाटा कंपनी को कारण बताओ नाेटिस, सात दिन में मांगा जवाब
अमृत मिशन के तहत शहर में सीवरेज कार्य टाटा प्रोजेक्ट लिमिटेड कर रहा है। काम में की जा रही लापरवाही के कारण रविवार को इंदौर गेट पर हुई दुर्घटना को तत्काल संज्ञान में लेते हुए अधीक्षण यंत्री अमृत मिशन धर्मेंद्र वर्मा ने दुर्घटना के संबंध में कंपनी के खिलाफ अपराधिक प्रकरण क्यों ना दर्ज किया जाए। इस आशय का कारण बताओ सूचना पत्र जारी किया है। कंपनी को तय अवधि 7 दिवस में जबाव प्रस्तुत करना होगा। ऐसा नहीं किया जाता है तो टाटा प्रोजेक्ट लिमिटेड के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
चैंबर्स मानक अनुसार ही डाले, कहीं ऊपर या नीचे हैं तो दिखवाएंगे
^चैंबर्स डालने में मेजरमेंट का पूरा ध्यान रख रहे हैं। इसके बाद भी कहीं वे सड़क से ऊपर या नीचे हैं तो उन्हें दिखवाएंगे। कुछ स्थानों पर सड़क बाद में बनाने से उनका लेवल नीचे चला गया है।
आशीष सिंघई, सीवरेज प्रोजेक्ट प्रभारी टाटा कंपनी
165 किलोमीटर, 8 घंटे मौके पर भास्कर टीम
इन क्षेत्रों में चैंबरों के यह हालात
महाकाल वाणिज्य केंद्र : 14 चैंबर ऊपर, 7 नीचे और 9 सड़क के बराबर हैं। जवाहर नगर : 1 चैंबर ऊपर, 1 नीचे और 1 सड़क के बराबर है। बसंत विहार : 15 चैंबर ऊपर, 6 नीचे और 7 सड़क के बराबर हैं। महानंदानगर : 10 चैंबर ऊपर, 16 नीचे और 6 सड़क के बराबर हैं। महाश्वेता नगर : 8 चैंबर ऊपर, 3 नीचे और 2 सड़क के बराबर हैं। देवास रोड : 6 चैंबर ऊपर, 4 नीचे और 2 सड़क के बराबर हैं। ऋषिनगर : 2 चैंबर ऊपर, 4 नीचे और 2 सड़क के बराबर हैं। मोहनर नगर : 3 चैंबर ऊपर, 6 नीचे और 2 सड़क के बराबर हैं। उर्दू पुरा : 4 चैंबर ऊपर, 6 नीचे और 2 सड़क के बराबर हैं। पटेल नगर : 4 चैंबर ऊपर, 5 नीचे और 1 सड़क के बराबर है। गदा पुलिया से इंदौर गेट : 9 चैंबर ऊपर, 1 नीचे और 1 सड़क के बराबर है।

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