प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान ने हाल ही में इस बार आगामी दुर्गोत्सव में प्रतिमाओं और पंडालों की स्थापना करने संबंधी घोषणा की है लेकिन अभी तक जिला मुख्यालयों में कोई आदेश नहीं आए हैं। दुर्गा उत्सव समितियों को अभी तक शासन की नई गाइड लाइन की जानकारी नहीं दी गई है।
जिला प्रशासन ने भी अभी तक प्रतिमाओं के निर्माण, उनकी ऊंचाई और स्थापना को लेकर कोई चर्चा नहीं की है।
इसी प्रकार दुर्गोत्सव के चल समारोह, प्रतिमा विसर्जन कार्यक्रम तथा विजयादशमी पर्व आयोजन को लेकर भी असमंजस बरकरार है। शासन ने दुर्गोत्सव के आयोजन की बात तो कही है लेकिन नवरात्र पर्व के समापन पर निकलने वाले विसर्जन और चल समारोह के साथ ही दशहरा पर्व को लेकर कोई गाइड लाइन जारी नहीं की गई है। इससे आयोजन समितियां अपनी तैयारी नहीं कर पा रही हैं।
शहर में वैसे हर साल 200 झांकी पंडालों की स्थापना होती है। इस मामले को लेकर मंगलवार शाम श्री सनातन हिंदू उत्सव समिति की एक बैठक लक्ष्मीनारायण मंदिर नंदवाना में आयोजित की गई। इसमें निर्णय लिया गया कि गंदे जानकी कुंड में प्रतिमाओं का विसर्जन नहीं किया जाएगा।
80 % मूर्तियां बनाते हैं बंगाली कलाकार
विदिशा में हर साल 200 से अधिक स्थानों पर 6 से लेकर 15 फीट तक की ऊंची प्रतिमाएं स्थापित की जाती हैं। इसके अलावा छोटी प्रतिमाएं अलग हैं। इनमें से 80 फीसदी प्रतिमाएं सिर्फ बंगाली कलाकार बनाते हैं। केवल 20 प्रतिशत दुर्गा प्रतिमाएं ही स्थानीय कलाकार और प्रजापति समाज के लोग बनाते हैं। लेकिन प्रशासन की गाइड लाइन नहीं मिलने के कारण 20 प्रतिशत प्रतिमाएं भी मुश्किल से बन पा रही हैं।
18 अक्टूबर से शारदीय नवरात्र महोत्सव शुरू हो रहा है। ऐसे में मूर्ति कलाकारों के पास केवल 38 दिन से भी कम समय बचा है। प्रतिमाएं बनाने के आर्डर पहले से नहीं मिले हैं।
इस बार देखने को नहीं मिलेंगी बंगाली शैली की खूबसूरत
इस बार बंगाली कलाकार लॉक डाउन के कारण पहले ही पलायन कर चुके हैं। कोरोना महामारी के कारण वे अभी तक नहीं लौटे हैं। कुम्हार गली में प्रतिमाएं बना रहे पप्पू प्रजापति और बांसकुली में प्रतिमाएं तैयार कर रहे रामबाबू प्रजापति ने बताया कि झांकी संचालकों के आर्डर अभी तक नहीं मिले हैं।
वहीं ब्लाक कालोनी स्थित एक झांकी संचालक राकेश सिंह ठाकुर ने बताया कि सीएम की घोषणा के बाद अब प्रतिमा स्थापना और पंडाल लगाने की तैयारी कर रहे हैं।
प्रतिमा चल समारोह और दशहरा आयोजन को लेकर असमंजस
.श्री सनातन हिंदू उत्सव समिति के अध्यक्ष अतुल तिवारी ने बताया कि हर साल नवरात्र पर विराजित प्रतिमाओं का चल समारोह दशहरा पर निकलता है। इस बार अभी तक यह तय नहीं हुआ है कि चल समारोह निकाला जाएगा अथवा नहीं। या फिर झांकी संचालक ही प्रतिमाओं का अपने स्तर पर विसर्जन करेंगे। इसी प्रकार दशहरा महोत्सव जैन कालेज में मनाया जाता है। इसकी तैयारियां पहले से होती हैं।
इसके लिए रामलीला मेला समिति भी अपनी तैयारियां करती है। रामलीला मैदान से लेकर जैन कालेज ग्राउंड तक जुलूस निकलता है। इसी प्रकार राजपूत समाज का चल समारोह भी निकलता है। इसके आयोजन को लेकर भी असमंजस है।
डीजे संचालक, लाइट और टेंट हाउस वाले हुए शामिल: शासन की कोरोना गाइड लाइन का सभी झांकी संचालकों से पालन करने का निवेदन संचालन समिति ने किया ।
सभी झांकी संचालकों ने इसे स्वीकारते हुए इनके पालन की बात कही है। इस बैठक में श्री दुर्गा उत्सव समितियों के पदाधिकारीगण एवं झांकी से संबंधित मूर्तिकार, डीजे संचालक, बैंड संचालक, ढोल संचालक, लाइट डेकोरेशन, टेंट हाउस संचालक सहित समिति पदाधिकारीगण उपस्थित थे।
कोई गाइड लाइन तो नहीं आई है लेकर जल्द करेंगे चर्चा: कलेक्टर
इस संबंध में कलेक्टर डा.पंकज जैन ने कहा कि मुख्यमंत्री की दुर्गोत्सव आयोजन संबंधी घोषणा की जानकारी तो मिली है लेकिन अभी तक उसकी कोई विस्तृत गाइड लाइन नहीं मिली है।
आगामी 21 सितंबर से अनलाक-5 के संबंध में भी नई गाइड लाइन आ सकती है। उसमें भी कुछ नए प्रावधान हो सकते हैं। नई गाइड लाइन मिलते ही मूर्तिकारों और आयोजन समितियों से भी जल्द चर्चा करेंगे।
मूर्तियों के संबंध में समिति ने की अविलंब निर्णय करने की मांग
श्री गणेश उत्सव एवं श्री दुर्गा उत्सव की संचालन समिति सनातन श्री हिंदू उत्सव समिति ने आगामी श्री दुर्गा उत्सव 2020 की तैयारियों को लेकर एक महत्वपूर्ण बैठक का आयोजन मंगलवार शाम स्थानीय श्री लक्ष्मी नारायण मंदिर नंदवाना में किया।
इसमें सर्वसम्मति से श्री दुर्गा उत्सव की अनुमति प्रदान करने पर मुख्यमंत्री का आभार मानते हुए समय रहते दशहरा विसर्जन चल समारोह के संबंध में भी स्पष्ट दिशा निर्देश देने की मांग की। इस बैठक में उपस्थित सभी झांकी संचालकों ने एक स्वर में पुनः गंदे गड्ढे जानकी कुंड में मातारानी की प्रतिमाओं का विसर्जन नहीं करने का सामूहिक निर्णय लिया।
शासन से मूर्तियों के संबंध में अविलंब एक बैठक संचालन समिति, मूर्तिकार व झांकी संचालकों के साथ सामूहिक रूप से करने का आग्रह किया। इसके अलावा निर्णय लिया कि अगर प्रशासन द्वारा शांति समिति की बैठकों के अनुसार ही अगर दुर्गा उत्सव के ऐन समय पर कोई निर्णय देर से लिया जाता है तो इसकी संपूर्ण जिम्मेदारी प्रशासन की होगी और जो मूर्तियां तैयार हो जाएंगी उन्हीं की स्थापना की जाएगी।
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