गुरुवार, 5 नवंबर 2020

गैंगस्टर सुखा के कहने पर जेल में बंद सुखराज और ज्ञाना ने पैसे देकर बूरा व गुरजीत से कराया था कत्ल

गैंगस्टर सुखा के कहने पर जेल में बंद सुखराज और ज्ञाना ने पैसे देकर बूरा व गुरजीत से कराया था कत्ल

शौर्य चक्र विजेता कामरेड बलविंदर सिंह की हत्या फिरोजपुर व पटियाला जेल में बंद गुरदासपुर के गैंगस्टर सुखराज सुक्खा और रविंदर सिंह ज्ञाना ने गैंगस्टर सुखा भिखारीवाल के कहने पर सुपारी देकर कराई थी। बुधवार काे यह दावा डीआईजी फिरोजपुर रेंज हरदयाल सिंह मान और एसएसपी ध्रुमन एच निंबले ने किया।

मामले में 11 आरोपियों सुखराज सिंह उर्फ सुक्खा, रविंदर सिंह उर्फ ज्ञाना, आकाशदीप उर्फ धालीवाल, रविंदर सिंह ढिल्लों, राकेश कुमार, रवि कुमार, चांद कुमार भाटिया, मनप्रीत सिंह, जगजीत सिंह, जोबनजीत, प्रभजीत सिंह को गिरफ्तार किया है। बलविंदर को गोली मारने वाले शूटर सुखदीप सिंह उर्फ बूरा, गुरजीत सिंह उर्फ भा और सूत्रधार भिखारीवाल अभी फरार है। आरोपियों ने हत्या क्यों की, इसका अभी तक खुलासा नहीं हो पाया है।

सुपारी किलर गुरदासपुर के रहने वाले

डीआईजी ने बताया कि फुटेज खंगालने के बाद पता चला कि हत्यारे सलेम टाबरी लुधियाना में छिपे हैं। इसके बाद उनकी शिनाख्त करवाई गई। जांच में बात सामने आई कि कत्ल गैंगस्टरों के जरिए कराया गया है। तरनतारन पुलिस ने आरोपी सुखराज सिंह निवासी गांव लखनपाल गुरदासपुर और रविंदर सिंह उर्फ ज्ञाना निवासी गांव खरल गुरदासपर को जेल से प्रोडक्शन वारंट पर लाकर पूछताछ की। इसमें खुलासा हुआ कि उन्होंने सुख भिखारीवाल के कहने पर बलविंदर का कत्ल कराया था। इसके लिए सुखदीप सिंह उर्फ बूूरा और भा निवासी लखनपाल गुरदासपुर से कांटेक्ट किया था।

बूरा व भा पर नाबालिग को अगवा करने का भी आरोप

बूूरा और भा की सुक्खे के साथ जेल में दोस्ती हुई है। इसके बाद दोनों जमानत पर आए थे और दोनों पर गुरदासपुर में नाबालिग को अगवा करने का केस दर्ज है। गिरफ्तारी से बचने को दोनों के रहने का प्रबंध भिखारीवाल ने लुधियाना में किया था और पैसे देने का वादा कर कत्ल की साजिश रची थी।

धालीवाल ने पहुंचाए थे पैसे

लुधियाना निवासी आकाशदीप अरोड़ा उर्फ धालीवाल ने बुरा व भा काे लुधियाना में ठहराया था और साथियों की मदद से पैसे पहुंचाए थे। वारदात में इस्तेमाल बाइक को काटकर सतलुज में फेंक दिया था। इसके बाद पुलिस की सूचना मिलने के बाद धालीवाल ने ही दोनों को मौके से भगा दिया था।



सुखराज सुक्खा, गुरजीत उर्फ भा, सुखदीप उर्फ बूरा ।




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