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मंगलवार, 2 मार्च 2021

नेशनल डोप टेस्टिंग लेबोरेटरी के लिए बुरी खबर:ओलिंपिक का साल, पर हमारे पास टेस्ट लैब नहीं; फिर बढ़ सकता है भारत की डोप टेस्टिंग लैब का निलंबन

नेशनल डोप टेस्टिंग लेबोरेटरी के लिए बुरी खबर:ओलिंपिक का साल, पर हमारे पास टेस्ट लैब नहीं; फिर बढ़ सकता है भारत की डोप टेस्टिंग लैब का निलंबन

  • अगस्त 2019 में पहली बार मान्यता रद्द हुई थी

खेल मंत्रालय और नेशनल एंटी डोपिंग एजेंसी (नाडा) के लिए बुरी खबर है। देश की नेशनल डोप टेस्टिंग लेबोरेटरी (एनडीटीएल) का निलंबन एक दफा और बढ़ सकता है। कारण, डोपिंग की वैश्विक संस्था वाडा (वर्ल्ड एंटी डोपिंग एजेंसी) भारत सरकार के उन प्रयासों से संतुष्ट नहीं है, जो उसने एनडीटीएल की कमियों को दूर करने के लिए किए हैं। इसका असर ये हो रहा है कि टेस्ट ढाई गुना तक कम हो गए हैं। वहीं, देश की लैब में टेस्ट कराने की तुलना में विदेशी लैब में टेस्ट कराने से खर्च सवा गुना तक बढ़ गया है। साथ ही पड़ोसी देशाें की टेस्टिंग से मिलने वाली आय भी बंद हो गई है। दरअसल, वाडा ने अगस्त 2019 में साइट विजिट के दौरान मिली कमियों के कारण एनडीटीएल की मान्यता छह माह के लिए रद्द कर दी थी। जुलाई 2020 में दूसरी बार निलंबन छह माह के लिए बढ़ा दिया था। 17 जनवरी को वाडा का दूसरा सस्पेंशन समाप्त हो चुका है।

खेल मंत्री किरेन रिजिजू ने भी कहा था कि हमने एनडीटीएल की कमियों को दूर कर लिया है। वाडा के मैगी डुरेंड ने बताया- अभी भी कई कमियां सुधारी नहीं गई हैं। आईएसएल के नियम के तहत लैब की मान्यता अभी भी बहाल नहीं की जा सकती। उम्मीद है कि एनडीटीएल जल्द सुधार कर लेगा।

असर

  • निलंबन से टेस्ट ढाई गुना तक कम


  • विदेशी लैब में टेस्ट से खर्च सवा गुना बढ़ा


  • विदेशों से मिलने वाला रेवेन्यू खत्म हुआ

सैंपल की टेस्टिंग न हो पाने से लैब होने का कोई मतलब नहीं

25 साल तक साई के डायरेक्टर ऑफ स्पोर्ट्स मेडिसिन रहे पीएसएम चंद्रन ने कहा, ‘एफिलेशन न हाेने से यहां टेस्टिंग नहीं हाे पा रही है। एेसे में लैब हाेने का काेई मतलब नहीं है। अपनी लैब में खर्च थोड़ा कम होता है और रिजल्ट भी जल्दी मिलते हैं। वहीं विदेशी लैब थोड़ी महंगी हैं और समय भी ज्यादा लगता है।

हर लैब के अपने-अपने रेट हैं। आमतौर पर एक टेस्ट में 15-20 हजार रुपए खर्च होते हैं। भारत के सैंपल दोहा में टेस्ट हो रहे हैं। वहां और दिल्ली के रेट में ज्यादा अंतर नहीं है। लेकिन जितनी जल्दी रिपोर्ट चाहिए, खर्च उतना ज्यादा बढ़ ज्यादा है। लंदन में टेस्टिंग का खर्च 26 से 35 हजार तक आता है। इसके अलावा भारत को पड़ोसी देशों की टेस्टिंग से मिलने वाली आय बंद हो गई है। पहले बांग्लादेश, पाकिस्तान और श्रीलंका के सैंपल दिल्ली में ही टेस्ट होते थे।’

इस साल महज 250 टेस्ट हुए जबकि पिछले साल 3800 हुए थे

लैब की मान्यता न होने से खेलों को डोपिंग मुक्त रखने का खेल मंत्रालय और नाडा का उद्देश्य प्रभावित हो रहा है। असर देश में हो रही एथलेटिक्स व अन्य प्रतियोगिताओं में शामिल खिलाड़ियों की सैंपलिंग पर भी पड़ रहा है। नाडा ने साल 2019-20 में 3858 टेस्ट किए हैं जबकि 2020-21 सीजन के दो माह में आयोजित हुई आधा दर्जन प्रतियोगिताओं में महज 200 से 250 टेस्ट ही किए हैं। जनवरी में भोपाल और फरवरी में गुवाहाटी में हुई जूनियर नेशनल एथलेटिक्स में नाडा ने 1,637 एथलीटों में से महज कुछ दर्जन नमूने लिए थे।

वाडा ने लैब पर अनुशासनात्मक कार्रवाई की सिफारिश की थी

पिछले साल फरवरी में वाडा के लैब एक्सपर्ट ग्रुप ने बाकी बची गैर-अनुरूपताओं के आधार पर एनडीटीएल के खिलाफ आगे की अनुशासनात्मक कार्यवाही शुरू करने की सिफारिश की। इसके लिए स्वतंत्र अनुशासन समिति का गठन किया गया। इस कमेटी को वाडा एग्जीक्यूटिव कमेटी के चेयरमैन को एनडीटीएल के स्टेटस के बारे में रिपोर्ट करना था। तब तक लैब को सस्पेंड रखने का फैसला किया गया। 17 जनवरी को यह निलंबन भी खत्म हो चुका है। फिर भी लैब में वाडा के नियमों के अनुकूल सुधार नहीं हो पाया है।

और इधर – एक-दूसरे को जिम्मेदार ठहरा रहे नाडा-एनडीटीएल के अधिकारी
नाडा के डीजी नवीन अग्रवाल कहते हैं कि टेस्टिंग से जुड़े मामले एनडीटीएल ही देखता है। नाडा तो सिर्फ सैंपलिंग करता है। मुझे टेस्टिंग के संबंध में ज्यादा जानकारी नहीं है। वहीं, एनडीटीएल के साइंटिफिक डायरेक्टर डाॅ. पीएल साहू कहते हैं कि सैंपलिंग और टेस्टिंग के संबंध में नाडा से चर्चा करना चाहिए क्याेंकि अभी नाडा ही सब कुछ कर रहा है। वे ही सैंपल कलेक्ट कर रहे हैं और भिजवा रहे हैं। एनडीटीएल निलंबित है। हम ताे बस उम्मीद कर रहे हैं कि हमारा निलंबन बहाल हाे और सारी चीजें सामान्य हाे जाएं।

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