(वंदना श्रोती) एक तरफा प्यार, आपसी रंजिश, परिवार का दबाव और मुआवजे का लालच। इन कारणों से कई लड़कियों ने युवाओं पर ज्यादती करने का आरोप लगाया और बाद में मुकर गईं। वहीं झूठे आरोप में युवकों को जेल जाना पड़ा। यह अलग बात है कि कुछ ने तो बाद में आरोपी के संग ब्याह रचा लिया। ऐसी लड़कियों की संख्या 92 हैं। यह खुलासा जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की रिपोर्ट से हुआ है। इन लड़कियों के आवेदन प्राधिकरण ने खारिज कर दिए।
भोपाल जिला कोर्ट में 200 में से 140 प्रकरणों का निराकरण हुआ है। इनमें से ज्यादती का आरोप लगाने वालीं 92 युवतियां अपने आरोप से मुकर गईं, लेकिन 48 युवतियों ने आखिरी तक लड़ाई लड़ी, जिन्हें मुआवजे की राशि दी गई। 60 मामलों में सुनवाई चल रही है।
बेकसूर युवकों को जाना पड़ा जेल... बाद में कुछ युवतियों ने उन्हीं युवकों के संग कर ली शादी
आरोप लगाया, फिर शादी की
साल 2016 में एक किशोरी ने अपने पड़ोसी युवक पर ज्यादती का आरोप लगाया। 3 साल तक सुनवाई जिला कोर्ट में चली। किशोरी ने जज वंदना जैन को बताया कि उसके परिजनों ने प्रेमी को मार डालने की धमकी दी थी, इसलिए उसने ज्यादती का आरोप लगाया। जब वह अपने प्रेमी के साथ रही तो उसने उसके साथ कोई गलत काम नहीं किया। वह निर्दोष है। वयस्क होने पर उसने प्रेमी से शादी कर ली।
जो परिजनों ने कहा, वही किया
वर्ष 2019 में आरोपी के खिलाफ ज्यादती और पास्को की धाराओं के तहत केस की सुनवाई में किशोरी ने जज कुमुदिनी पटेल से कहा कि वह आरोपी को नहीं पहचानती है। उसके साथ ज्यादती की घटना हुई है, लेकिन उसे भी यह नहीं मालूम। पूर्व में दिए अपने बयान के बारे में कहा कि उसके परिवार वालों ने जैसा उससे कहा, उसने वैसा ही पुलिस को कह दिया था।
पैसों के लेनदेन में लगाया आरोप
एक महिला ने अपने पड़ोस में रहने वाले एक युवक पर 2019 में ज्यादती का आरोप लगाया। मामले की सुनवाई के दौरान महिला ने जज कुमुदिनी पटेल के समक्ष स्वीकार किया कि उसने रंजिश की वजह से आरोप लगाया। उसका युवक के साथ पैसों का लेनदेन था। युवक उसे रुपए नहीं लौटा रहा था। इसे लेकर विवाद भी हुआ था। इसके बाद उसने युवक के खिलाफ थाने में शिकायत की थी।
क्यों... ज्यादती के आरोप लगाने में सबसे आगे वे युवतियां हैं, जिन्होंने परिजनों की इच्छा के विरुद्ध शादी की थी। बाद में परिजनों के दबाव में प्रेमी पर ज्यादती का केस लगाया। कोर्ट में सुनवाई के दौरान युवतियों ने बताया कि वास्तव में आरोपी उसका पति है और वह उसके साथ रहना चाहती है।
यह है प्रावधान
सेवानिवृत जस्टिस एनके जैन ने बताया कि ज्यादती का आरोप लगाने वाली युवतियों के होस्टाइल होने या मुकरने पर यदि व्यक्ति चाहे तो उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई और मुआवजे की मांग कर सकता है। हाईकोर्ट ने ऐसे ही एक मामले में व्यक्ति को मुआवजा देने का फैसला सुनाया है।
60 मामले अभी अदालत में
92 युवतियां ज्यादती के मामलों में अपने बयान से मुकर गईं, इसलिए उनके मुआवजा राशि के आवेदन खारिज हो गए। 48 युवतियों को मुआवजे की राशि दी गई है। 60 मामले कोर्ट में चल रहे हैं।
संदीप शर्मा, सचिव जिला विधिक प्राधिकरण
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