शुक्रवार, 20 मार्च 2020

डॉक्टर रहते हैं पटना में उनकी जगह बिना डिग्री के कंपाउंडर करता है इलाज, शिकायत के बाद सभी दवा व कागजात जब्त


राजरत्न कमल, कटिहार.शहर के बिनोदपुर में मरीजाें की जान से खिलवार हाे रहा है। डॉक्टर पटना में रहते हैं लेकिन मामूली स्नातक पास कंपाउंडर वीडियो कॉल पर डॉक्टर से बात कर मरीजाें का इलाज करते हैं। हैरत ताे इस बात से है कि प्रति रोगी 300 रुपए की फीस भी वसूली करते हैं। इतना ही नहीं मरीजाें पर यह दबाव बनाया जाता है कि दवा उसे इसी क्लीनिक से खरीदना है।

दैनिक भास्कर की टीम ने जब इस मामले का खुलासा किया तो आनन-फानन में सिविल सर्जन ने एक मेडिकल टीम गठित कर उक्त क्लीनिक की जांच में भेजा। मेडिकल टीम ने भी यह पुष्टि कर दी कि डॉक्टर पटना में रहते हैं और बिना किसी डिग्री के कंपाउंडर डॉक्टर की या तो भूमिका निभाता है या फिर गंभीर रोगी आने पर वीडियो या ऑडियो कॉल से डॉक्टर से बात कराता है। इतना ही नहीं अपने बगल के दवा बिक्री केंद्र से रोगियों और उसके परिजनों को दवा खरीदने के लिए बाध्य करता है। जांच टीम ने बताया कि पूरी रिपोर्ट सिविल सर्जन को सौंपी जाएगी।

डॉक्टर के लेटर हैड का हो रहा उपयोग

शहर के बिनोदपुर में जब जमा मेमोरियल कान, नाक, गला एवं मल्टी स्पेशियलिटी हॉस्पिटल का नजारा कुछ और ही है। इसके डॉक्टर मो. सरफराज रहते तो पटना में हैं उनके लेटर हैड और बोर्ड पर हर गुरुवार को रोगी देखने की बात है, लेकिन होता यह है कि डॉक्टर साहब पटना में ही रहते हैं और अपने क्लीनिक या अस्पताल में कंपाउंडर से इलाज करवाते हैं। डॉक्टर ने आरा के मंटू कुमार सिंह जो मामूली स्नातक पास है उसे रखकर रोगियों का इलाज कराते हैं। रोगी और परिजन उन्हें ही डॉक्टर समझते हैं। इतना ही नहीं जब कोई गंभीर रोगी उनके पास आते हैं तो कंपाउंडर जिसके पास किसी प्रकार की कोई डिग्री नहीं है। वीडियो कॉल से रोगी की बात कराकर उसका इलाज करता है। हरेक गुरुवार को इस अस्पताल में 25 से 30 रोगी पहुंचते हैं जो या तो दलालों के माध्यम से या फिर प्रचार-प्रसार को देखकर इस क्लीनिक या अस्पताल पहुंचते हैं और ठगी का शिकार होते हैं।

17 रोगी को बिना डॉक्टर के देखा गया

दैनिक भास्कर के रिपोर्टर ने सच्चाई की पड़ताल की तो क्लीनिक पर पहुंचते ही गुरुवार को 15 से 20 रोगी वहां अपने-अपने परिजनों के साथ मौजूद दिखे। वहां पर रखे एक रजिस्ट्रर में देखा कि 17 रोगियों का इलाज किया जा चुका है। जिनसे प्रति रोगी 300 रुपए यानि कुल 5100 रुपए वसूले जा चुके थे। मजेदार बात तो यह है कि कई ऐसे रोगी थे जो दूर-दराज से भी आए थे। सहरसा के सोनवर्षा से शमेशर, पश्चिम बंगाल हरिशचंद्रपुर से शियाउल हक, आजमनगर धूमनगर से मो. मनोवर अपने पुत्र के इलाज के लिए पहुंचे थे। इनलोगों ने कहा कि 300 रुपए देखने के और दवा के लिए उसकी कीमत औसतन 700 के आसपास होती है। रिपोर्टर के हाथ में जो पुर्जे हाथ लगे वह 749 रुपए के थे।

बिना रजिस्ट्रेशन के चल रही दुकान

डॉक्टर कक्ष में एक खाली कुर्सी और टेबल दिखा। बगल में डॉक्टर साहब की दवा की दुकान था जो बिना रजिस्ट्रेशन के चल रही थी। एक अन्य कंपाउंडर मो. मुकीम बीच-बीच में डॉक्टर साहब से ऑडियो काॅल करके जानकारी ले रहा था। स्थानीय लोगों ने बताया कि हर गुरुवार को 25 लोग कान, नाक, गला का इलाज के लिए पहुंचते हैं। भास्कर टीम की सूचना पड़ सीएस डॉ. एपी शाही ने तत्काल एसीएमओ वीरेंद्र कुमार चौधरी, वरीय डॉक्टर गोपालिका, औषधि निरीक्षक अजय कुमार की टीम गठित कर जांच में भेजा।

कागजात व दवा जब्त की गई




डॉक्टर के लेटर हैड (लाल घेरे में) पर लिखी दवा को देखते जांच टीम में शामिल अधिकारी।




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