- उज्जैन में खराब कर दिया लाखों का गेहूं, ब्लैक लिस्ट का आवेदन शासन के पास पेंडिंग,
- रीजनल मैनेजर बोले- शासन ने ब्लैक लिस्टेड नहीं किया तो क्या करें
पिछले साल रंगा-बिल्ला (जगदीश और गणेश अग्रवाल) के नाम से चर्चित ठेकेदार से जुड़ी दो परिवहन की एजेंसियों की लापरवाही से उज्जैन जिले में समर्थन मूल्य पर खरीदा गया 13500 मीट्रिक टन गेहूं खराब हुआ था। ऐसे में प्रशासन ने इन एजेंसियों को ब्लैक लिस्टेड करने के दो प्रस्ताव शासन को भेजे थे।
हैरत यह है कि इन कड़वे अनुभव के बावजूद रंगा-बिल्ला से जुड़ी एक अन्य फर्म को इस बार रतलाम जिले में परिवहन का ठेका देने के प्रयास हो रहे हैं। टेंडर से जुड़ी खोली गई फाइनल बिड में यह फर्म सबसे ऊपर है। जबकि शुजालपुर-शाजापुर के लिए भी कतार में है। इस मामले में नान के मैनेजर का तर्क है कि हम जानते हैं कि यह समय रहते अनाज का परिवहन नहीं करते हैं। इनके खिलाफ ब्लैक लिस्टेड की कार्रवाई भी प्रस्तावित है लेकिन दस्तावेज पूरे थे तो टेंडर खोल दिए।
दरअसल समर्थन मूल्य पर खरीदे जाने वाले गेहूं सहित अन्य अनाज के परिवहन के लिए ठेके होते हैं। उज्जैन में वर्ष 2020-21 में परिवहन का यह ठेका परिवहनकर्ता मेसर्स दीपेश कुमार एंड संस जिला उज्जैन एवं परिवहनकर्ता मेसर्स शारदा रोड लाइंस जिला उज्जैन के पास था। यह दोनों परिवहन एजेंसियां रंगा-बिल्ला के नाम से चर्चित ठेकेदार से जुड़ी है। ठेका लेने के बाद से ही इन्होंने लापरवाही बरतना शुरू कर दी थी। समय रहते खरीदी केंद्रों से अनाज का परिवहन नहीं किया।
इससे 13500 मीट्रिक टन खुले में रखा गेहूं बारिश के कारण खराब हो गया था। एजेंसियों की लापरवाही पर प्रशासन ने इन पर पांच करोड़ पांच लाख की पैनल्टी भी लगाई। कई नोटिस भी जारी किए। अंत: इनकी हरकतों से परेशान होकर जिला उपार्जन समिति ने इन्हें ब्लैक लिस्टेड करने की अनुशंसा की थी। इसी प्रस्ताव को कलेक्टर ने अपने हस्ताक्षर से शासन को भेजा था। तभी से इन फर्मों पर कार्रवाई विचाराधीन है।
रंगा-बिल्ला के प्रति कड़वे अनुभव
- सस्ती दरों पर ठेके लेते हैं लेकिन बाद में काम अपनी मनमर्जी से करते हैं। अनुबंध शर्तों का पालन नहीं करते हैं।
- इनके द्वारा समय रहते अनाज का परिवहन नहीं करने से खरीदी की प्रक्रिया प्रभावित होती है। शासन-प्रशासन की बदनामी का अंदेशा बना रहता है।
- इनकी लापरवाही से खुले में रखे गेहूं के बारिश से खराब होने के साथ ही चोरी होने की भी आशंका रहती है।
- ये एजेंसियां नोटिस मिलने व पैनल्टी की कार्रवाई के बावजूद भी अपने काम में सुधार नहीं लाती है। ऐसे में प्रशासनिक मशीनरी को परेशान होना पड़ता है।
