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गुरुवार, 18 मार्च 2021

क्षेत्र में तेंदुए की दस्तक से दहशत में ग्रामीण:मवेशी चराने गया युवक खून से लथपथ मिला, चार घंटे बाद अस्पताल में दम तोड़ा, डॉक्टर बोले- घाव जंगली जानवर के


  • तीन दिन पहले जहां बालक पर तेंदुए ने हमला किया, वहां से 22 किमी दूर फिर तेंदुए के शिकार की आशंका

जंगल में एक युवक खून से लथपथ मिला... जबड़ा टूट चुका था। चेहरे और सिर पर गंभीर घाव थे। दो घंटे बाद अस्पताल में उसने दम तोड़ दिया। डॉक्टर ने घाव देखकर बताया कि ये किसी जंगली जानवर के हमले के हैं। आशंका तेंदुए के हमले की लग रही है। क्योंकि जहां युवक घायल में मिला वह जंगली क्षेत्र है और उस क्षेत्र से 22 किमी दूर है, जहां तीन दिन पहले शौच करने गए बालक पर तेंदुए ने हमला किया था। ग्रामीणों के आ जाने से वह बच गया।

यह घटना गंधवानी के पास बाेरडाबरा के जंगल की है। बुधवार काे मवेशी चराने गए कदवाल गांव का 35 वर्षीय रायसिंह गंभीर अवस्था में जंगल में मिला। घटना दोपर करीब 12 बजे की बताई जा रही है। जिला अस्पताल में चार घंटे बाद करीब 4 बजे रायसिंह ने दम तोड़ दिया। रायसिंह के पिता जुवानसिंह भी अस्पताल पहुंचे थे। उन्होंने बताया दाेपहर 12.30 बजे किसी ने फाेन कर बताया कि शेर ने तुम्हारे बेटे रायसिंह पर हमला कर दिया है। इस पर पहले गंधवानी अस्पताल पहुंचा, वहां से बेटे काे 108 एंबुलेंस से लेकर जिला अस्पताल अाया हूं। तेंदुए ने किस प्रकार से हमला किया यह नहीं पता। सुबह किसी का फाेन अाया था उसके बाद रायसिंह जंगल में मवेशी लेकर चला गया था।

रायसिंह के भाई केसरसिंह ने कहा वह काम से बड़वानी गया था, घटना की सूचना मिलते ही वापस अाया। गंधवानी रेंजर संताेष चाैहान भी जिला अस्पताल पहुंचे, उन्हाेंने बताया कि मामले की सूचना मिलते ही वन विभाग की टीम माैके पर पहुंची थी। जांच कर रहे हैं। गंधवानी की 108 एंबुलेंस के डाॅ. रिषभ भार्गव अाैर पायलट भारत ने बताया कि उसका जिला अस्पताल में कुछ समय इलाज किया गया था। इधर, तेंदुए की क्षेत्र में आमद ने ग्रामीणों को दशहत में डाल रखा है।

लापरवाही... तीन दिन पहले की घटना, अभी तक वन विभाग ने नहीं लगाया पिंजरा

क्षेत्र में तेंदुए के हमले की घटनाएं लगातार हो रही है, वहीं वन विभाग की भी लापरवाही सामने आ रही है। तीन दिन पहले 14 मार्च को अमझेरा के पंचपिपल्या पंचायत के मजरे जमानियापाड़ा में शौच के लिए गए बालक पर तेंदुए ने हमला कर दिया था। हमला बालक के फूफाजी ने देखा और तुरंत ही पत्थर से वार किया। तेंदुआ, उन पर भी लपका लेकिन ग्रामीणों के इकट्‌ठा होने से वह भाग गया।

इस घटना के बाद वन विभाग ने सर्चिंग जरूर की लेकिन पिंजरा नहीं लगाया। अब इसी क्षेत्र से 22 किमी दूर ये दूसरी घटना हो गई। इससे पहले भी अमझेरा के जंगल क्षेत्र से लगे वन ग्रामाें में 15 महीने में तेंदुए के हमले की चार घटनाएं हाे चुकी हैं इसमें तीन बच्चाें की जान चली गई। लगातार हो रही घटनाओं से ग्रामीण दहशत में हैं। वे रात में बाहर नहीं निकल रहे हैं, लेकिन अब तेंदुआ दिन में भी हमला करने लगा है।

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