नकली शराब कांड खुलने के बाद सिस्टम का जहर सामने आने लगा है। नगर निगम के स्थायी कर्मचारी और पुलिसकर्मियों का गठजोड़ खुल चुका है। बड़ी बात यह है कि सालभर में बड़ी-बड़ी कार्रवाई का दावा करने वाले आबकारी विभाग को भी जहरीली शराब की पोटली नजर नहीं आई। इधर, सीएम के निर्देश के बाद कलेक्टर ने प्रशासन की टीम कार्रवाई में लगाई। शुक्रवार को अवैध शराब के 61 अड्डे भी पकड़ लिए। दो दिन में ये आंकड़ा 150 को पार कर गया। इतनी कार्रवाई तो महीनों में भी नहीं होती।
अब सवाल यह उठता है कि आबकारी विभाग कार्रवाई क्यों नहीं करता। जबकि जिले में अवैध शराब के कई अड्डे हैं, जो पुलिस से लेकर आबकारी तक की नजर में हैंं। अब या तो मिलीभगत है या बंदी ने आंखें बंद कर रखी हैं। इधर शुक्रवार को जिले की सभी तहसीलों में पुलिस और प्रशासन की टीम ने मिलकर अवैध शराब बेचने वालों पर कार्रवाई की। एडीएम नरेंद्र सूर्यवंशी ने बताया कि जिले में 61 प्रकरण कायम किए। दबिश देकर 59 लोगों को गिरफ्तार किया गया। तीन को जेल भी भेजा गया।
कार्रवाई में 239 लीटर कच्ची शराब, 140.72 देशी व 148 क्वाटर विदेशी शराब तथा 16 केन बियर जप्त की गई है। जिसकी कीमत 71685 रुपए हैं। एडीएम सूर्यवंशी ने भरोसा दिलाया कि ऐसी कार्रवाई लगातार जारी रहेगी। इधर आबकारी विभाग के अमले में भी इस दिन अवैध शराब बेचने वालों के 39 प्रकरण बनाए।
डॉ. राजौरा करेंगे सुनवाई
जहरीली या अवैध शराब के साथ ही अन्य मादक पदार्थों के संबंध में गृह विभाग के सचिव डॉ. राजेश राजौरा शनिवार को सुनवाई करेंगे। कोई भी व्यक्ति इस संबंध में शिकायत कर सकता है। उसका नाम भी गुप्त रखा जाएगा।
एसआईटी ने समझा- स्प्रिट से कैसे बनाते थे शराब और मौतें कैसे हुईं
एसआईटी में शामिल गृह विभाग के सचिव डॉ. राजेश राजौरा शुक्रवार को खाराकुआं थाने में पुलिस, प्रशासन और खाद्य एवं औषधीय प्रशासन विभाग के अधिकारियों से घटना को लेकर चर्चा कर रहे थे। उनके साथ अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक एसके झा एवं रतलाम के पुलिस उप महानिरीक्षक सुशांत सक्सेना भी थे। टीम ने जब अधिकारियों से पूछा कि संबंधित ये घोल कैसे तैयार करते थे? तो जवाब में पुलिस अधिकारियों ने बताया कि पता चला है कि वे लोग 400 एमएल डिनेचर्ड स्प्रिट में 1600 एमएल पानी मिलाकर 2 हजार एमएल का घोल तैयार करते थे। और इसे पॉलिथीन में पोटली बनाकर 20 से 50 रुपए तक बेचते थे।
टीम ने किया सवाल: ये घटना डिनेचर्ड स्प्रिट से ही कनेक्टेड ये कैसे पता चला...टीम ने जब एएसपी रूपेश द्विवेदी से पूछा- लोगों के मरने की ये घटना डिनेचर्ड स्प्रिट से ही कनेक्टेड हैं, ये कैसे पता चला? तो वे स्पष्ट जवाब नहीं दे पाए। ये जरूर बोले कि लोगों ने बताया मृतक देशी दारू पीते थे। टीम ने फिर से पूछा कि जो लोग मरे हैं उनके साथ वाले कोई मिले हैं, आप यहां किसी को लाए हो, जिससे कुछ पता किया जा सके? क्योंकि पता चले कि घटना का कारण कुछ और हो। ऐसे में टीम ने ये तय किया कि मृतकों के परिजनों को बुलवाएं उनसे बातें करके वस्तुस्थिति पता करने का प्रयास करेंगे।
यूनुस बोला- रीगल टाॅकीज की छत पर ही शराब बनाते थे
यूनुस को खाराकुआं पुलिस ने शुक्रवार को कोर्ट में पेश किया, जहां से तीन दिन का पुलिस रिमांड मिला। यूनुस ने बताया सिकंदर व गब्बर को उसी ने जहरीली शराब का धंधा बताया। यूनुस ने स्वीकारा कि रीगल टाॅकीज की छत पर ही जहरीली शराब बना रहे थे। रोज छत्रीचौक पर ही 100 पोटली बिक जाती थी। एक पोटली का 20 रुपए दाम था।
चौकीदार बता नहीं पाया, कैमरे होते तो टीम को मदद मिलती
एसआईटी टीम नगर निगम के गोपाल मंदिर के पुराने कार्यालय पहुंची। जहां अवैध रूप से निगमकर्मियों द्वारा ही झिंझर बनाई जाती थी। टीम को पोटली के उपयोग में होने वाली कुछ पॉलिथीन भी मौके से मिली। चौकीदार दयाराम ज्यादा कुछ बता नहीं पाया। टीम का कहना है यहां कैमरे होते तो जांच में मदद मिलती।
इससे भी बड़ी घटना हो जाती तो संभाल भी नहीं पाते- डॉ. राजौरा
एसआईटी द्वारा दिनभर की जांच के दौरान मीडिया से डॉ. राजौरा ने कहा उनकी टीम ने मृतकों के परिजनों से भी चर्चा की। कुछ और लोगों को भी बुला रहे है। वे यह भी बोले कि पॉयजनिंग की ऐसी घटना बड़े स्तर पर होती तो उससे निपटने की परिस्थितियां जिला अस्पताल के पास है या नहीं ये भी देखेंगे। बाद में डॉ. राजौरा टीम के साथ जिला अस्पताल भी पहुंचे।
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