भारत-चीन की सीमा स्थित लद्दाख के गलवान घाटी में मंगलवार की देर रात चीनी सैनिकों से लड़ते लेते शहीद हुए जवान कुंदन कुमार ओझा का पैतृक घर शाहपुर प्रखंड के पहरपुर गांव में है। उनके पिता रविशंकर ओझा है। कुंदन के पैतृक गांव शाहपुर प्रखंड के पहरपुर में शहादत की खबर मिलते ही पूरा माहौल गमगीन हो गया। शहीद जवान का पूरा परिवार झारखंड के साहेबगंज में रहता है। शहादत की खबर मिलते ही गांव समेत पूरे क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गयी। इनकी शहादत और जज्बे से लोगों का गर्व से सीना चौड़ा हो गया है।
शहादत की सूचना मिलने पर गांव के ग्रामीणों ने गम और गुस्से के बीच चीन को सबक सिखाने की मांग की। बताया जाता है कि शहीद जवान के गोतिया में परिवार के अन्य सदस्य पहरपुर गांव में रहते है। शहादत की खबर मिलने पर परिजनों में कोहराम मच गया। चाचा के घर पर लोगों की भीड़ जुट गयी। शोकाकुल लोग शहीद कुंदन के बलिदान व शौर्य की प्रशंसा करने के साथ-साथ आंसुओं में डूबे थे। सभी को अपने लाल के खोने का गम सता रहा था।
वर्ष 2017 में हुई थी शादी, लाडली बिटिया का मुंह देखे बिना चीनी सैनिकों से लोहा लेते हुए वीरगति को प्राप्त हुए
शहीद कुंदन ओझा 3 भाइयों और एक बहन में मंझले थे। इनके बड़े भाई मुकेश ओझा व छोटे भाई कन्हैया ओझा झारखंड में ही जाॅब करते है। शहीद कुंदन ओझा की शादी वर्ष 2017 में मिरहटी सुलतानपुर में हुई थी। इनकी 20 दिन पहले एक पुत्री हुई है। लेकिन शहीद जवान अपनी लाडली बिटिया का मुँह देखे बिना शौर्य व पराक्रम की गाथा लिखकर वीरगति को प्राप्त कर गये।
कुंदन की वर्ष 2011 में 16 बिहार रेजीमेन्ट दानापुर में बहाली हुई थी और वर्ष 2012 में उन्होंने भारतीय थल सेना में ज्वाईन किया था। इनके चाचा सोनू ओझा ने बताया कि पूरा परिवार 30-35 वर्ष पहले से ही झारखंड राज्य के साहेबगंज जिले के बिहारी ग्राम में रहते है। परिवार के लोग शादी-विवाह समेत अन्य अवसरों पर गांव आते रहते है। पहरपुर गांव में रह रहे कुंज बिहारी ओझा, तीर्थनाथ ओझा, गुड्डू ओझा, शशिशंकर ओझा व सच्चितानंद ओझा समेत अन्य लोगों ने बताया कि वीर कुंदन ने अपने शौर्य से हमसभी को गौरवान्वित किया है। लेकिन हमने अपने वीर सपूत को खो दिया है।
खेमरिया को देहात, चौहान को बैराड़ थाना प्रभारी बनाया
पुलिस अधीक्षक शिवपुरी ने बुधवार की देरशाम तबादला सूची जारी कर कई थाना प्रभारियों को बदला है। पुलिस लाइन में पदस्थ टीआई सुनील खेमरिया को देहात थाने की कमान सौंपी है। वहीं तेंदुआ थाना प्रभारी एसआई अरविंद सिंह चौहान को बैराड़ थाने की जिम्मेदारी सौंपी है। बैराड़ थाने से टीआई सुरेंद्र सिंह सिकरवार को पुलिस लाइन शिवपुरी तबादला किया है। इसी तरह रन्नौद थाना प्रभारी उमेश उपाध्याय को बदरवास थाना प्रभारी बनाया है।
