जिला अस्पताल में खून की कमी से जुझती प्रसूता की सामाजिक संगठनों के युवाओं ने जान बचाई। महिला को ओ निगेटिव खून की व्यवस्था में परेशानी आई। युवाओं ने रक्तदाताओं को ढूंढ़कर महिला को खून की जरूरत पूरी कराई। साथ ही आर्थिक सहयोग भी किया।
25 नवंबर को खामखेड़ा की रोशनी पति सुनील (25) जिला अस्पताल में भर्ती किया। यहां नवजात का जन्म हुआ। चार दिन के बाद नवजात की मौत हो गई। महिला का हीमोग्लोबिन 6 ग्राम था। डॉक्टरों ने तत्काल ओ निगेटिव खून की व्यवस्था को कहा। रोशनी के पति सुनील अकेला ही था। ऐसे में सूचना मिलने पर द बहुजन यूथ के संस्थापक व अध्यक्ष ओजस निहाले, नरेंद्र सोलंकी, जय भीम युवा संगठन के जिलाध्यक्ष कैलाश बिलवे पहुंचे। ब्लड बैंक पहुंचे तो यहां स्टॉक में खून नहीं था। इसके बाद ओ निगेटिव रक्तदाता की खोजबीन शुरू हुई।
तत्काल पहुंचे अखिलेश
ब्लड बैंक में ओ निगेटिव खून के रक्तदाताओं को फोन किया। इसमें अखिलेश कुशवाह तैयार हुए। उन्होंने रक्तदान किया। इसके बाद ओजस निहाले व अन्य युवक ने रक्तदान किया। महिला को तीन यूनिट खून की व्यवस्था हुई और उसकी जान बच गई। इसके अलावा मनोज रोकड़े, रामेश्वर बड़ोले, राजेंद्रसिंह पंवार आदि ने 5 हजार रुपए की आर्थिक सहयोग किया।
हर दिन ब्लड की जरूरत
जिला अस्पताल में रोजाना 10 गर्भवती महिला व 5 गंभीर मरीजों को खून की जरूरत होती है। इसमें अधिकांश जरूरतमंद ग्रामीण क्षेत्रों के होते हैं। पहचान नहीं व रक्तदाताओं के बारे में जानकारी नहीं होने के कारण उन्हें परेशानी होती है। रक्तदाता या अन्य सामाजिक लोग ज्यादा से ज्यादा रक्तदान करते रहे तो जरूरतमंद लोगों को परेशानी नहीं आएगी। कोरोना संक्रमण में ब्लड बैंक में खून की कमी हो गई है इसे पूरा करना चाहिए।
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