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शनिवार, 6 मार्च 2021

ज्योतिर्लिंग महाकालेश्वर मंदिर:मंदिर में न डिस्टेंसिंग-न मास्क, कुछ दिन बाहरियों पर रोक ही विकल्प


एक अपील- इस शिवरात्रि पर महाकाल को दूर से करें संयम का प्रणाम

ज्योतिर्लिंग महाकालेश्वर मंदिर में शिव नवरात्र के चलते देशभर से श्रद्धालुओं का आगमन हो रहा है। मंदिर परिसर में इन श्रद्धालुओं द्वारा कोरोना गाइड लाइन का पालन नहीं किया जा रहा। न मास्क और न सोशल डिस्टेंसिंग। इन हालातों में महाशिवरात्रि पर आने वाले श्रद्धालुओं के कारण संक्रमण फैलने की आशंका बढ़ गई है। मंदिर के पुजारी, भक्त, सामाजिक कार्यकर्ता, होटल व्यवसायी सभी का मत है कि राज्य सरकार को अन्य प्रदेशों से आने वाले श्रद्धालुओं पर रोक लगाना चाहिए। खासकर उन प्रदेशों से आने वालों को रोकना जरूरी है, जहां कोरोना ने फिर से पैर पसार लिए हैं।

महाकालेश्वर मंदिर में ऑनलाइन प्री-परमिशन और 250 रुपए की दान रसीद से ऑफलाइन दर्शन कराए जा रहे हैं। जो श्रद्धालु प्री-परमिशन नहीं करा पाते उनके लिए मंदिर समिति ने दो जगह हाथोंहाथ प्री-परमिशन काउंटर भी लगाए हैं। महाशिवरात्रि 11 मार्च को है तथा 12 मार्च की सुबह तक यह पर्व मनाया जाता है। इसलिए दो दिन मंदिर में देशभर के श्रद्धालु उमड़ते हैं। दर्शन के लिए जद्दोजहद होती है। हालांकि राज्य सरकार ने घोषणा की है कि महाशिवरात्रि पर 11 व 12 मार्च को कुल 25 हजार श्रद्धालुओं को प्री-परमिशन दी जाएगी।


लेकिन यह तय नहीं किया है कि यह श्रद्धालु केवल प्रदेश के होंगे या देश-विदेश के। मंदिर समिति के प्रशासक नरेंद्र सूर्यवंशी कहते हैं कि प्री-परमिशन कोई भी श्रद्धालु ले सकता है। यह कैसे तय किया जा सकता है कि किस जगह का श्रद्धालु दर्शन करेगा, किस जगह का नहीं। हमने केवल दर्शनार्थियों की संख्या कम की है। कोरोना गाइड लाइन का पालन कराते हुए दर्शन सुविधा दी जाएगी। सुरक्षा के सभी बंदोबस्त किए जाएंगे।

वहां से भी श्रद्धालु आ रहे जहां ज्यादा संक्रमण
मंदिर में अभी उन सभी प्रदेशों से श्रद्धालु आ रहे हैं, जहां ज्यादा संक्रमण है। इन प्रदेशों में महाराष्ट्र, दिल्ली, गुजरात, राजस्थान, यूपी, बिहार प्रमुख हैं। महाकाल मंदिर में महाशिवरात्रि पर इन्हीं प्रदेशों से ज्यादा यात्री आते हैं। इन यात्रियों को मंदिर परिसर में कोरोना गाइड लाइन का उल्लंघन करते देखा जा सकता है।
अभी ऐसे हालात : हर काउंटर और कतार में भीड़
प्रशासन के दावे की हकीकत मंदिर में मौजूदा दर्शन व्यवस्था से सामने आ जाती है। काउंटरों से लेकर कतार तक भीड़ का चेहरा बिना मास्क और सोशल डिस्टेंसिंग के नजर आ रहा है।

लोग बोले- व्यापक प्रचार और चेकिंग व्यवस्था जरूरी
मंदिर समिति के पूर्व सदस्य प्रदीप पुजारी कहते हैं प्रशासनिक व्यवस्था का व्यापक प्रचार होना चाहिए कि केवल 25 हजार को ऑनलाइन परमिशन पर ही प्रवेश मिलेगा। मंदिर में बिना जांच, बिना मास्क, बिना सैनिटाइजर एक भी व्यक्ति प्रवेश नहीं करे, यह पुख्ता प्रबंध हो।

सामाजिक कार्यकर्ता गिरीश जायसवाल कहते हैं कि महाकाल के प्रति लोगों की असीम आस्था है। कोई भी प्रतिबंध उन्हें नहीं रोक सकता, यह हम पिछले श्रावण में देख चुके हैं। ऐसे में जितनी सावधानी हम बरत सकते हैं, उसका प्रबंध करना चाहिए।

पूर्व महापौर मीना जोनवाल मानती हैं कि हालाकि श्रद्धालुओं के आने पर प्रतिबंध लगाना आस्था पर रोक जैसा है लेकिन परिस्थितियों में श्रद्धालुओं को संक्रमण से बचाना हमारी जिम्मेदारी है। सरकार ने संख्या तय कर अच्छा निर्णय लिया है, अब प्रशासन व्यवस्था करे।

समिति सदस्य आशीष पुजारी का कहना है कि मंदिर के सभी पुजारियों, पुरोहितों, उनके प्रतिनिधियों, कर्मचारियों, सुरक्षाकर्मियों को वैक्सीन लगाना चाहिए। मंदिर में पर्व के चलते श्रद्धालुओं का आवागमन बढ़ गया है। ऐसे उनकी सुरक्षा जरूरी है।

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