72 साल के रिटायर्ड निगम अफसर और उनकी पत्नी को इकलौते बेटा और उसकी पत्नी ने न सिर्फ बेरहमी से पीटा बल्कि पेंशन के रुपए छीनकर उन्हें खाना देना तक बंद कर दिया। अपने हक की बात करने पर उन्हें घर से भी निकाल दिया। रोते-बिलखते वृद्ध दंपत्ति रात में ग्वालियर थाने पहुंचे। पुलिसकर्मियों ने पहले दोनों को खाना खिलाया फिर उनकी एफआईआर दर्ज की। बाद में दंपति को उनकी बेटी के यहां छुड़वाया। मामले में आरोपी बेटा फरार है। उसकी पत्नी भी गायब है।
ग्वालियर थाना प्रभारी बलवीर सिंह मावई ने बताया कि गोसपुरा नंबर-1 स्थित मैदाई मौहल्ला निवासी भानुप्रताप सिंह सेंगर (72) नगर निगम से रिटायर्ड हैं। वह निगमायुक्त के पीए थे। वह पत्नी रेखा के साथ रहते हैं। पेंशन की राशि से दोनों का भरण-पोषण होता है, लेकिन इकलाैता बेटा राजेश और बहू सत्यम उन्हें प्रताड़ित करते हैं। पेंशन छीन लेते हैं। पिछले 15 दिन से दाेनाें ने माता-पिता काे खाना देना बंद कर दिया। किसी तरह से यह लोग खाने का इंतजाम कर गुजारा कर रहे थे। सोमवार शाम करीब 7 बजे राजेश और उसकी पत्नी ने दोनों का सामान उठाकर घर के बाहर फेंकना शुरू कर दिया। जब भानुप्रताप ने टोका तो डंडे से मारपीट की। बीच में जब उनकी पत्नी रेखा आई तो उन्हें जमीन पर पटका और घसीटकर दोनों को घर के बाहर कर दिया। पड़ोसियों ने समझाने की कोशिश की ताे उन्हें भी धमकाया। रात में दंपत्ति रोते हुए ग्वालियर थाने अाए। पुलिस ने दाेनाें के भोजन की व्यवस्था करने के बाद एफआईआर दर्ज की। इनके पड़ोसी भी थाने अाए। उनसे नंबर लेकर बेटे को कॉल लगाया तो वह घर से भाग गया। उसने अपनी बहनों को फोन कर माता-पिता को थाने से ले जाने की धमकी भी दी। वृद्ध दंपत्ति को आनंद नगर में उनकी बेटी के यहां छुड़वाया गया।
सिर्फ नाम की हेल्पलाइन
- एक साल पहले तत्कालीन एसपी नवनीत भसीन ने बुजुर्ग हेल्पलाइन शुरू कराई थी। शुरुआत में इस पर आई शिकायतों पर कार्रवाई हुई, लेकिन पिछले कुछ दिनों से हेल्पलाइन नाम की रह गई।
- हर सप्ताह प्रशासन की तरफ से बुजुर्गों की सुनवाई भरण पोषण अधिनियम के तहत की जाती थी, लेकिन फिलहाल यह सुविधा बंद है।
- राष्ट्रीय वयोश्री योजना में कई शहरों में काम शुरू हो गया है, लेकिन ग्वालियर में महिला एवं बाल विकास विभाग के अफसर गंभीर नहीं हैं।
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