शनिवार, 8 फ़रवरी 2020

सोयाबीन से बने सुशी और मीसो खाकर लंबी उम्र पाते हैं जापानी, इनके फाइबर-पोटेशियम से बुढ़ापा नहीं आता


टाेक्याे .दुनिया में 100 साल से ज्यादा उम्र तक जीने वालों की सबसे ज्यादा संख्या जापान में है। शुक्रवार को जापान के नेशनल कैंसर रिसर्च सेंटर के वैज्ञानिकों ने उनकी लंबी उम्र पाने के राज का खुलासा किया है। एक लाख लोगों पर 15 साल तक किए गए अध्ययन के आधार पर बताया गया कि लंबी उम्र का राज सुशी और सूप के साथ मीसो पेस्ट और नेटो खाना है। ये सोयाबीन से बनते हैं। इन उत्पादों में वीगन ताेफू और पारंपरिक मीसो, सिरका और नमक के साथ बनने वाला सुशी, सूप शामिल है। इनके खाने से शरीर में जवान बने रहने के लिए जिम्मेदार टिश्यू नष्ट नहीं होते।

इस खाने में फाइबर और पोटेशियम बहुत ज्यादा मात्रा में पाया जाता है और यही उनकी लंबी उम्र का राज भी है। रिसर्च में पता चला कि जो लोग मीसो और नेटो खाते थे, उनके समय से पहले मरने की संभावना दूसरों की तुलना में 10% कम थी। वैज्ञानिकों का कहना है कि इन चीजों में फाइबर और पोटेशियम के साथ अन्य ऐसे तत्व पाए जाते हैं, जो शरीर में कोलेस्ट्रॉल को संतुलित रखते हैं। जापान में लोग पारंपरिक तौर पर कम से कम 84 साल की उम्र पाते हैं, जो पूरी दुनिया में सबसे ज्यादा है। ज्यादातर जापानी सुबह की शुरुआत मीसो सूप से करते हैं। वैज्ञानिकों ने बताया कि जापान में लंबी उम्र के लिए आहार और कसरत के अलावा साफ-सफाई पर भी विशेष ध्यान दिया जाता है। यहां लाइब्रेरी में कोई किताब लौटाने पर उसे यूवी तकनीक से साफ किया जाता है, ताकि उसमें मौजूद हानिकारक कीटाणु दूसरों तक ना पहुंचे। उनकी दिनचर्या का हर एक काम अच्छी सेहत से संबंध रखता है। यहां लोग जीवन को मुस्कुराकर जीने का नजरिया रखते हैं और इन्हीं कारणों से वे लंबी उम्र पाते हैं।

87% लोगों ने भूख के बावजूद कम खाना औरनमककम खाया

वैज्ञानिकों ने 45 से 74 साल के 42,750 पुरुष और 50,165 महिलाओं के रोज के खान-पान की आदतों का अध्ययन किया। इस दौरान 13,303 प्रतिभागियों की मौत हो गई। 99% लोग भोजन में हरी सब्जी और दाल का ज्यादा मात्रा में सेवन करते दिखे। इनमें 87% लोग भूख लगने के बावजूद पेटभर खाने की बजाय हमेशा भूख से थोड़ा कम खाना खाया। साथ ही कम से कम मात्रा में नमक का इस्तेमाल किया।





वैज्ञानिकों ने 45 से 74 साल के 42,750 पुरुष और 50,165 महिलाओं के रोज के खान-पान की आदतों का अध्ययन किया।




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