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बुधवार, 11 नवंबर 2020

बच्चों ने स्लोगन, पोस्टर बनाकर पटाखे न जलाने का दिया संदेश

बच्चों ने स्लोगन, पोस्टर बनाकर पटाखे न जलाने का दिया संदेश

बिरोहड़ गांव स्थित एचडी स्कूल के बच्चों ने पोस्टर स्लोगन बना कर पर्यावरण प्रदूषण को देखते हुए सभी प्रदेशवासियों को पटाखे न जलाने का संदेश दिया। विद्यालय के निदेशक बलराज फौगाट का कहना कि पटाखों से सबसे ज्यादा तकलीफ गर्भवती महिलाओं, बुजुर्गों और छोटे बच्चों को होती है। गर्भवती महिलाओं को पटाखों की आवाज से काफी तकलीफ होती है तो वहीं दूसरी ओर पशु पक्षियों को भी इससे काफी तकलीफ होती है।

फुलझड़ी, अनार व चकरी तेज आवाज नहीं करते, पर धुआं ज्यादा छोड़ते हैं जो खतरनाक होता है। पटाखों से दिवाली पर वायु प्रदूषण बीस गुना और ध्वनि का स्तर 15 डेसीबल बढ़ जाता है। पटाखे जलाने से कार्बन मोनाऑक्साइड, सल्फ्यूरिक नाइट्रिक व कार्बनिक एसिड जैसी जहरीली गैस वायुमंडल में फैलती है। इससे मनुष्य के शरीर में कैंसर, जल स्त्रोत के दूषित होने की आशंका रहती है। दिल से जुड़ी बीमारी हो सकती है।

दमा रोगी के लिए जानलेवा पटाखों के धुएं के साथ जो कण सांस नली में जाते हैं, वह नली को चोक कर देते हैं। इस मुहिम में अध्यापक वर्ग सबसे अहम भूमिका निभा सकते हैं, क्योंकि बच्चों पर शिक्षक का सकारात्मक प्रभाव होता है। शिक्षक विभिन्न कार्यक्रमों या ऑनलाइन शिक्षा के माध्यम से छात्रों को इस दीपावली पर पटाखे न जलाने का संदेश देते हुए प्रेरित करें। प्रधानाचार्य सुनील कुमार ने बच्चों को दिवाली पर पटाखे न जलाने के लिए प्रेरित किया।



Children gave a message to not burn firecrackers by making slogans, posters



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