बुधवार, 28 अक्टूबर 2020

एक हेक्टेयर में मक्का फसल लेने पर 20 हजार रु. की लागत आई, बाजार में बेचने पर 15 हजार रु. ही मिल रहे

एक हेक्टेयर में मक्का फसल लेने पर 20 हजार रु. की लागत आई, बाजार में बेचने पर 15 हजार रु. ही मिल रहे

एक साल पहले मंडी में किसानों को मक्का की उपज के प्रति क्विंटल 1800 रु. दाम मिले थे, एक साल बाद वही मक्का 700 रु. टूटकर 1100 रु. क्विंटल में बिक रही है। नई फसल के लिए किसान भी उपज को कम दामों में में बेच रहे हैं। इधर, मंडी समिति द्वारा भाव कम मिलने का कारण अधिक बारिश में उपज का खराब हाेना व आवक का कम होना बताया जा रहा है।
खरीफ 2019-20 के सीजन में जिले में 30 हजार हेक्टेयर भूमि पर किसानों ने मक्का की बोवनी की थी। किसानाें का आशा थी कि एक हेक्टेयर में 15 क्विंटल तक मक्का का उत्पादन होगा लेकिन अधिक बारिश के चलते इस साल मक्का में इल्लियां लग गई और वायरस ने अटैक कर दिया। जिसके चलते उत्पादन घटकर प्रति हेक्टेयर 8 क्विंटल रह गया। शासन ने हर साल की तरह इस बार भी मक्का का समर्थन मूल्य 1840 रु. क्विंटल तय किया था लेकिन सरकारी खरीदी नहीं की। इसका फायदा व्यापारियों को हुआ, फसल खराब होने के बहाने वे कम दामों में मक्का खरीद रहे हैं। उपज मंडी में भी मक्का की नीलामी 900 से शुरू होकर 1200 रु. क्विंटल तक पहुंच रही है।

औसत 4.50 लाख क्विंटल होना था उत्पादन
कृषि विभाग के अनुसार इस साल 30 हजार हेक्टेयर में बोवनी के बाद प्रति हेक्टेयर 15 क्विंटल के मान से मक्का का उत्पादन 4.50 लाख क्विंटल होना था लेकिन 40% तक फसल खराब हो गई।

मक्का लगाने पर नुकसान हो गया
भाकिसं के सुभाष पटेल ने बताया पिछले साल अच्छे दाम मिलने पर इस साल अधिक किसानों ने मक्का की बोवनी की थी। लेकिन यहां तो प्रति हेक्टेयर किसानों को 5 हजार रु. तक का नुकसान हो रहा है। नई फसल के लिए किसान भी मजबूरी में उपज को बेच रहा है।

ऐसा है मक्का लगाने पर आई लागत का गणित... किसानों को एक हेक्टेयर में बोवनी पर 20 हजार रु. तक का खर्च आया। जिसमें 12 किलो बीज 4800 रु., डीएपी, पोटाश, यूरिया, जिंक 6 हजार रु., तीन बार दवाई स्प्रे 4500 रु., 2500 रु. एकड़ कटाई याने 7 हजार रु. हेक्टेयर, 8 हजार रु निकलाई व 1 हजार रु. वाहन भाड़ा शामिल है। अब जब किसान उपज बेच रहा है तो उसे 1 हजार रु. क्विंटल के हिसाब से एक हेक्टेयर के 15 हजार रु. ही मिल रहे हैं।

सरकारी खरीदी नहीं, इसलिए दाम कम
^सरकार ने मक्का का समर्थन मूल्य 1840 रु. क्विंटल रखा है, लेकिन सरकारी खरीदी शुरू नहीं की। इधर, अधिक बारिश से भी फसल को नुकसान हुआ और उपज कम आई। ऐसे में किसानों को भाव भी कम मिल रहे हैं।
नारायण दशोरे, प्रभारी, कृषि उपज मंडी


On taking maize crop in one hectare, 20 thousand rupees. Cost of 15 thousand rupees on selling in the market. Only getting


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