- कुछ संस्थाओं ने आवंटन को कोर्ट में चुनौती देकर उलझा रखा है
जिला प्रशासन व पुलिस भूमाफियाओं से प्लाॅट छुड़ाकर हाउसिंग सोसायटी के सदस्यों को बांटने के लिए अभियान चला रहे हैं, लेकिन 20 हाउसिंग सोसायटी ऐसी भी हैं, जिनके प्लाॅट इंदौर विकास प्राधिकरण की योजनाओं में अटके हैं। प्राधिकरण दो बार सहकारिता विभाग को पत्र भी लिख चुका, फिर भी सहकारिता विभाग ने गंभीरता नहीं दिखाई।
इन 20 में से कुछ संस्थाओं ने आवंटन को कोर्ट में चुनौती देकर उलझा रखा है। इन संस्थाओं की छोटी-मोटी समस्याएं एक साथ बैठकर दूर हो जाए तो 900 के लगभग प्लाॅट लोगों को सौंपे जा सकतेे हैं। कुछ संस्थाओं की वरीयता सूची बनी भी तो संचालक मंडल कोर्ट से स्टे ले आए, जिसके चलते मामला फिर अटक गया।
ऐसे समझिए क्यों फंसे हैं प्लाॅट
कसेरा गृह निर्माण संस्था को आईडीए से 144 प्लॉट मिलना हैं। सहकारिता ने वरीयता सूची बनाना शुरू किया था। इस बीच संस्था के कर्ताधर्ताओं ने सीधे भोपाल से हस्तक्षेप करवाया और सूची बनाने का काम उज्जैन संभाग के संयुक्त आयुक्त के हवाले कर दिया।
लंबे समय से प्लॉट की बाट जोह रहे सदस्य अब भी निराश हैं। महात्मा गांधी संस्था की सूची बन चुकी थी और सहकारिता विभाग आईडीए को प्रेषित करने ही वाला था कि काम रुक गया। कष्ट निवारक संस्था की तो सूची तैयार कर आईडीए को भेज दी गई थी, पर संस्था के कर्ताधर्ताओं ने कोर्ट से स्थगन लेकर मामला फिर अटका दिया।
20 दिन में भी कोई सुराग नहीं, पुलिस अब भूमाफियाओं की फरारी के पोस्टर छापेगी
भूमाफियाओं के खिलाफ प्रकरण दर्ज होने के 20 दिन बाद भी गिरफ्तारी नहीं होने से अफसर सकते में हैं। आखिरकार भूमाफियाओं की तलाश कर रही एसआईटी को अब सिर्फ उनके खिलाफ दस्तावेज जब्त करने की जिम्मेदारी दी है। वहीं अब दो थानों की संयुक्त टीम बनाई गई है।
अब यही टीम भूमाफियाओं की तलाश में छापे मारेगी। वहीं अफसरों का कहना है कि वे भूमाफियाओं के पोस्टर छपवाकर इनाम घोषित करने की सूचना लोगों को देंगे। एमआईजी और खजराना थाने में दर्ज भूमाफियाओं के खिलाफ प्रकरण के बाद अभी सभी अपराधी फरार हैं। पुलिस ने छापे वाले दिन सिर्फ एक ही आरोपी को गिरफ्तार किया था। इसे लेकर आला अफसर भी नाराज हैं कि टीम किसी को भी पकड़ नहीं पा रही है।
इसलिए भूमाफियाओं के मामले में पड़ताल कर ही एसआईटी को सिर्फ दस्तावेज जब्त करने की जिम्मेदारी दी है। वहीं एक दूसरी टीम बनाकर भूमाफियाओं की तलाश में लगा दी गई है। इधर, आरोपियों के खिलाफ कुछ और शिकायतें भी थानों पर पहुंचने लगी हैं। हालांकि अभी पुलिस उसकी तस्दीक कर रही है। जांच के बाद और भी केस दर्ज किए जा सकते हैं।
आईडीए Vs सहकारिता
दो बार सहकारिता विभाग को अनुबंधित संस्थाओं के सदस्यों की वरीयता सूची भेजने के लिए पत्र लिख चुके हैं, ताकि प्लॉट बांटे जा सके। यह प्लाॅट प्राधिकरण के भी किसी उपयोग के नहीं हैं।
-विवेक श्रोत्रिय , सीईओ, आईडीए
प्राधिकरण के पत्र मिले हैं। पुलिस प्रशासन और विभाग ने जो संस्थाएं मिलकर तय की हैं, उनका निराकरण होने के बाद इन्हीं संस्थाओं के प्लॉट क्लियर कराए जाएंगे।
-एमएल गजभिए, उपायुक्त, सहकारिता


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