देहात थाना प्रभारी एसआई केएन शर्मा को तेंदुआ। करैरा में पदस्थ एसआई अंशुल गुप्ता को गोवर्धन। कोतवाली में पदस्थ एसआई अरविंद छारी को सतनवाड़ा। देहात थाने में पदस्थ एसआई रघुवीर सिंह धकाड़ को छर्च। पुलिस लाइन से एसआई अनिल रघुवंशी को रन्नौद। महिला अपराध प्रकोष्ठ प्रभारी एसआई दीप्ति तोमर को सुरवाया थाना प्रभारी बनाया है। सतनवाड़ा थाना प्रभारी एसआई गब्बर सिंह गुर्जर को सुनारी चौकी का प्रभारी बनाया है। थाना प्रभारी सुरवाया दिनेश नरवरिया को देहात थाने भेजा है। गोवर्धन थाना प्रभारी एसआई सुरेंद्र सिंह यादव को सिटी कोतवाली, छर्च थाना प्रभारी राजेंद्र शर्मा को करैरा। सुनारी चौकी प्रभारी अरविंद सिंह राजपूत को खनियांधाना। पुलिस कंट्रोल रूम शिवपुरी से एएसआई अमरलाल बंजारा को बैराड़ भेजा है। खनियांधाना थाने से अरुण वर्मा को फिजिकल थाने तबादला किया है।
इस बार जीएसीसी और होलकर कॉलेज में घटेगा कटऑफ
कॉलेजों में ऑनलाइन और ऑफलाइन एडमिशन की प्रक्रिया इस बार तीन माह लेट यानी अगस्त अंत तक या सितंबर में शुरू होने की संभावना है। ऐसे में शिक्षाविदों का अनुमान है कि इस बार कोरोना संकट के कारण एडमिशन को लेकर होने वाली प्रतिस्पर्धा घटेगी। कटऑफ नीचे गिरेगा। ऐसा बाहरी छात्रों की संख्या घटने से होगा। सरकारी कॉलेजों में जो कटऑफ अभी तक आ रहा था, वह 3 से 9 प्रतिशत तक गिरेगा। सबसे ज्यादा असर प्रोफेशनल कोर्स पर पड़ेगा। हालांकि यह बेहद अहम है कि ऑनलाइन प्रवेश प्रक्रिया में इस बार ज्यादातर छात्रों को पसंद का कॉलेज अलॉट होने की संभावना बढ़ गई है।
होलकर में 93 प्रतिशत था कटऑफ
अभी तक होलकर साइंस कॉलेज में सबसे ज्यादा कटऑफ होता था। पिछले साल यहां बीएससी पीसीएम में सबसे ज़्यादा 93% कट ऑफ रहा। जबकि जीएसीसी यानी गवर्नमेंट अटल बिहारी वाजपेयी कला एवं वाणिज्य महाविद्यालय में बीए का कट ऑफ 78% तक पहुंच गया था। वहीं गवर्नमेंट लॉ कॉलेज में एलएलबी का 73 प्रतिशत और बीए एलएलबी का 74 प्रतिशत तक पहुंच गया था। इस बार ये 3 से 9 प्रतिशत तक घटेगा। रिटायर्ड प्राचार्य डॉ. एसएल गर्ग का कहना है कि कट ऑफ भी घटेगा और छात्र भी घटेंगे। बाहरी छात्रों की संख्या 30% तक घटेगी।
बीएड और एमबीए में नहीं मिलता था पसंद का कॉलेज- अब तक एमबीए में सिमेट या ग्रेजुएशन के अंकों के आधार पर प्रवेश होते आए हैं। लेकिन हमेशा टफ प्रतिस्पर्धा के चलते 70% छात्रों को पसंद का कॉलेज नहीं मिलता था। इस बार ज्यादातर छात्रों को आसानी से कॉलेज मिल सकेगा। यही स्थिति बीएड में भी रहेगी।
बाहरी छात्रों के जाने का असर निजी कॉलेजों व यूनिवर्सिटी पर
इधर, निजी कॉलेजों और यूनिवर्सिटी का भविष्य भी गुणवत्ता पर टिका है। शिक्षाविद् डॉ. रमेश मंगल कहते हैं जो कॉलेज निजी यूनिवर्सिटी बेहतर माहौल और सुविधाएं देंगे, वही इस बार टिक पाएंगे, क्योंकि बाहरी छात्रों की संख्या घटने का सबसे ज्यादा असर इन्हीं पर पड़ेगा। पूर्व कुलपति डॉ. नरेंद्र धाकड़ का कहना है कि इस बार स्थानीय छात्रों को बाहर जाने से रोकना होगा। यह चुनौती गुणवत्ता से ही पूरी होगी।
पिछले साल हुए थे 1 लाख से ज्यादा नए एडमिशन- पिछले साल परंपरागत यूजी कोर्स में 85 हजार 200 एडमिशन हुए थे, जबकि परंपरागत पीजी कोर्स में 12 हजार और एमबीए में 7700 एडमिशन हुए थे। इसके अलावा बीबीए, बीसीए और बीए एलएलबी जैसे कोर्स में 23 हजार नए एडमिशन हुए थे। बीएड में 2900 और एलएलएम तथा कुछ स्पेशलाइजेशन कोर्सेस में 1300 एडमिशन हुए थे। जबकि 9 निजी यूनिवर्सिटी में 14 हजार 700 एडमिशन हुए।
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