सोमवार, 9 नवंबर 2020

सामान्य चावल में मिलाकर बंटेगा नौ पोषक तत्वों से तैयार चावल, अनुसूचित जाति-जनजाति के लोगों को मिलेगा पोषण

सामान्य चावल में मिलाकर बंटेगा नौ पोषक तत्वों से तैयार चावल, अनुसूचित जाति-जनजाति के लोगों को मिलेगा पोषण

सामान्य चावल को अब विटामिन और मिनरल्स से युक्त करके लोगों तक पहुंचाने की तैयारी है। इसे ‘फोर्टिफाइड राइस केरनेल्स’ कहा जाएगा। मिलिंग प्लांट में तैयार इस पोषण युक्त चावल के एक दाने को 100 दानों में मिलाकर उन जिलों में वितरित किया जाना है, जहां अनुसूचित जाति-जनजाति के ऐसे लोग रहते हैं, जिन्हें पोषण की जरूरत है।

भारत सरकार ने देश के पंद्रह राज्यों के एक-एक जिले में इसे लागू किया है, मप्र का सिंगरौली जिला इस स्कीम में शामिल है। बाद में इसे राज्यों के आकांक्षी जिलों को भी शामिल किया जाएगा।

केंद्र सरकार इस स्कीम में 174 करोड़ रुपए खर्च करेगी। राज्यों को 25 फीसदी पैसा मिलाना होगा। पांच राज्यों छत्तीसगढ़, गुजरात, आंध्रप्रदेश, महाराष्ट्र और तमिलनाडू ने इसे लागू कर दिया, लेकिन मप्र में फाइल मंत्री के प्रशासकीय अनुमोदन और वित्त में अटकी है। फोर्टिफाइड राइस आंगनबाड़ी, मिड-डे-मील और पीडीएस के जरिए दिया जाएगा। मप्र में इससे पहले मई-जून 2018 से फोर्टिफाइड नमक दिया जा रहा है।

तीन साल का प्रोजेक्ट... 25 फीसदी राशि राज्य मिलाएंगे

एक किलो चावल पर 73 पैसे खर्च होंगे- एक किलोग्राम चावल के फोर्टिफिकेशन पर 73 पैसे खर्च होंगे। इसमें से 75 फीसदी केंद्र सरकार को और शेष राशि राज्यों को देनी है। तीन साल के इस पायलट प्रोजेक्ट के सफल होने पर इसे बाद में पिछड़े (आकांक्षी) जिलों में लागू कर दिया जाएगा।

ऐसे तैयार होगा... विटामिन, जिंक और आयरन मिलाएंगे
सामान्य चावल का पाउडर बनाकर इसमें विटामिन ए, ई, डी, बी3, बी9, बी1, बी12, जिंक और आयरन लिक्विड फार्म में मिलाया जाएगा। फिर इसे गूथा (डो) जाएगा। प्लांट में चावल के बराबर कटिंग होगी। सुखाया जाएगा, जिससे फोर्टिफाइड चावल तैयार होगा। मप्र में धान की मिलिंग करने वाले उद्योगपतियों को चिन्हित करके यह काम सौंपा जाएगा। इसे बाद में सामान्य चावल में एक निश्चित अनुपात में मिला दिया जाएगा।

नमक के बाद अब चावल किया जा रहा फोर्टिफाइड
मप्र में नमक के बाद अब चावल फोर्टिफाइड किया जा रहा है। देश में चावल और नमक के साथ दूध, तेल और गेहूं भी फोर्टिफाई किया जा रहा है। फोर्टिफाइड राइस केरनेल्स का कुल उत्पादन अभी 15 हजार टन है, इसे 130 लाख टन तक पहुंचाना है। इसीलिए केंद्र के साथ राज्य सरकार इस क्षेत्र में नई संभावनाओं को तलाश रहे हैं।



प्रतीकात्मक फोटो।




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