जयपुर.टोंक रोड पर लो-फ्लोर बस ने दो और जिंदगियां ले ली। भारतीय खाद्य निगम गोदाम के सामने दोपहर 1:40 बजे एक तेज रफ्तार लो-फ्लोर बस ने बाइक सवार दो युवकों को पीछे से टक्कर मारी और 30 फीट तक घसीटते हुए ले गई। परिचालक की साइड के टायर की चपेट में आने से दाेनों युवकों का सिर बुरी तरह कुचल गया और दोनों की मौके पर ही मौत हो गई। समर्थ सिंह सिद्धू (24) हथरोई किला के पास विधायकपुरी व राैनक ठक्कर (22) रेलवे स्टेशन जनता हाउस कॉलोनी, आदिपुर, कच्छ गुजरात का रहने वाला था। दोनों सी-स्कीम स्थित अपने दोस्त तपेश पंवार के घर से गोपालपुरा जा रहे थे। बाइक समर्थ चला रहा था। हादसे के बाद चालक व परिचालक बस को छोड़कर फरार हो गए। प्रत्यक्षदर्शियों की मानें तो बस की रफ्तार 80 किलोमीटर प्रति घंटा रही होगी, जबकि शहर की सड़कों पर अधिकतम स्पीड लिमिट 60 ही है। लोगों को कहना है कि बाइक सवार दोनों युवकों ने हेलमेट पहना होता तो जान बच सकती थी। हादसे के बाद लोगों ने बैरिकेड्स लगाकर सड़क बंद की। इससे टोंक फाटक पुलिया तक जाम लग गया। 20 मिनट तक रास्ता बंद रहा। इस दौरान शवों को घटनास्थल के पास स्थित एक होटल के एंट्री गेट के पास रखा गया। जाम के कारण आधा घंटा देरी से एंबुलेंस आई।
हादसा देख सन्न रह गया : प्रत्यक्षदर्शी
प्रत्यक्षदर्शी श्यामवीर सिंह ने बताया कि ग्लास फैक्ट्री के पास बुलेट बाइक पर दो युवक मेरे आगे जा रहा थे। हादसा देख मैं सन्न रह गया। एक युवक के सिर से खून बह रहा था। मैंने उसे कई बार जवाहर कला केंद्र में देखा था। वह समर्थ था। समर्थ के दोस्त तपेश कुमार ने बताया कि ज्यादातर समय वह मेरे साथ ही रहता है। हम पर्यावरण को लेकर एक प्रोजेक्ट बना रहे थे। इसके लिए शाम 4 बजे जेकेके में सभी साथियों के साथ मीटिंग रखी गई थी। दोपहर 12 बजे वह साेकर उठा था। आधे घंटे तक उसने पगड़ी बांधी और फिर रौनक को कोई सामान दिलाने के लिए गया था। दोनों मेरे घर से साथ ही निकले थे। समर्थ हमेशा कहता था- यह पगड़ी हमारी संस्कृति है। इसे बचाना है। रौनक ठक्कर के पिता भरत हरिराम ठक्कर गुजरात से जयपुर के लिए रवाना हो गए हैं।
चालक-परिचालक फरार, मामला दर्ज
एसीपी महेन्द्र कुमार शर्मा ने बताया टाेंक फाटक से दुर्गापुरा की ओर जा रही हरे रंग की 32 नंबर की लो-फ्लोर बस ने बाइक को पीछे से टक्कर मारी थी। समर्थ के पिता ने बस चालक कमलेश सैनी के खिलाफ केस दर्ज कराया है। इसके बाद विद्याधर नगर बस डिपो प्रबंधक को कमलेश के बारे में सूचना देने के लिए पाबंद किया गया है। हादसे के बाद बस को जब्त कर टी-थ्री पार्किंग में खड़ा किया गया है।
बोलता था-ये पगड़ी मेरे मरने के बाद ही खुलेगी
जयपुर की सड़कों पर सिर पर मारवाड़ का सतरंगी साफा पहने एक नौजवान को बहुत लोगों ने देखा होगा। जवाहर कला केंद्र में आने वालों के लिए वह जाना-पहचाना चेहरा था। हमेशा हंसता-मुस्कराता हुआ यह चेहरा जन आंदोलनों के नेता तारा सिंह सिद्धू और निशा सिद्धू का 24 वर्षीय पुत्र समर्थ सिंह का था। समर्थ को रंगों से इतना प्यार था कि सतरंगी पगड़ी और रंगीन कैनवास की कूंची को अपनी जिंदगी का हिस्सा बना लिया। रविवार को समर्थ, पगड़ी और कूंची तीनों अलग हो गए। सड़क पर फैली उस पगड़ी को देखकर पिछले दिनों का एक वाक्या याद आ गया। समर्थ के सिर पर सजी उस पगड़ी को देखकर इंजीनियरिंग के प्रोफेसर राशिद खान ने कहा - समर्थ मुझे तुम्हारी यह पगड़ी सुंदर लगती है, इसमें एक सेल्फी लेना चाहता हूं। समर्थ ने कहा- यह पगड़ी तो अब मेरे मरने के बाद ही सिर से उतरेगी। सचमुच, रविवार दोपहर 1:40 बजे यह पगड़ी समर्थ के सिर से उतर चुकी थी। नियति का खेल देखिए, दुर्घटना की सूचना मिलने के बाद राशिद मौके पर पहुंचे। समर्थ की देह अस्पताल जा चुकी थी, लेकिन एक शख्स पगड़ी थामे खड़ा था। राशिद को देखकर उसने पगड़ी उनकी गाड़ी में लाकर रख दी।
मगर दुनिया के रंग देखती रहेंगी समर्थ की आंखें
समर्थ भले ही दुनिया से चला गया लेकिन उसकी आंखें अब भी दुनिया के रंग देखती रहेंगी। देर शाम को माता-पिता ने उसकी आंखें दान कर दी। पिता तारा सिंह सिद्धू राष्ट्रीय किसान सभा में सचिव हैं। मां निशा सिद्धू नेशनल फेडरेशन इंडियन वीमेन में महासचिव हैं। हादसे के समय वे कमिश्नरेट स्थित शहीद स्मारक पर सीएए के खिलाफ चल रहे धरना-प्रदर्शन में थी। पिता बोले- समर्थ हमेशा पगड़ी पहने रहता। कोई टोकता तो कहता- यह तो हमारी संस्कृति है, पहचान है।
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