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बुधवार, 10 मार्च 2021

बिना प्रमाण पत्र के शिविर से लौटे दिव्यांग:शिविर में मानसिक विक्षिप्तों को डॉक्टरों ने धुतकारा, परिजन से अभद्रता की


मंगलवार को शुजालपुर जनपद पंचायत में यूडीआईडी कार्ड जारी करने आयोजित दिव्यांग शिविर अव्यवस्थाओं से मानसिक विक्षिप्तों के लिए मजाक बनकर रह गया। कई मानसिक रोगियों को उज्जैन से आए डाॅक्टर ने 6 माह की अवधि के इलाज के पर्चे न होना बताकर प्रमाण पत्र बनाने से मना कर दिया।

बेबस परिजन के आंसू भी डाॅक्टराें का मन नहीं पिघला सके। कलेक्टर के हस्तक्षेप के बावजूद प्रमाण पत्र न बनने से मानसिक रोगियों को बिना प्रमाण पत्र लिए ही शिविर से वापस जाना पड़ा। ग्राम कमलिया निवासी मानसिक विक्षिप्त महेश पिता लक्ष्मणसिंह परमार को लेकर बुजुर्ग मां डाॅक्टराें के सामने रोती रही कि लॉकडाउन के कारण साधन बंद होने से वह बीते 6 माह से बेटे को डॉक्टर को दिखाने नहीं जा सकी, लेकिन बेटे को दवाएं हर हाल में कर्ज उठा कर दे रही है।

महिला द्वारा मानसिक चिकित्सालय इंदौर में इलाज के पुराने दस्तावेज व मरीज दिखाने के बाद भी शिविर में आए मानसिक चिकित्सा विशेषज्ञ ने 6 माह के भीतर का ही मानसिक चिकित्सक का पर्चा न होने से प्रमाण पत्र बनाने से इनकार कर दिया। ऐसे कई मानसिक दिव्यांगों व उनके परिजन को शिविर से दुत्कार कर भगा दिया गया।

इस बारे में मीडियाकर्मियों ने जब एसडीएम, कलेक्टर, जनपद पंचायत सीईओ को अवगत कराया तो अफसरों को भी चिकित्सक ने ऐसे मानसिक दिव्यांगों के प्रमाण पत्र जारी करने से इनकार कर दिया। दिव्यांग दिलीपसिंह पिता जयराम ने बताया कि जनपद पंचायत द्वारा गांव में मानसिक दिव्यांगों के कार्ड बनाने के लिए शिविर का प्रचार करते समय मरीजों को केवल आधार कार्ड, पासपोर्ट फोटो लाने की सूचना दी गई।

मरीज अपने 6 माह पुराने इलाज के पर्चे लेकर पहुंचे, उन्हें यह नहीं बताया गया था। इन्होंने बताया कि सुबह से शाम तक कतार में कई घंटे लगाने के बाद मानसिक रूप से विक्षिप्त लोगों व उनके परिजन को शिविर में पीने के पानी, भोजन व्यवस्था न होने की परेशानी के साथ ही प्रमाण पत्र न बनने का मलाल लेकर वापस रवाना होना पड़ा। इस बारे में मरीजों की समस्या की सुनवाई व निराकरण कराने के बजाय अफसर अपने चेंबर में बैठे नजर आए।‌

परिजन को धमकाया भी
उज्जैन से आए मानसिक चिकित्सा विशेषज्ञ ने कई मरीजों के परिजन को प्रमाण-पत्र बनाने का आग्रह करने पर यहां तक धमकाया कि यदि आप 6 माह से बिना मानसिक चिकित्सा विशेषज्ञ के परामर्श व पर्चे के दवा मरीज को खिला रहे तो यह अपराध है। इसी चेंबर में बैठी महिला चिकित्सक ने ग्राम कमलिया निवासी मरीज के परिजन रामबाबू परमार को कानूनी कार्रवाई कर बंद कराने तक की धमकी दी। रामबाबू ने बताया कि शिविर में ऐसा बर्ताव मानवीयता का अपमान है।

गलती अफसरों की, सजा दिव्यांगों ने भोगी
शिविर से पहले मानसिक चिकित्सा लेने वाले रोगियों के छह माह की अवधि में ही मानसिक चिकित्सक के उपचार के पर्चे अनिवार्य रूप से लाने की जानकारी किसी भी मानसिक दिव्यांगों को नहीं दी गई। दिव्यांगजन अपने दस्तावेज लेकर पहुंचे और शिविर में दिनभर परेशान होकर वापस लौट आए। अफसर यदि पहले ही बता देते कि कौन से दस्तावेज लाने पर प्रमाण पत्र बनेगा तो दिव्यांगजनों को प्रमाण पत्र के नाम पर कई किलोमीटर दूर से आकर भूखे-प्यासे रहकर प्रमाणपत्र न बनने का मलाल कलर नहीं जाना होता।

लॉकडाउन में सांसद ने भेजी थी दवाई
लॉकडाउन अवधि के दौरान मानसिक विक्षिप्त रोगियों को दवाई न मिलने से परेशानी से बचाने के लिए क्षेत्रीय सांसद महेंद्र सोलंकी ने इंदौर से दवाई भेजने का विशेष इंतजाम किया था। इनमें से कई मानसिक विक्षिप्त अब भी साधन न होने से इंदौर व भोपाल चिकित्सकों को दिखाने नहीं जा सके, लेकिन दवाई ले रहे हैं। शिविर के चिकित्सकों ने 6 माह की अवधि के ही उपचार की प्रमाणिकता को अनिवार्य बताकर पुराने दिव्यांगता प्रमाण पत्रों को भी गलत बताते हुए मानसिक विक्षिप्त के प्रमाण पत्र नहीं बनाए।

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