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शनिवार, 6 मार्च 2021

किसान महापंचायत:दिग्विजय सिंह ने चुटकी बजाकर नेताओं को मंच से उतारा, फिर डेढ़ घंटे धूप में बैठ किसानों से सुना- कृषि बिल में क्या-क्या खामियां


देश में अब वही पिक्चर हिट होगी जो सत्यता दिखाएगी। क्योंकि सिनेमा सच का आईना होता है। जिन लोगों को केंद्र सरकार के कृषि बिल की हकीकत समझना है उन्हें मदर इंडिया, दो आंखें बारह हाथ जैसी पुरानी पिक्चर देखना चाहिए, जिसमें उस समय देश में किसान और मजदूर की स्थिति का आकलन आप लगा पाएंगे। सेठ कम भाव में अनाज खरीदता था, फिर महंगे भाव में बेचकर कालाबाजारी करता था। बस यही हकीकत केंद्र सरकार के तीनों कृषि बिल की है। यह कानून हमारी रोटी को तिजारी में कैद करने का कानून है।

यह बात किसान विरोधी कृषि बिल के लिए बड़नगर में आयोजित किसान महापंचायत में शुक्रवार दोपहर राजस्थान से आए किसान नेता रणजीत राजू ने कही। महापंचायत में शामिल होने पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह सिंह, पूर्व केंद्रीय मंत्री अरुण यादव सहित विधायक और पार्टी नेताओं ने मंच से दूरी बनाई। सभी ने मंच के नीचे कड़ी धूप में डेढ़ घंटे तक बैठकर किसान नेताओं द्वारा कृषि बिल में गिनाई गई खामियों को धैर्यपूर्वक सुना। दिग्विजय सिंह ने कहा कि वे कृषि बिल को किसानों से समझाने आए हैं।

उन्होंने मंच पर चढ़ने की कोशिश में जुटे कांग्रेसियों को एक चुटकी बजाकर उतार दिया। इससे पहले ट्रैक्टर मार्च भी निकाला गया, जो शहर के मुख्य मार्गों से होते हुए खोब दरवाजे पर सभा में तब्दील हो गया। सभा में शामिल पंजाब, हरियाणा दिल्ली के किसान नेता भी आए। अध्यक्षता विधायक मुरली मोरवाल ने की। किसान महापंचायत में विधायक दिलीप सिंह गुर्जर, महेश परमार, जिला कांग्रेस अध्यक्ष कमल पटेल आदि भी शामिल हुए। किसान आंदोलन में शहीद हुए 250 से अधिक किसानों को श्रद्धांजलि भी दी गई। संचालन ने केदार सिरोही ने किया। आभार किसान नेता मोहनलाल त्रिवेदी ने माना।

उज्जैन : मंच से सड़क तक नेतागिरी और विरोध में भी खिलखिलाहट

उज्जैन में हुए आंदोलन में मंच पैर रखने तक की जगह नहीं थी। - Dainik Bhaskar
उज्जैन में हुए आंदोलन में मंच पैर रखने तक की जगह नहीं थी।

ट्रैक्टरों पर किसान महापंचायत का झंडा ही लहरा रहा था, लेकिन कांग्रेस का नदारद

शुक्रवार को बड़नगर में कांग्रेस की सियासत का गणित बदला नजर आया। कांग्रेस का झंडा तक यहां नजर नहीं आया। मार्च में शामिल सैकड़ों ट्रैक्टरों पर किसान महापंचायत का झंडा ही लहरा रहा था। पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह, भारतीय कृषक संघ के अध्यक्ष अरुण यादव और पार्टी के दिग्गज से लेकर दूसरी पंक्ति के नेता मंच की बजाए जमीन पर बैठे नजर आए।

जबकि इससे पहले 18 जनवरी को उज्जैन में हुए किसान आंदोलन के मंच पर चौथी पंक्ति के कार्यकर्ताओं तक के बोझ से मंच ढहने की नौबत तक आ चुकी थी। किसान आंदोलन की बजाए ट्रैक्टरों पर लहराता कांग्रेस का झंडा किसान के हक में आंदोलन की गवाही नहीं दे रहा था। शायद तब पार्टी के आलाकमान से चूक हुई थी। इसे बड़नगर में दिग्विजय ने सिर्फ चुटकी बजाकर सुधार दिया।


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