शुक्रवार, 1 मई 2020

1400 पैकेट राशन गरीबों को बांटेंगे चार पार्षद


नगर निगम क्षेत्र में रहने वाले गरीब व बेसहारा परिवारों की मदद करने के लिए गुरुवार को चार पार्षदों ने अपनी पार्षद निधि का 50 फीसदी हिस्सा दान में दी। लगातार हो रही आलोचना के बाद इन पार्षदों ने अपने वार्ड में जरूरतमंदों के हिसाब से यह राशि दी है। इन पार्षदों में नगर निगम नेता प्रतिपक्ष और श्यामाप्रसाद मुखर्जी वार्ड पार्षद संजय पांडे, महात्मा गांधी वार्ड पार्षद विक्रम डांगी, अटल बिहारी वाजपेई वार्ड पार्षद शंभू नाग तथा शहीद गुंडाधुर वार्ड के पार्षद मोतीराम शामिल हैं। चारों पार्षदों ने वार्ड के लोगों की मांग को देखते हुए 1416 राशन किट के पैकेट तैयार करवा रहे हैं, जिन्हें जल्द ही वार्डों में बांटा जाएगा।

गौरतलब है कि पार्षद निधि को दान में नहीं देने से कई वार्ड के लोग पार्षदों से नाराज हो रहे थे और कुछ तो उनके घर का घेराव करने की योजना भी बना रहे थे। इसमें सबसे अधिक लोग वहां के शामिल थे जहां के लोग सालों बाद स्लम एरिया में इस समय रह रहे हैं। इसमें कई वार्ड तो ऐसे हैं जो नगर निगम कार्यालय से लगे हुए हैं, लेकिन इन लोगों को अब तक उनके वार्ड के पार्षद द्वारा कोई विशेष मदद नहीं की जा रही है। कुछ लोगों ने तो कहा कि सरकार ने चावल दे दिया है। पार्षद दाल और तेल के साथ ही सब्जी की व्यवस्था कर देते तो काफी अच्छा होता है।

संजय पांडे ने दिए सबसे अधिक 2.47 लाख रुपए
गरीब और बेसहारा परिवारों की मदद के लिए अब तक दी गई पार्षद निधि में सबसे अधिक राशि संजय पांडे ने दी है। उन्होंने 320 राशन किट के लिए 2 लाख 47 हजार रुपए दिए हैं। इसके अलावा विक्रम सिंह डांगी ने 2 लाख 43 हजार रुपए 500 राशन किट के लिए तो वहीं मोतीराम ने करीब 1 लाख रुपए और शंभू नाग ने 396 किट बनाने के लिए 1 लाख 96 हजार रुपए दिए हैं। इन पार्षदों ने कहा कि वार्ड के विकास के साथ ही लोगों की मुश्किलों काे दूर करने का दायित्व उनका है, जिसे वे पूरा कर रहे हैं।
महापौर-अध्यक्ष कर रहे मदद पर निधि का उपयोग नहीं
कोरोना वायरस के संक्रमण से बचाव के लिए नगर निगम नेता प्रतिपक्ष संजय पांडे ने तो पहल कर दी, लेकिन महापौर सफीरा साहू और निगम अध्यक्ष कविता साहू ने अब तक कोई पहल नहीं की है। हालांकि दोनों ही जनप्रतिनिधियों द्वारा लोगों की मदद की जा रही है। महापौर को शासन द्वारा कोरोना के चलते दी जाने वाली राशि आवंटित कर दी गई है। बावजूद इसके महापौर इस निधि का उपयोग करने के लिए आगे नहीं आई हैं।

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