- तीसरे क्वार्टर की बची राशि अंतिम क्वार्टर में खर्च कर सकते हैं विभाग,
- कोराना से शुरुआती चार महीनों में 50% राजस्व का नुकसान हुआ था
वित्तीय वर्ष खत्म होने के चार दिन बचे हैं, लेकिन विकास कार्यों के लिए बजट में दी गई राशि विभाग खत्म नहीं कर पाए हैं। वित्तीय वर्ष 2020-21 में 11 फीसदी राशि यानी करीब 15 हजार करोड़ रुपए से ज्यादा लैप्स होने के आसार हैं। वित्त विभाग ने समस्त विभागों को निर्देशित किया है कि जो तीसरे क्वार्टर में राशि खर्च नहीं कर पाए हैं, उसे अंतिम क्वार्टर में खर्च करने की अनुमति प्रदान कर दी है।
यह राशि विकास कार्यों और आधारभूत ढांचे पर खर्च किया जाना है। कोरोना की वजह से राज्य सरकार की आय में शुरुआती चार महीनों में तो 40 से 50 फीसदी राजस्व का नुकसान हुआ था। इस दौरान केंद्रीय करों में राज्य की हिस्सेदारी और जीएसटी की भी राशि कम मिली। इस वजह से प्रदेश की वित्तीय स्थिति साल में अच्छी रही। वित्त वर्ष के अंतिम तीन महीनों में रेवेन्यू 90 फीसदी तक रहा।
बजट लैप्स होने की यह रही तीन बड़ी वजह
- नई सड़कों के निर्माण कार्य नहीं हुए। सिर्फ पुरानी सड़कों पर पेंच वर्क का काम हुआ।
- बांधों और नहर के लिए राशि स्वीकृत नहीं हो पाई।
- नए भवनों के निर्माण के लिए स्वीकृति नहीं हो सकी।
अधिकांश कर्मचारियों को भी नहीं मिल पाई एरियर की राशि
मध्यप्रदेश के कर्मचारियों को होली त्योहार के पहले एरियर की राशि का भुगतान किया जाना था, लेकिन सभी विभागों से एरियर की बकाया 75 फीसदी राशि के जो बिल ट्रेजरी पहुंचे। वहां तकनीकी खराबी की वजह से यह राशि कर्मचारियों के खाते में नहीं पहुंची। सरकार को इस रवैये को देखते हुए निर्देश जारी करना पड़ा कि एरियर की राशि 31 मार्च 2021 तक सभी कर्मचारियों के खाते में पहुंच जाए।
योजना व्यय के तहत आवंटित बजट को खर्च करे विभाग
सरकार ने विभागों से योजना व्यय के तहत आवंटित बजट को खर्च करने के लिए कहा है। इसकी वजह 31 मार्च पर कर्ज की राशि 2 लाख 9 हजार करोड़ रुपए हो जाएगी। अगले साल यानी 2021-22 में राज्य सरकार को अपने खर्च चलाने के लिए 49 हजार करोड़ रुपए की राशि बाहर से कर्ज के रूप में लेना पड़ेगी। इस स्थिति में बजट की 11 फीसदी राशि लैप्स होने से सरकार की चिंता बढ़ गई हैं। संस्थाओं से उधारी की करीब 44351 हजार करोड़ रुपए की राशि लेना है।
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