गांधी मेडिकल कॉलेज (जीएमसी) में कोरोना वैक्सीन के ट्रायल के लिए स्थान परिवर्तन किया गया है। ट्रायल के लिए व्यवस्था लाइब्रेरी के लिए बनी नई बिल्डिंग में की गई है। पहले ये व्यवस्थाएं कॉलेज की बिल्डिंग में की गई थी। अब लाइब्रेरी की बिल्डिंग में तमाम व्यवस्थाएं की गई हैं।
यहां ओपीडी एंड स्क्रीनिंग एरिया, रजिस्ट्रेशन काउंटर, काउंसलिंग रूम, सैंपलिंग रूम, वैक्सीन स्टोर, वैक्सिनेशन एंड मॉनीटरिंग रूम और रिकॉर्ड रूम आदि तैयार किए गए हैं।
रविवार को संभागायुक्त कवींद्र कियावत ने वैक्सीन के ट्रायल के लिए बनाए गए सेंटर का निरीक्षण किया। इस दौरान बताया गया कि आईसीएमआर की गाइडलाइन के मुताबिक की गई इन सभी व्यवस्थाओं की वीडियोग्राफी कराई गई है।
श्रीमद् भागवत कथा के चौथे दिन श्रीकृष्ण जन्मोत्सव मनाया
स्थानीय सिविल वार्ड 7 में चल रही श्रीमद् भागवत कथा के चौथे दिन की कथा में पं. रवि शास्त्री ने कहा कि भाद्रपद कृष्ण अष्टमी तिथि की घनघोर अंधेर आधी रात को रोहिणी नक्षत्र में मथुरा के कारागार में वासुदेव की पत्नी देवकी के गर्भ से भगवान श्रीकृष्ण ने जन्म लिया था।
द्वापर युग में भोजवंशी राजा उग्रसेन मथुरा में राज्य करता था। उसके पुत्र कंस ने उसे गद्दी से उतार दिया और स्वयं मथुरा का राजा बन बैठा। कंस की एक बहन देवकी थी, जिसका विवाह वसुदेव नामक यदुवंशी से हुआ था।
एक समय कंस अपनी बहन देवकी को उसकी ससुराल पहुंचाने जा रहा था। रास्ते में आकाशवाणी हुई, हे कंस, जिस देवकी को तू प्रेम से ले जा रहा है, उसी में तेरा काल बसता है। इसी के गर्भ से उत्पन्न आठवां बालक तेरा वध करेगा। यह सुनकर कंस वसुदेव को मारने के लिए उद्यत हुआ।
वसुदेव देवकी के एक एक करके सात बच्चे हुए और सात को जन्म लेते ही कंस ने मार डाला। अब आठवां बच्चा होने वाला था। उसी समय नंद की पत्नी यशोदा को भी बच्चा होने वाला था। जिस समय वसुदेव-देवकी को पुत्र पैदा हुआ, उसी समय संयोग से यशोदा के गर्भ से एक कन्या का जन्म हुआ, जो और कुछ नहीं सिर्फ माया थी।
जिस कोठरी में देवकी-वसुदेव कैद थे, उसमें अचानक प्रकाश हुआ और उनके सामने शंख, चक्र, गदा, पद्म धारण किए चतुर्भुज भगवान प्रकट हुए। भगवान ने उनसे कहा अब मैं पुनः नवजात शिशु का रूप धारण कर लेता हूं। तुम मुझे इसी समय अपने मित्र नंदजी के घर वृंदावन में भेज आओ और उनके यहां जो कन्या जन्मी है, उसे लाकर कंस के हवाले कर दो। कंस को सूचना मिली कि वसुदेव देवकी को बच्चा पैदा हुआ है।
उसने बंदीगृह में जाकर देवकी के हाथ से नवजात कन्या को छीनकर पृथ्वी पर पटक देना चाहा, लेकिन वह कन्या आकाश में उड़ गई और वहां से कहा अरे मूर्ख, मुझे मारने से क्या होगा। तुझे मारने वाला तो वृंदावन में जा पहुंचा है। वह जल्द ही तुझे तेरे पापों का दंड देगा। मुख्य श्रोता मानवी राजपूत मंजीत राजपूत ने श्रद्धालुओं से कथा श्रवण करने आग्रह किया है।
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