गुरुवार, 26 नवंबर 2020

टॉप 10 में भी नहीं मिल पाई जगह, 5वें की तैयारी शुरू

टॉप 10 में भी नहीं मिल पाई जगह, 5वें की तैयारी शुरू

वर्ष 2017 में स्वच्छ सर्वेक्षण शुरू हुआ था और पहली बार में ही शहर ने 21वीं रैंक हासिल की थी। इससे यह उम्मीद जगी थी कि आने वाले वर्षों में शहर निश्चित ही देश के टॉप 10 शहरों में शामिल हो जाएगा। हुआ इसके ठीक उलट, यानी अगले दो वर्ष तक शहर की रैंकिंग 25वें स्थान पर ही रही। यह अलग बात है कि इस वर्ष यानी 2020 की रैंकिंग में थोड़ा सुधार हुआ और शहर ने 17वीं पोजीशन पाई।

सर्वेक्षण पर लाखों क्या करोड़ों रुपए खर्च करने के बाद भी कोई लाभ नहीं मिल पा रहा है और रैंकिंग की यदि बात छोड़ भी दें तो आम शहरी नागरिक शहर की सफाई व्यवस्था और इससे जुड़ी अन्य सुविधाओं से खुश नहीं है, इसलिए भले ही हम रैंकिंग में कहीं भी रहें असली रैंकिंग तो वह होगी जो आम शहरी नागरिक देगा और शहरी नागरिक तब खुश होगा जब उसे लगेगा कि यहाँ की साफ-सफाई, टॉयलेट, कचरा व्यवस्था, सफाई का कल्चर सुधर गया है। इसके लिए निगम को मेहनत करनी होगी, गीत-संगीत और मुशायरे में रुपए खर्च कर बेवजह की वाह-वाही लूटने से बचना होगा। यदि स्वच्छ सर्वेक्षण में बेहतर प्रदर्शन करना है तो इसके लिए सबसे जरूरी स्टार रेटिंग में भी ध्यान देना होगा और डोर-टू-डोर कचरा कलेक्शन व्यवस्था में आमूल-चूल परिवर्तन करना होगा।

यहाँ होती है गड़बड़ी
स्वच्छता सर्वेक्षण के पहले जिस प्रकार ओडीएफ प्लसप्लस की टीम सर्वे करती है उसी प्रकार स्टार रेटिंग के लिए भी सर्वेक्षण होता है। उसमें हर शहर को अपनी सुविधाओं के अनुसार 7 स्टार तक के लिए आवेदन करना होता है। 2019 में नगर निगम ने 7 स्टार के लिए आवेदन किया था जिसमें 3 स्टार मिले थे। 2020 के सर्वेक्षण के लिए निगम ने 5 स्टार रेटिंग का आवेदन किया था जिसमें 750 नम्बर मिल सकते थे, लेकिन कोई भी स्टार नहीं मिल पाया। इसमें सर्वेक्षण टीम यह देखती है कि शहर की नालियाँ ऊपर से बंद हैं या नहीं, सब्जी मार्केट व्यवस्थित है या नहीं, रात में सफाई होती है या नहीं, डोर-टू-डोर कचरा कलेक्शन होता है या नहीं, तालाबों की सफाई है या नहीं आदि। इसमें सब्जी मंडी, रात की सफाई के साथ ही डोर-टू-डोर की बिगड़ैल व्यवस्था ने सारे खेल पर पानी फेर दिया था।

मच्छर और कचरे से निजात मिले तो बात बने
शहर में मौसम कोई भी हो मच्छर पीछा नहीं छोड़ते। गर्मी में ये लोगों को काट-काट कर परेशान कर देते हैं और लोग मलेरिया से ग्रसित होकर अस्पतालों के चक्कर काटते हैं, बारिश में यही मच्छर डेंगू और चिकनगुनिया फैलाते हैं जिससे 2 साल पहले पूरा शहर परेशान हो गया था। रही बात ठंड की तो इस मौसम में पहले मच्छर तलाशने पर भी नहीं मिलते थे, लेकिन अब तो इनकी भरमार है।



टॉप 10 में भी नहीं मिल पाई जगह, 5वें की तैयारी शुरू
शहर में जगह-जगह फैली गंदगी नये सर्वेक्षण में मुश्किल खड़ी कर सकती है।



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