शुक्रवार, 2 अक्टूबर 2020

2008 में प्रतिद्वंद्वी थे पिता, अब आमने-सामने होंगे बेटे; 2013 के चुनाव में साथ घूमे थे बघेल और चौधरी, दिखाया था- कोई मतभेद नहीं

2008 में प्रतिद्वंद्वी थे पिता, अब आमने-सामने होंगे बेटे; 2013 के चुनाव में साथ घूमे थे बघेल और चौधरी, दिखाया था- कोई मतभेद नहीं

(याेगेश पंवार) हाटपिपल्या में इस बार कांग्रेस की ओर से राजवीर बघेल मैदान में हैं। भाजपा की ओर से कांग्रेस से आए मनोज चाैधरी का टिकट लगभग तय है। खास बात यह है कि 2008 के चुनाव में इन दोनों के पिता भी एक-दूसरे के खिलाफ ताल ठोक चुके हैं। तभी से दोनों परिवारों में राजनीतिक वर्चस्व की जंग चल रही है। सिंधिया समर्थक मनाेज चाैधरी के विधायक पद से इस्तीफा देने पर यह सीट खाली हुई थी।

2018 में भी निर्दलीय फॉर्म भरा, दिग्विजय ने मनाया
2008 में इसी सीट से राजवीरसिंह के पिता राजेंद्रसिंह बघेल कांग्रेस प्रत्याशी थे। उनके खिलाफ कांग्रेस से बागी हाेकर मनाेज चाैधरी के पिता नारायण ने चुनाव लड़ा और 21161 वाेट ले गए थे। राजेंद्रसिंह भाजपा प्रत्याशी दीपक जाेशी से 220 वाेटाें से हार गए थे। इसी टीस के चलते 2018 में कांग्रेस ने मनाेज चाैधरी काे टिकट दिया ताे राजवीर बघेल ने निर्दलीय फाॅर्म दाखिल कर दिया। तब चुनाव से ठीक पहले दिग्विजय सिंह ने बघेल को मनाया था।

राजवीर के पिता राजेंद्र बघेल (सफेद कुर्ते में) और मनोज के पिता नारायण (नीली शर्ट में)।

राजवीर का पहला विधानसभा चुनाव
कांग्रेस प्रत्याशी राजवीर का यह पहला विधानसभा चुनाव है। उनके पिता 3 बार विधायक रहे। राजवीर साेनकच्छ नगर परिषद अध्यक्ष रह चुके हैं।



भाजपा प्रत्याशी मनोज चौधरी और कांग्रेस प्रत्याशी राजवीर सिंह (फाइल फोटो)




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