मंगलवार, 10 मार्च 2020

मेडिकल कॉलेज के एमडी-एमएस से तीनगुनी महंगी है डेंटल के एमडीएस की पढ़ाई


सरकारी मेडिकल कॉलेजों में एमडी-एमएस से की पढ़ाई से महंगी डेंटल की एमडीएस है। जहां नेहरू मेडिकल कॉलेज रायपुर समेत दूसरे सरकारी मेडिकल कॉलेजों में पीजी की तीन साल की पढ़ाई की फीस केवल 60 हजार रुपए हैं। वहीं सरकारी डेंटल कॉलेज में तीन साल की फीस डेढ़ लाख रुपए से ज्यादा है। जबकि सरकारी डेंटल कॉलेज रायपुर मंे पिछले साल से एमडीएस कोर्स शुरू हुआ है।

एमडी मेडिसिन, एमडी ऑब्स एंड गायनी, एमडी रेडियो डायग्नोसिस की पढ़ाई करने के लिए तीन साल में एमडीएस की तुलना में केवल एक तिहाई खर्च करना पड़ेगा। अगर निजी डेंटल कॉलेजों की तीन साल की फीस की तुलना मेडिकल पीजी यानी एमडी-एमएस से करें तो यह आठ गुना महंगा है। नए सत्र के लिए सरकारी डेंटल कॉलेज रायपुर में एडमिशन लेने वाले छात्रों को सालाना 53 हजार 550 रुपए फीस देनी होगी। वहीं निजी कॉलेजों के छात्रों को सालाना 4.47 लाख से 4.65 लाख रुपए सालाना देना हाेगा। तीन साल के कोर्स के लिए सरकारी कॉलेज में जहां 1.51 लाख रुपए खर्च करना होगा। जबकि निजी में 13.42 लाख से 13.95 लाख रुपए फीस देनी होगी। प्रदेश के एक सरकारी व पांच निजी डेंटल कॉलेजों में एडमिशन के लिए ऑनलाइन काउंसिलिंग शुरू हो गई है। सरकारी कॉलेज रायपुर में पिछले साल से पीजी कोर्स शुरू हुआ है। वहां प्रथम वर्ष की फीस 53550 रुपए, सेकंड ईयर का 56700 रुपए व फाइनल ईयर का 59220 रुपए है। जबकि दुर्ग, भिलाई, राजनांदगांव व बिलासपुर के दो निजी डेंटल कॉलेजों की कुल फीस सरकारी की तुलना में तीन गुनी ज्यादा है। ये फीस फीस विनियामक आयोग ने तय की है। जबकि सरकारी मेडिकल कॉलेज की फीस सरकार तय करती है।

डेंटिस्टों की मांग कम होने की आशंका

निजी डेंटल कॉलेज व क्लीनिक में राशन कार्ड से फ्री इलाज बंद करने के कारण आने वाले दिनों में डेंटिस्टों की मांग कम होने की आशंका है। इसका कारण यह है कि ज्यादातर मरीज क्लीनिक में महंगा इलाज कराने के बजाय सरकारी डेंटल कॉलेज में इलाज कराना पसंद करेंगे। सीनियर कैंसर सर्जन डॉ. युसूफ मेमन व कार्डियक सर्जन डॉ. केके साहू का कहना है कि डेंटिस्ट को मेडिकल डॉक्टर से कमतर ही माना जाता है। चाहे वह बीडीएस हो या एमडीएस। निजी क्लीनिक में फ्री इलाज होने से ज्यादा मरीज इलाज कराते थे और संचालकों को डेंटिस्टों की जरूरत पड़ती थी। जब फ्री इलाज बंद हो गया है तो वे एक दो डेंटिस्टों से ही काम चलाएंगे। ऐसे में डेंटिस्टों की मांग कम होने की आशंका है।


दूसरे राज्याें के छात्राें से भरी गईं सीटें | पिछले तीन-चार साल से बीडीएस की सीटें खाली जा रही है। पिछले साल राजस्थान, मध्यप्रदेश व ओडिशा के छात्रों से बीडीएस की खाली सीटें भरी गईं। वहीं कई बीडीएस करने वाले छात्र बेरोजगार हैं या क्लीनिक में सेवाएं दे रहे हैं। नियमित भर्ती नहीं होने से उनकी दिक्कत बढ़ गई है। यही कारण है कि रोजगार के कम अवसर होने के कारण सीटें नहीं भर रही हैं।

मेडिकल पीजी की 193 व डेंटल पीजी की 129 सीटें

प्रदेश के चार सरकारी व एक निजी मेडिकल कॉलेज में पीजी की 193, जबकि एक सरकारी व पांच निजी डेंटल काॅलेजों में पीजी की 129 सीटें हैं। मेडिकल पीजी व डेंटल पीजी के लिए एडमिशन चिकित्सा शिक्षा विभाग करता है। एडमिशन के लिए ऑनलाइन पंजीयन शुरू कर दिया गया है। दोनों की काउंसिलिंग एक साथ चलती है। हालांकि पिछले साल मेडिकल की काउंसिलिंग खत्म होने के बाद भी डेंटल की काउंसिलिंग चलती रही।

Bhilai News - chhattisgarh news dental mds studies are three times more expensive than md ms of medical college




SHARE THIS

Author:

Etiam at libero iaculis, mollis justo non, blandit augue. Vestibulum sit amet sodales est, a lacinia ex. Suspendisse vel enim sagittis, volutpat sem eget, condimentum sem.

0 coment rios:

Hi friends