धर्म की ध्वजा हमें कर्म की सजा से बचाती है। जिस प्रकार हवा दिखाई नहीं देती फिर भी उसका एहसास करते हैं, क्योंकि हवा है तो हम हैं, ठीक उसी प्रकार परमात्मा का एहसास करने सच्ची आस्था व भक्ति की आवश्यकता होती है, केवल दुख में परमात्मा को याद करना भक्ति नहीं, सुख व दुख दोनों में परमात्मा को याद करना सच्ची भक्ति है।
यह बात मुनिराज डॉ. संयमरत्न विजयजी ने कही। नगर के श्री शंखेश्वर पार्श्व-नाथ धाम पर चतुर्थ प्रतिष्ठा वर्षगांठ व ध्वजारोहण कार्यक्रम में धर्मसभा में कही।
चल समारोह निकला - नगर के श्री शंखेश्वर पार्श्वनाथ धाम पर चतुर्थ प्रतिष्ठा वर्षगांठ व ध्वजारोहण कार्यक्रम मुनिराज डॉ. संयमरत्न विजय जी व मुनिराज भुवनरत्न विजय जी की निश्रा में हुआ। श्री आदिनाथ जैन श्वेतांबर मंदिर झंडा चौक से ध्वजा का चल समारोह निकला जो मुख्य मार्ग से होते हुए श्री शंखेश्वर पार्श्वनाथ धाम पहुंचा, जहां सत्रहभेदी पूजा पढ़ाई गई व शुभ मुहूर्त में लाभार्थी परिवार द्वारा श्री शंखेश्वर पार्श्वनाथ मंदिर व श्री राजेंद्र सूरि गुरु मंदिर पर ध्वजा चढ़ाई गई। प्रचार सचिव प्रफुल्ल जैन ने बताया ध्वजा के लाभार्थी श्री संघ अध्यक्ष बाबूलाल ऋषभ कुमार धींग परिवार व इस वर्ष गुरु मंदिर की ध्वजा लाभार्थी रमेशचंद्र, शुभम कोठारी परिवार रतलाम, 2021 से अमर ध्वजा लाभार्थी राकेश कुमार, योगेश कुमार जैन आर के परिवार का श्री संघ उपाध्यक्ष नरेंद्र जैन, वाटिका अध्यक्ष शैलेंद्र कटारिया व राकेश जैन इंदौर ने बहुमान किया।
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