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शनिवार, 6 मार्च 2021

DAVV का वार्षिक बजट 325 करोड़ में:10 मार्च को होगा पेश, VC और रजिस्ट्रार के लिए नई कार खरीदने का रखा जाएगा प्रस्ताव; एग्जाम से 25 करोड़ मिलते हैं


देवी अहिल्या यूनिवर्सिटी का वार्षिक बजट इस महीने 10 मार्च को बुलाई गई कार्य परिषद की बैठक में स्वीकृत करवाया जाएगा। यह बजट करीब सवा तीन सौ करोड़ रुपए का है। इसमें मुख्य रूप से कुलपति आवास और स्टाफ क्वार्टर्स बनाने की योजना भी शामिल है। पिछले साल 300 करोड़ रुपए का बजट पेश किया गया था। यूनिवर्सिटी ने पिछले साल आय और व्यय मिलाकर 325 करोड़ रुपए का बजट पेश किया था, जिसमें रिसर्च उपकरण, कम्प्यूटर और किताबों के लिए 15- 20 करोड़ रुपए प्रस्तावित किए गए थे।

इस बजट में कुलपति और रजिस्ट्रार की नई कार के लिए राशि का प्रावधान किया गया है। कुलपति के लिए नई कार का प्रस्ताव पिछले कुलपति डॉ. नरेन्द्र धाकड़ के समय प्रस्तुत किया गया था, लेकिन यह कार अभी तक नहीं आ पाई है। अब कुलपति के साथ ही रजिस्ट्रार की भी कार प्रस्तावित की गई है। इसके अतिरिक्त तक्षशिला परिसर में तीन इलेक्ट्रॉनिक वाहन खरीदने का प्रस्ताव है, जिन पर 40 लाख रुपए खर्च होंगे। बजट में सबसे बड़ी राशि प्रोफेसर और टीचिंग स्टाफ पर खर्च बताई गई है, जो 60 करोड़ रुपए की है। कर्मचारियों के वेतन पर भी मोटी राशि खर्च हो रही है। यह बजट का करीब एक तिहाई हिस्सा है। इसमें डिपार्टमेंट के रखरखाव के लिए राशि दी गई है।

बजट को मुख्य रूप से तीन हिस्सों में बांटा गया है। पहला हिस्सा विद्यार्थियों से आने वाली परीक्षा व अन्य फीस से होने वाली आय का है। दूसरा हिस्सा ग्रांट से मिलने वाली आय का है। इसमें खर्चे भी जोड़े गए हैं। वहीं, तीसरे हिस्से में नियमित और सेल्फ फाइनेंस कर्मचारियों के वेतन व अन्य खर्चों को रखा गया है। यूनिवर्सिटी का व्यय सबसे ज्यादा वेतन और भत्तों पर खर्च होता है तो इनकम का बड़ा सोर्स UTD में चलाए जाने वाले कोर्सेस की फीस है। इस फीस से करीब 12 करोड़ रुपए तक मिलते हैं, जबकि परीक्षा करवाने के लिए यूनिवर्सिटी को परीक्षा शुल्क से 25 करोड़ रुपए तक की राशि मिल जाती है। रिव्यू और रीवैल्यूएशन की फीस से भी अच्छी इनकम होती है। कॉलेजों से हर साल ली जाने वाली एफिलिएशन फीस भी यूनिवर्सिटी की आय को बढ़ाती है।

हर बार की तरह इस बार भी यूनिवर्सिटी ने अपने सालाना बजट में मेडिकल कॉलेज के लिए राशि का प्रावधान रखा है। यह राशि हर बार रखी जाती है, लेकिन यह खर्च नहीं होती है। पिछली बार यूनिवर्सिटी ने मेडिकल कॉलेज की दिशा में काम आगे बढ़ाने के लिए तीन सदस्यीय कमेटी का गठन किया था, जिसे आयुष मंत्रालय के आधार पर अपनी रिपोर्ट और सुझाव देना था। कमेटी को आयुष मंत्रालय से संबंधित होम्योपैथी, आयुर्वेदिक, यूनानी जैसे कोर्सेस को चलाने के संबंध में अपनी रिपोर्ट देना थी। मेडिकल कॉलेज का प्रस्ताव 2003 से अटका हुआ है। तब यूनिवर्सिटी को शासन ने 50 एकड़ जमीन दी थी। बाद में इसमें से 25 एकड़ जमीन वापस ले ली थी। यूनिवर्सिटी के कहने पर वह पांच एकड़ और देने के लिए तैयार हो गया था। इसके पीछे मुख्य कारण DPR तैयार नहीं होना है। अब यह बनाई जाएगी।

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