सुख समृद्धि की कामना को लेकर गुरूवार को महिलाएं महालक्ष्मी व्रत रखकर मिट्टी के हाथी ऐरावत
का विधि विधान से पूजन कर
कथा सुनेगीं।
बाजार में बुधवार को महिलाएं युवतियां मिट्टी के हाथी की खरीदी कर घर ले गईं। हिंदू धर्म में महालक्ष्मी व्रत का विशेष महत्व है। पं. रवि शास्त्री के अनुसार भाद्रपद शुक्ल अष्टमी के दिन यह व्रत शुरू होता है और 16 दिन तक यह व्रत किया जाता है। व्रत में मां लक्ष्मी का पूजन किया जाता है। इस व्रत को करने से सुख समृद्धि और धन की प्राप्ति होती है। इस व्रत से जुड़ी अनेक लोककथाएं हैं लेकिन कुछ कथाएं काफी प्रचलित हैं।
पौराणिक मान्यता : घर में धन की देवी मां लक्ष्मी और सुख समृद्धि के लिए महिलाएं करती है पूजन
उन्होंने बताया कि महाभारत काल में एक बार महर्षि वेदव्यास जी ने हस्तिनापुर का भ्रमण किया। महाराज धृतराष्ट्र ने उन्हें अपने राजमहल में पधारने का आमंत्रण दिया। रानी गांधारी और रानी कुंती ने मुनि वेद व्यास से पूछा कि हे मुनि बताएं कि हमारे राज्य में धन की देवी मां लक्ष्मी और सुख समृद्धि कैसे बनी रहे। यह सुनकर वेदव्यास जी ने कहा कि यदि आप अपने राज्य में सुख समृद्धि चाहते हैं तो प्रतिवर्ष अश्विनी कृष्ण अष्टमी को विधिवत श्री महालक्ष्मी का व्रत करें। मुनि की बात सुनकर दोनों ने महालक्ष्मी व्रत करने का संकल्प लिया। रानी गांधारी ने अपने राजमहल के आंगन में 100 पुत्रों की मदद से विशालकाय गज का निर्माण करवाया और नगर की सभी स्त्रियों को पूजन के लिए आमंत्रित किया। लेकिन रानी कुंती को निमंत्रण नहीं भेजा। जब सभी महिलाएं गांधारी के राजमहल पूजन के लिए जाने लगी तो कुंती उदास हो गई। माता को दुखी देखकर पांचों पांडवों ने पूछा कि माता आप उदास क्यों हैं तब कुंती ने सारी बात बता दी। इस पर अर्जुन ने कहा कि माता आप महालक्ष्मी पूजन की तैयारी कीजिए मैं आपके लिए हाथी लेकर आता हूं। ऐसा कहकर अर्जुन इंद्र के पास गए और इंद्रलोक से अपनी माता के लिए ऐरावत हाथी लेकर आए। जब नगर की महिलाओं को पता चला कि रानी कुंती के महल में स्वर्ग से ऐरावत हाथी आया है तो सारे नगर में शोर मच गया। हाथी को देखने के लिए पूरा नगर एकत्र हो गया और सभी विवाहित महिलाओं ने विधि विधान से महालक्ष्मी का पूजन किया।
का विधि विधान से पूजन कर
कथा सुनेगीं।
बाजार में बुधवार को महिलाएं युवतियां मिट्टी के हाथी की खरीदी कर घर ले गईं। हिंदू धर्म में महालक्ष्मी व्रत का विशेष महत्व है। पं. रवि शास्त्री के अनुसार भाद्रपद शुक्ल अष्टमी के दिन यह व्रत शुरू होता है और 16 दिन तक यह व्रत किया जाता है। व्रत में मां लक्ष्मी का पूजन किया जाता है। इस व्रत को करने से सुख समृद्धि और धन की प्राप्ति होती है। इस व्रत से जुड़ी अनेक लोककथाएं हैं लेकिन कुछ कथाएं काफी प्रचलित हैं।
पौराणिक मान्यता : घर में धन की देवी मां लक्ष्मी और सुख समृद्धि के लिए महिलाएं करती है पूजन
उन्होंने बताया कि महाभारत काल में एक बार महर्षि वेदव्यास जी ने हस्तिनापुर का भ्रमण किया। महाराज धृतराष्ट्र ने उन्हें अपने राजमहल में पधारने का आमंत्रण दिया। रानी गांधारी और रानी कुंती ने मुनि वेद व्यास से पूछा कि हे मुनि बताएं कि हमारे राज्य में धन की देवी मां लक्ष्मी और सुख समृद्धि कैसे बनी रहे। यह सुनकर वेदव्यास जी ने कहा कि यदि आप अपने राज्य में सुख समृद्धि चाहते हैं तो प्रतिवर्ष अश्विनी कृष्ण अष्टमी को विधिवत श्री महालक्ष्मी का व्रत करें। मुनि की बात सुनकर दोनों ने महालक्ष्मी व्रत करने का संकल्प लिया। रानी गांधारी ने अपने राजमहल के आंगन में 100 पुत्रों की मदद से विशालकाय गज का निर्माण करवाया और नगर की सभी स्त्रियों को पूजन के लिए आमंत्रित किया। लेकिन रानी कुंती को निमंत्रण नहीं भेजा। जब सभी महिलाएं गांधारी के राजमहल पूजन के लिए जाने लगी तो कुंती उदास हो गई। माता को दुखी देखकर पांचों पांडवों ने पूछा कि माता आप उदास क्यों हैं तब कुंती ने सारी बात बता दी। इस पर अर्जुन ने कहा कि माता आप महालक्ष्मी पूजन की तैयारी कीजिए मैं आपके लिए हाथी लेकर आता हूं। ऐसा कहकर अर्जुन इंद्र के पास गए और इंद्रलोक से अपनी माता के लिए ऐरावत हाथी लेकर आए। जब नगर की महिलाओं को पता चला कि रानी कुंती के महल में स्वर्ग से ऐरावत हाथी आया है तो सारे नगर में शोर मच गया। हाथी को देखने के लिए पूरा नगर एकत्र हो गया और सभी विवाहित महिलाओं ने विधि विधान से महालक्ष्मी का पूजन किया।

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