मंगलवार, 11 फ़रवरी 2020

दुर्घटना का मुकदमा समाप्त होने के एक साल बाद गिरफ्तार, रातभर हवालात में बंद रहा बेगुनाह






जयपुर (योगेश शर्मा).एक बेगुनाह को पूरी रात थाने के हवालात में बंद रहना पड़ा। पुलिस ने सोमवार दोपहर पीड़ित को कोर्ट में पेश किया। जहां एक साल पहले संबंधित दुर्घटना का मुकदमा समाप्त होने के आधार पर उसे रिहा कर दिया गया। दरअसल पीड़ित के खिलाफ स्टेंडिंग वारंट जारी हुआ था। जिसे मुकदमे का फैसला हो जाने पर थाने से वापस नहीं मंगाया गया।

एसीएमएम कोर्ट संख्या-11 सरिता नौशाद ने रेनवाल मांझी स्थित बीड़ की ढाणी निवासी मूलचंद चौधरी को फरार घोषित कर स्टेंडिंग वारंट जारी करने का आदेश दिया। एसीएमएम 11 के हस्ताक्षरों से 15 फरवरी 2019 को वारंट जारी हो गए। शिप्रापथ थाना पुलिस ने पीड़ित को रविवार शाम को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने उसे रात भर थाने के हवालात में बंद रखा। पुलिस सोमवार शाम 3.45 बजे एसीएमएम कोर्ट संख्या 11 में पीड़ित को लेकर पहुंची। जिसके मजिस्ट्रेट के अवकाश पर होने के कारण उसे लिंक कोर्ट एसीएमएम संख्या-12 विनोद कुमार बागड़ी के सामने पेश किया। पीड़ित के साथ उसके अधिवक्ता अनिल चतुर्वेदी पेश हुए।

कोर्ट ने एक साल पहले किया था बरी

चतुर्वेदी के अनुसार पीड़ित ने 26 फरवरी 2019 को एसीएमएम कोर्ट संख्या 11 में आत्मसमर्पण कर दिया था। कोर्ट ने उसी दिन मुकदमा खत्म कर दिया। इस पर लिंक कोर्ट ने इस मुकदमे की फाइल मंगाई। फाइल में 26 फरवरी को मुकदमा समाप्त होने का आदेश था। इसके साथ स्टेंडिंग वारंट थाने से वापस मंगाने का आदेश ही नहीं था। लिंक कोर्ट ने पीड़ित काे दस्तखत करा रिहा कर दिया। पीड़ित 2009 में अपने परिचित सीताराम की कार चला रहा था। दुर्गापुरा रेलवेस्टेशन पर उसकी कार की मोटर साइकल से टक्कर हो गई। मोटरसाइकल सवार की शिकायत पर पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर चालान पेश किया। इस मुकदमे को 26 फरवरी 2019 कोर्ट ने मूलचंद पर 1500 रुपए का जुर्माना लगाया। जिसे जमा कराने पर केस खत्म कर दिया गया।

थाने से वापस नहीं मंगाया स्टेंडिंग वारंट

पीड़ित मूलचंद चौधरी ने बताया कि ' मैंने पुलिसकर्मियों को बताया कि मेरा मुकदमा खत्म हो गया है। उन्होंने कागज मांगे पर एक साल पुराने कागज मेरे पास नहीं थे। पुलिसकर्मी मेरे घर खाना खाने के बाद मुझे पकड़कर थाने ले आए। '

राजस्थान हाईकोर्ट के पूर्व न्यायाधीनजस्टिस पानाचंद जैन ने बताया कियह राइट टू लिबर्टी संविधान के आर्टिकल 19 का उल्लंघन है। जिम्मेदारों पर फौजदारी मुकदमा दर्ज होना चाहिए। पीड़ित को मुआवजे के लिए भी दावा करना चाहिए।
सफेद शर्ट में पीड़ित




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