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बुधवार, 18 मार्च 2020

जीविका दीदियों की बनाई प्याज पाउडर की बढ़ी डिमांड, बेसिक्स की टीम ने परखा प्रोडक्ट


जीविका दीदीयों के द्वारा निर्मित प्याज पाउडर की डिमांड बढ़ने लगा है और इसका स्वाद का लुफ्त पटना के साथ दिल्लीवासी भी ले रहे हैं। बढ़ती डिमांड को लेकर मंगलवार को बेसिक्स की टीम ने जिले के अरियरी प्रखंड में संचालित “सुखसागर” जीविका महिला उत्पादक समूह पहुंचकर सदस्यों द्वारा किए जा रहे कार्यों को देखा और अनेक पहलुओं पर जानकारी हासिल की।टीम ने सुखसागर प्याज के पाउडर के साथ-साथ लहसुन, अदरक, हरी मिर्च इत्यादि के पाउडर बनाने की विधि और उसके बाजार के बारे में विस्तृत जानकारी ली।बिहार में किए जा रहे इस प्रकार के अनोखे उद्योग को टीम ने सराहा और स्वच्छता एवं हाइजीन को बरकरार रखते हुए उत्पादक समूह की दीदियों के काम की सराहना की। दरअसल, अरियरी प्रखंड के चांदी गांव में जीविका उत्पादक समूह ने पहली अगस्त को प्याज प्रसंस्करण इकाई का शुभारंभ किया था। यहां प्याज के साथ ही लहसुन, अदरक, हरी मिर्च के पाउडर बनाए जा रहे हैं। इस उत्पाद को जीविका दीदीयों के द्वारा बाजारों में बेचा जा रहा है। इस उत्पादक समूह से जुड़ी जीविका दीदीयों ने पटना के गांधी मैदान में आयोजित सरस मेला में निर्मित मसाले की उत्पाद की स्टॉल लगाकर बिक्री की। जिसकी खासी डिमांड रही। इस मेले के बाद दिल्ली के इण्डिया गेट पर आयोजित आजीविका सरस मेला में यहां का निर्मित मसाले के पाउडर स्टॉल लगाया था जहाँ जमकर इसकी बिक्री हुई।

सुखसागर ब्रांड से बन रही है महिलाओं की खास पहचान

अरियरी प्रखंड में चांदी गांव में प्याज पाउडर निर्माण यूनिट शुभारंभ ग्रामीण विकास मंत्री श्रवण कुमार ने किया था। जीविका की पहल से खनन विभाग के सहयोग से प्याज पाउडर का निर्माण सुखसागर जीविका महिला प्याज प्रसंस्करण उत्पादक समूह द्वारा किया जा रहा है जो की “सुखसागर” नाम से प्याज सहित अन्य मसालों का उत्पादन कर रही है। जिससे 51 सदस्यीय जीविका दीदी जुड़ी है। जीविका के कर्मी रवि केसरी ने बताया की प्याज के साथ ही लहसून, अदरख और मिर्च का पाउडर का निर्माण किया जा रहा है। इसकी खासियत यह है की इस पाउडर के निर्माण में किसी प्रकार का केमिकल का इस्तेमाल नहीं किया जा रहा है जो की लोगों के सेहत के नजरिए से बेहतर उत्पाद है।

बिहार में प्याज पाउडर है पहला उत्पाद

शेखपुरा जिले के चांदी गांव में प्याज पाउडर निर्माण की बिहार में पहली इकाई है। जीविका से जुड़ी महिलाओं ने सिर्फ प्याज ही नहीं बल्कि लहसुन, अदरख और हरी मिर्च के पाउडर के साथ ही हल्दी और भूना हुआ जीरा का पाउडर भी बाजार में उतारा है और इसकी डिमांड अब बढ़ने लगी है। बिहार में इस तरीके का पहला इकाई स्थापित किए जाने से इसके लिये बड़ा बाजार उपलब्ध है।

तत्कालीन डीएम ने की थी पहल

तत्कालीन जिलाधिकारी योगेंद्र सिंह की पहल से खनन का कार्य करने वाले परिवारों को स्वरोजगार से जोड़ने के लिए प्रधानमंत्री खनिज क्षेत्र कल्याण योजना के तहत खनन विभाग से 6 लाख 97 हजार की राशि इस उत्पादक समूह को हस्तगत करवाई थी। जिसके बाद चांदी गांव में प्याज प्रसंस्करण इकाई लगाई गई थी। वर्तमान में इस ईकाई से रोजाना 30 किलो प्याज पाउडर बन रहा है।

मार्केटिंग कर बढ़ाया जा रहा उत्पादन

इस बाबत जीविका की जिला योजना प्रबंधक अनीशा गांगुली ने बताया की इस उत्पाद की मार्केटिंग करवा कर इसकी उत्पादन क्षमता को बढ़ाया जा रहा है। जिससे ज्यादा से ज्यादा प्याज के पाउडर का निर्माण हो और जिले एवं पूरे राज्य के साथ-साथ के देश के अन्य इलाकों में इसकी बिक्री की जा सके। मेलों में यहां के मसालों की उत्पाद बेची जा रही है।

महिलाओं को रोजगार देने के लिए शुरू हुई थी इकाई

इस मौके पर जीविका की जिला प्रबंधक अनीशा गांगुली ने बताया कि ग्रामीण महिलाओं को रोजगार से जोड़ने के लिये प्याज पाउडर निर्माण की इकाई लगाई गई थी जो अपने गुणवत्ता के कारण लोगों में अपनी पहचान बना रही है और इसका खासा डिमांड बढ़ रहा है। तत्कालीन जिलाधिकारी योगेंद्र सिंह की पहल से खनन का कार्य करने वाले परिवारों को स्वरोजगार से जोड़ने के लिए प्रधानमंत्री खनिज क्षेत्र कल्याण योजना के तहत खनन विभाग से 6 लाख 97 हजार की राशि इस उत्पादक समूह को हस्तगत करवाई थी। इस अवसर पर निशांत कुमार एवं टीम के साथ-साथ रवि केशरी, संजीव कुमार एवं समूह की दीदियां उपस्थित थीं।

प्रोडक्ट को परखते हुए बेसिक्स की टीम।

अरियरी के चांदी गांव में खनन विभाग के सहयोग से प्याज प्रसंस्करण इकाई की हुई थी स्थापना
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