महाकालेश्वर मंदिर में प्री-ऑनलाइन परमिशन से दर्शन व्यवस्था में फूल-प्रसाद व अन्य दुकानदार, होटल कर्मचारी साइबर जालसाजी कर श्रद्धालुओं से अवैध वसूली कर रहे हैं। ऑनलाइन परमिशन को एडिट कर श्रद्धालुओं को परमिशन उपलब्ध कराने के नाम पर राशि ली जा रही है।
प्रति श्रद्धालु 150 से 200 रुपए लिए जा रहे हैं। कोरोना के मार्च में लॉकडाउन के बाद 8 जून से मंदिर में फिर से दर्शन व्यवस्था शुरू हुई है। प्रशासन ने मंदिर में केवल दूर से दर्शन कराने की व्यवस्था लागू की है।
इसके लिए नि:शुल्क प्री-परमिशन ऑनलाइन लेना होती है। रोज 12000 श्रद्धालुओं को परमिशन जारी की जाती है। नि:शुल्क कियोस्क सुविधा का पता नहीं होने से दुकानदारों के चक्कर में पड़ जाते हैं। उनकी अज्ञानता का फायदा दुकानदार दर्शन की फर्जी परमिशन देकर उठाते हैं।
मोबाइल नंबर की जांच करेंगे
मंदिर समिति के सहायक प्रशासक मूलचंद जूनवाल के अनुसार धोखाधड़ी की जानकारी मिली है। मंदिर समिति ने अब प्रवेश द्वार पर हरेक परमिशन की कम्प्यूटर रिकॉर्ड से तस्दीक शुरू की है। श्रद्धालु से उसका मोबाइल नंबर व नाम पूछ कर कम्प्यूटर पर सर्च में डाला जाता है जिससे यह पता चल जाता है कि परमिशन जारी की गई है या नहीं। जिनकी जानकारी कम्प्यूटर नहीं देता, उन्हें प्रवेश नहीं दिया जा रहा। बुधवार से यह नई व्यवस्था लागू कर दी है।
श्रद्धालुओं के साथ ऐसे की जा रही जालसाजी
दुकानदार अपने नाम से प्री-परमिशन ले लेते हैं। इसे कंप्यूटर साॅफ्टवेयर के जरिए एडिट कर श्रद्धालु के नाम से व संख्या डाल देते हैं। यह परमिशन श्रद्धालु के मोबाइल पर सेंड कर देते हैं। श्रद्धालु यह परमिशन गेट पर दिखा कर प्रवेश कर लेते हैं। व्यवस्था में लगे मंदिर, सुरक्षा व पुलिसकर्मियों की इसमें मिलीभगत भी सामने आई है।
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