ग्राम जगन्नाथपुर में सार्वजनिक लक्ष्मी उत्सव समिति व जन्मभूमि वेलफेयर सोसायटी के युवाओं ने इस होली पर गांव में लुप्त हो रहे फाग गीत की परंपरा को संरक्षित करने के लिए इस साल से फाग सम्मेलन की शुरुआत की।
पहले आयोजन में जय मां शीतला फाग मंडली जगन्नाथपुर, जय परमानंद फाग मंडली खपरी भोथीपार, आदर्श नवयुवक फाग परिवार पड़कीभाट, श्री कृष्ण फाग मंडली परसतराई, जय मां शताक्षी फाग सेवा मंडली जगन्नाथपुर ने प्रस्तुति दी। इस सम्मेलन के दौरान मंडली के कलाकारों ने फाग गीत नृत्य और झांकी के माध्यम से लोगों को कृष्ण की लीला, प्रहलाद की विष्णु भक्ति और कंस के अहंकार का मंचन किया। कालिया नाथने की झांकी आकर्षण का केंद्र रही तो होलिका पर भी झांकी दिखाई गई। समिति के प्रमुख तुलेश्वर साहू ने बताया कि 4 साल पहले लक्ष्मी उत्सव समिति का
गठन किया गया है। जिसके तहत दिवाली के अवसर पर लक्ष्मी की स्थापना की जाती है।
इस दौरान स्कूल के प्रतिभावान बच्चों, गांव के वरिष्ठ नागरिकों व देश सेवा में जुटे हुए जवानों का सम्मान कर उनका जज्बा बढ़ाया जाता है। समिति ने हाल ही में वेलफेयर सोसायटी के युवाओं से जुड़कर कुछ नया करने की दिशा में काम किया और फाग सम्मेलन की शुरुआत की गई। ताकि गांव में जो युवा आज इस परंपरा से दूर हो रहे हैं, वे इसके करीब आए। लोगों ने रात 12 बजे तक उत्सुकतावश सभी मंडल की प्रस्तुति देखी। महिलाओं की भी भीड़ रही। आने वाले वर्षों में भी अब होली पर इसी तरह से फाग सम्मेलन होगा।
वार्डों में देते हैं प्रस्तुति, ताकि आज की पीढ़ी भी जुड़ी रहे
मंडली के प्रमुख पूर्णानंद आर्य ने बताया कि अब शहर में एक ही जय मां जगदंबा फाग मंडली है। यह मंडली न टूटे इसलिए युवा पीढ़ी को भी इससे जोड़ रहे हैं। हर वार्ड में हम होली के पहले से ही फाग गीत की प्रस्तुति देते हैं। आज होली पर भी कर्मा काॅप्लेक्स परिसर में दोपहर 12 बजे मंडली की प्रस्तुति होगी। फाग गीत लिखने वाले लेखराज आर्य का कहना है कि यह विधा उन्हें विरासत में मिली है। उनके पिता ने बालोद में मंडली की नींव रखी रखी थी और उस मंडली को टूटने ना देने के लिए हर हद तक प्रयास कर रहे हैं।
उत्साह: लुप्त होती परंपरा को बचाने युवाओं ने आयोजित किया फाग सम्मेलन
इधर गीत व झांकी के जरिए लोगों ने देखी प्रहलाद की विष्णु भक्ति
भास्कर न्यूज | बालोद
होली पर फाग गीतों का अपना विशेष महत्व है। हर पर्व के साथ कोई ना कोई गीत और नृत्य जुड़ा होता है। फाग गीत और नगाड़े की थाप होली की खास पहचान है। आज यह विधा शहरों में लुप्त होती जा रही है। गांव में भी अब धीरे-धीरे यह खत्म होने की कगार पर है। लेकिन शहर के इस आधुनिकता में भी पांडे पारा के युवाओं ने फाग मंडली को जिंदा रखा है। इनमें उन परिवारों के युवक भी शामिल हैं।
जिनके पूर्वजों ने बालोद में फाग मंडली की शुरुआत की थी। फाग गीत मंडली के पुराने कलाकारों से पता चलता है कि यहां 1971 से पहली बार फाग मंडली का गठन हुआ। फिर शहर के हर वार्डों में एक-एक फाग मंडली उभर आई। पुराने कलाकारों के निधन के बाद कई मंडली बंद हो गई। लेकिन बुधवारी बाजार स्थित मंडली आज भी कायम है।
प्राइमरी से कॉलेज तक के छात्र व युवा मंडली में
1971 से 23 दिसंबर 1989 तक मंडली के प्रमुख स्व प्रेम लाल आर्य इसे चलाते रहे। उनके जाने के बाद इस विधा को उनके दोनों बेटों ने के नेतृत्व में शहर में एक ही मंडली लोगों के बीच फाग गीत का महत्व बता रही है। प्राइमरी से कॉलेज तक के विद्यार्थी व युवा इस मंडली में जुड़े हैं।
स्व. प्रेम लाल आर्य
प्रहलाद की नारायण भक्ति को झांकी के जरिए पेश करते हुए कलाकार।
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