- सोमवार को शहर में अलग-अलग स्थानों पर हुआ नाट्य कृतियों का प्रदर्शन
शहर में सोमवार से एक बार फिर रंगमंचीय गतिविधियों ने जोर पकड़ा। अलग-अलग स्थानों पर तीन कहानियों का नाट्य मंचन हुआ। रवींद्र भवन में नजीर कुरैशी के निर्देशन में नाटक आषाढ़ का एक दिन, बॉक्स थिएटर में मनोज नायर के निर्देशन में नाटक बू और गांधी भवन में सीमा मोरे के निर्देशन में नाटक उसने कहा था का मंचन हुआ। इन नाटकों में प्रेम, समय और समाज की प्रथा, बेटे की लालसा को कलाकारों ने अपने सटीक अभिनय से दिखाया।
...और जिंदगी गुजारने का लिया फैसला
नाटक उसने कहा था की कहानी चंद्रधर शर्मा गुलेरी ने लिखी। नाटक की कहानी एक फौजी के इर्द-गिर्द घूमती है। रेगिस्तान के बयाबां खंदकों में जंग शुरू होने वाली है। हवलदार वजीरा सिंह छुट्टी पर घर आया है। उसे लहना से प्रेम है। तभी सरहद पर वापस बुलाने का फरमान आता है। जंग में वह और उसके साथी मारे जाते है। वजीरा की मौत की खबर सुन लहना उसकी यादों को समेटे जिंदगी गुजारने का फैसला कर लेती है।
रवींद्र भवन
समय कभी भी किसी का इंतजार नहीं करता
नाटक आषाढ़ का एक दिन में अंबिका के संघर्ष और पुत्री मल्लिका के लिए चिंता, कालिदास का राजकवि बनना और फिर मल्लिका का आर्थिक चुनौतियों भरा जीवन शुरू होना जैसे सीन थे। नाटक संदेश देता है कि समय किसी का इंतजार नहीं करता है।
ओडिसी में दिखा विष्णु और शिव का संयुक्त रूप हरि-हर
शहीद भवन में सोमवार को सांस्कृतिक कार्यक्रम हुआ। इसमें कल्याणी और वैदेही फगरे ने ओडिसी नृत्य की प्रस्तुति दी। नृत्यांगनाओं ने मंगलाचरण पेश किया। इसके बाद गुरु केलुचरण मोहापात्र की नृत्य रचना के बाद हरिहर को पेश किया। इसमें भगवान विष्णु और शिव के संयुक्त रूप हरि-हर को बड़ी ही खूबसूरती से दिखाया।
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