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रविवार, 21 मार्च 2021

रिकॉर्ड में दर्ज कर भूले:रातापानी-सिंघोरी सेंचुरी में 3 साल में 3 बाघों की मौत, जांच के नाम पर रस्म अदायगी, कार्रवाई किसी पर नहीं


रातापानी और सिंघोरी सेंचुरी एवं आसपास के जंगल में तीन साल में तीन बाघों सहित तीन अन्य वन्य प्राणियों की मौत पर अफसरों ने जांच के नाम पर रस्म अदायगी कर दी। किसी भी अफसर और कर्मचारी के खिलाफ कार्रवाई हुई नहीं और न ही किसी की जवाबदेही तय की गई।

नतीजा- इन मौत को रिकॉर्ड में दर्ज करके भुला दिया गया। हाल ही में 13 मार्च को तो गर्भवती बाघिन का शव मिला था। पूर्व के दो मामले ऐसे हैं, जिनमें एक बाघ के पंजे काटे गए तो एक तेंदुए के दांत व नाखून निकाल लिए गए। सभी 6 वन्य प्राणियों की मौतें संदिग्ध है।

गौरतलब है कि 8 दिसंबर 2018 को मारे गए बाघ के पंजे काटने वाले आरोपी को वन विभाग के कर्मचारियों ने पकड़ लिया था, लेकिन उसकी मौत किस वजह से हुई इसका खुलासा आज तक नहीं किया गया। इस बाघ की विसरा रिपोर्ट में उसकी मौत का कोई कारण नहीं निकल पाया। इसके मरने के तीन दिन बाद बीट गार्ड को जानकारी मिली थी। इसके पूर्व में भी बाघिन, तेंदुए और नील गायों की मौत हा़े चुकी है।
गर्भवती बाघिन के सिर में थी गंभीर चोट

रातापानी व सिंघोरी सेंचुरी के नजदीक सिरवारा के जंगल में गत शनिवार को मृत मिली 6 वर्षीय बाघिन गर्भवती थी। उसके साथ ही अजन्मे दो शावकों की भी मौत हो गई। बाघिन के सिर में चोट लगने के कारण को भी जांच अमला अब तक तलाश नहीं पाया।

इनकी जांच भी अधूरी... औबेदुल्लागंज क्षेत्र में आने वाली चिलवाह रेंज में 3 जनवरी को एक नीलगाय की मौत मामले में अधिकारियों का सिर्फ इतना कहना है कि जांच चल रही है। इसी रेंज में गत 6 जनवरी को तेंदुए का क्षत-विक्षत शव मिला।

सिधी बात विजय कुमार, डीएफओ औबेदुल्लागंज

ज्यादातर मामलों में जांच जारी
बाघिन को चोट लगने का क्या कारण निकला?
जांच की जा रही है। संभवत: यह हादसा है।
नील गाय के शिकार के मामले में क्या हुआ?
मामले की जांच अभी पूरी नहीं हो हुई है।
6 जनवरी को तेंदुए का शव मिला था। इस मामले में क्या हुआ?
इस घटना की जांच अभी चल रही है।
2018 में हुए बाघ की मौत का क्या कारण है?
उसकी मौत एक हादसा थी, विसरा रिपोर्ट में कुछ ठोस नहीं निकला।


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