- परेशान होकर प्रशासन को अपने स्तर से वाहन व ट्रेन की व्यवस्था कर अनाज परिवहन करवाना पड़ता है। इसमें शासन-प्रशासन का अतिरिक्त समय व रुपया लगता है।
सीधी बात: योगेश सिंह, रीजनल मैनेजर, नान उज्जैन
दस्तावेज पूरे थे इसलिए बिड खोल दी
सवाल : रंगा-बिल्ला से जुड़ी फर्म ठीक से काम नहीं करती है। उज्जैन जिला प्रशासन ने तो इन्हें ब्लैक लिस्टेड का प्रस्ताव भेजा हुआ है।
जवाब : यह सही बात है, यह ठीक से काम नहीं करते हैं। रश्मि अग्रवाल भी इन्हीं से जुड़ी है और जगदीश अग्रवाल की पत्नी हैं। शासन ने ही इन्हें ब्लैक लिस्टेड नहीं किया तो हम क्या करें। इनके दस्तावेज पूरे थे तो बिड खोल दी।
सवाल : यदि यह फिर से समय रहते अनाज का परिवहन नहीं करेंगे और प्रशासन को परेशान होना पड़ेगा तो।
जवाब : ऐसा होगा तो इन पर कार्रवाई करेंगे। जो भी सेकंड आप्शन होंगे उनसे कार्य करवाएंगे।
सवाल : इनके आवेदन को लेकर तो आपत्ति भी थी।
जवाब : आपत्ति टेक्निकली ठीक नहीं थी। इसलिए खारिज कर दिया। जो आपत्तियां ठीक थी उन्हें संज्ञान में लेकर कुछ फर्म को प्रक्रिया से बाहर किया है।
रीजनल कमेटी ने आपत्तियों को खारिज कर रंगा-बिल्ला से जुड़ी फर्म को प्रक्रिया में शामिल किया
इधर इस बार भी 22 मार्च से समर्थन मूल्य की खरीदी शुरू होने जा रही है। खरीदे जाने वाले अनाज के संभागभर के जिलों के सभी 12 सेक्टरों में परिवहन के लिए टेंडर की प्रक्रिया अंतिम चरणों में है। इनके लिए कुल 35 एजेंसियों ने ऑनलाइन आवेदन किए थे।
इन्हीं में से रंगा-बिल्ला से जुड़ी एक फर्म ने रश्मि अग्रवाल नाम से ऑनलाइन आवेदन किया। इसे लेकर कुछ आवेदकों ने आपत्तियां भी लगाई लेकिन रीजनल कमेटी ने आपत्तियों को ही टेक्निकली गलत करार दे दिया। इसके बाद रंगा-बिल्ला से जुड़ी उक्त फर्म की टेक्नीकल के बाद टेंडर की फाइनल बिड भी खोल दी गई। ऐसे में पहले क्रम पर होने से इस फर्म को रतलाम जिले का ठेका मिलने का लगभग रास्ता साफ हो गया है।
जबकि शुजालपुर व शाजापुर के लिए यह अन्य फर्म से पीछे लेकिन कतार में है। इधर उज्जैन जिले के चार सेक्टरों में से नागदा के लिए भीकनगांव की फर्म, बड़नगर के लिए अरविंद सिंह और उज्जैन के लिए सुरेशचंद्र पूरणमल मेघनगर की फर्म की फाइनल बिड खुली है, जबकि महिदपुर के लिए रि-टेंडर करने की स्थिति बनी है।
रीजनल कमेटी का कहना है कि जिन फर्मों की फाइनल बिड खुली है, उनके नाम व दरें भोपाल भेजी जा रही हैं। वहां पर पिछले साल की दरों से तुलना के बाद ठेका फाइनल किया जाएगा। संभाग के 12 में से महिदपुर व मंदसौर दो सेक्टरों के लिए रि-टेंडर होंगे। गौरतलब है कि पिछले साल खरीदी का कार्य मार्कफेड ने देखा था इस बार नान को देखना है।

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