शनिवार, 9 मई 2020

सरकार ने कइयों के बंद हो चुके जन-धन खातों में भेजी आर्थिक मदद, आरोप-एसबीआई कर्मियों ने खाते रि-एक्टिवेट करने से मना किया


यमुनानगर| लॉकडाउन में लोगों की आर्थिक मदद के लिए सरकार ने जो पैसा अकाउंट में डाला, वह कइयाें काे नहीं मिल पा रहा है। कई बैंक इस पैसे को देने में रोड़े अटका रहे हैं। ऐसा ही मामला सामने आया है सरस्वती शुगर मिल के पास एसबीआई ब्रांच का। इस ब्रांच में काफी लोगों के जनधन खाते थे, जाे ऑपरेट न होने से बंद हो गए। अब सरकार ने उन्हीं में पैसा भेज दिया। साथ ही बैंकाें काे यह भी आदेश दिए थे कि जो अकाउंट बंद हो चुके हैं उन्हें रि-एक्टिवेट किया जाए। महिलाएं सरकार के भेजे-500-500 रुपए लेने के लिए बैंक के चक्कर लगा रही हैं, लेकिन बैंक वाले उन्हें पैसे नहीं दे रहे। उन्होंने विरोध किया और हमीदा पुलिस चौकी में डीसी के नाम शिकायत दी। महिलाओं का आरोप है कि उनके अकाउंट में आए पैसे को बैंककर्मी हड़प सकते हैं इसलिए इस पैसे को अकाउंट से निकाल कर उन्हें दिया जाए। सरकार ने यमुनानगर जिले के विभिन्न बैंकों के 1.75 लाख लोगों के अकाउंट में पैसा ट्रांसफर किया गया है।
बैंक वाले कहते हैं लॉकडाउन के बाद आना
हमीदा की खड्ढा कॉलोनी निवासी वकीला, अफसाना, कंचन, सूरज बैंक के चक्कर लगा चुकी हैं। महिलाअाें ने बताया कि लॉक डाउन में परिवार के पुरुष काम पर नहीं जा पा रहे हैं। इससे आर्थिक संकट बना हुआ है। सरकार ने जो पैसे दिए थे वे बैंक में फंसकर रह गए हैं। उनका कहना है कि जो अकाउंट बैंक कर्मी बंद बता रहे हैं उसमें उनके कुछ पैसे भी जमा हैं। उनके अकाउंट उनकी बिना सहमति के बंद कर दिए गए जोकि गलत है।
बहुत से लोग बैंक वालों की वजह से पैसे ही नहीं निकलवा पाए
इस तरह का मामला अकेले एसबीआई का नहीं है। अन्य कई बैंक भी उपभोक्ताओं के साथ मनमानी कर रहे हैं। इससे सरकार की भेजी आर्थिक सहायता अकाउंट में ही फंसकर रह गई है। अधिकारी भी ध्यान नहीं दे रहे।एलडीएम सुनील कुमार ने बताया कि बहुत से जनधन अकाउंट बंद हो चुके हैं, लेकिन सरकार ने उनमें आर्थिक मदद भेजी है। इसलिए सभी बैंकों को आदेश हैं कि इन अकाउंट को जरूरी दस्तावेज लेकर रि-एक्टिवेट करें। अगर कोई ऐसा नहीं कर रहा है तो वह गलत है।



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