नगर निगम शहर विकास के लिए योजनाएं तो बना रहा है, लेकिन बड़े काम धरातल पर उतर नहीं पा रहे हैं। पिछले दस सालों के निगम के बजट में शामिल ऐसे दस बड़े काम हैं जो हर साल फेल हो रहे हैं और अगले बजट में उसे फिर से शामिल किया जा रहा है। नगर निगम स्टेट के भरोसे बजट तैयार करता है और फंड नहीं मिलने के कारण काम नहीं हो पा रहे हैं। मिशन मोड में पूरा करने का टारगेट रखा गया था। स्थिति यह है कि ऐसे हर काम की लागत बढ़ रही है। आठ से दस साल पहले जिन कामों के लिए दो से तीन करोड़ का बजट था अब उसकी लागत दस से बारह करोड़ रुपए तक पहुंच गई है। पिछले सालों में बजट में फेल हो रहे कामों में नए कलेवर में एक बार फिर नए बजट में शामिल किया जा रहा। सोमवार को बजट पेश होना था, लेकिन कोरोना वायरस के डर से सामान्य सभा स्थगित कर दी गई। महीने के आखिरी तक बजट पेश किया जाएगा।
केवल प्रपोजल बनाकर भेज देने से काम नहीं होते: नेता प्रतिपक्ष
पूर्व मेयर और निगम में प्रतिपक्ष के नेता प्रबोध मिंज का कहना है कि कांग्रेस सरकार की प्लानिंग सही है और न ही शहर के विकास को लेकर इच्छा शक्ति है। केवल प्रपोजल तैयार कर भेज देने से काम नहीं होता। फंड के लिए प्रयास करना चाहिए जो पांच सालों में दिखाई नहीं दिया। आरोप लगाते थे कि स्टेट में भाजपा की सरकार से सहयोग नहीं मिल रहा है, लेकिन अब तक स्टेट में भी उनकी सरकार है फिर काम क्यों नहीं करा रहे हैं। मेयर को लोगों को बताना चाहिए?
पहले स्टेट से फंड नहीं मिला, सभी कामों को इस साल कराएंगे: मेयर
मेयर डाॅ. अजय तिर्की ने कहा कि पिछले सालों में स्टेट से फंड नहीं मिलने के कारण बड़े काम नहीं हुए। निगम से प्रपोजल जाता रहा, लेकिन स्वीकृति नहीं मिली। खेल मैदान टीपी नगर, नया सब्जी बाजार जैसे कामों को बजट में शामिल कर रहे हैं और इस साल ये सभी काम शुरू होंगे।
ये काम बता रहे किस तरह फेल होता आ रहा है निगम का बजट
महिलाओं के लिए समृद्धि बाजार
हकीकत: आर्थिक रूप से कमजोर महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए महिला समृद्धि बाजार तैयार किया जाना था। एक ही जगह पर सर्वसुविधायुक्त इस बाजार में केवल महिलाओं के लिए दुकानें दी जानी थी, लेकिन ऐसा नहीं हो सका।
पालिका बाजार
हकीकत: चार साल पहले इसे निगम की बजट में शामिल करते हुए दावा किया गया था, मिशन मोड में इसे एक साल में तैयार कर लेंगे, लेकिन हालत यह है कि जमीन तक फाइनल नहीं कर पाए।
तालाबों का सौंदर्यीकरण
हकीकत: सरोवर धरोहर योजना के तहत शहर के बदहाल हो चुके तालाबों के सौंदर्यीकरण किया जाना था, लेकिन इस योजना के तहत एक भी तालाब में काम नहीं हुआ। शहर में एक दर्जन तालाब बदहाल हैं।
एक्सपर्ट व्यू
ठोस प्लान पर नहीं हो रहा काम इसलिए आ रही दिक्कत
सीए संजय उरमालिया ने कहा कि नगर निगम को आर्थिक स्थिति सुधारने के साथ ठोस प्लान पर काम करना होगा तभी आप वादा पूरा कर पाएंगे। अभी स्थिति यह है कि खुद की आय सीमित। स्टेट के भरोसे अनुमानित बजट लाया जाता है और उस हिसाब से फंड नहीं मिलने के कारण काम नहीं हो पा रहा है। बजट में काम को शामिल करने से पहले फंड उपलब्ध हो इसके लिए पहले चर्चा कर प्लान बनना चाहिए।
ये काम भी अब तक नहीं हुए
1 शहर में चारों दिशाओं में खेल मैदान बनाए जाने थे और बजट में इसके लिए चार करोड़ का प्रावधान किया गया था, लेकिन एक भी मैदान तैयार नहीं हुआ।
तीन साल में ये है फंड की स्थिति
टीपी नगर के लिए 12 करोड़ की मंजूरी
हकीकत: शहर के गहिरा गुरु वार्ड में ट्रांसपोर्टनगर के लिए 13 सालों से पहल चल रही है। तीन साल पहले तत्कालीन सीएम ने इसके लिए 12 करोड़ की मंजूरी दी थी। 12 साल पहले इसके लिए दो करोड़ मिली थी, लेकिन इससे जमीन भी समतल नहीं हो पाई।
छह हजार गरीबों के लिए पक्के मकान
हकीकत: नगर निगम ने पिछले साल बजट में आवास योजना के तहत शहर में छह हजार गरीब परिवारों को पक्के मकान देने का टारगेट रखा था, लेकिन बड़ी योजनाओं पर काम शुरू नहीं हो सका। बिलासपुर रोड और नमनाकला और भगवानपुर इलाके में योजना के तहत मकान बनने थे।
{2017-18 में 2 अरब 80 लाख का अनुमानित बजट, लेकिन 64 करोड़ ही मिले। {2018-019 में 3 अरब 92 करोड़ का बजट लेकिन एक अरब ही मिले।
{2019-20 में 480 करोड़ का बजट, लेकिन मिले 120 करोड़।
{निगम अपनी आय से कर्मचारियों को वेतन भी नहीं दे पा रहा है।
4 नगर निगम का प्रशासन भवन भी अधर में लटका हुआ है। छह साल में दो बार इसका शिलान्यास करा लिया गया लेकिन अभी तक जमीन फाइनल नहीं हो पाई। पहली बार चार करोड़ रुपए में इसकी मंजूरी मिली थी और अब 11 करोड़ रुपए इस पर खर्च होंगे।
3 पुराने बस स्टैंड में गोल बाजार बनना था। छह साल में इसकी मंजूरी भी नहीं मिल पाई। पांच करोड़ में यह बाजार बनना था।
2 नया थोक सब्जी व फल बाजार बनना था। पांच करोड़ रुपए से अधिक इसके लिए फंड का प्रावधान किया गया था, लेकिन इस पर काम नहीं हुआ।
5 शहर में ट्रैफिक के दबाव को कम करने के लिए भीड़-भाड़ वाले इलाकों में पार्किंग क्षेत्रों का निर्माण किया जाना था। 50 लाख रुपए इस पर खर्च होने थे, लेकिन एक भी जगह पार्किंग स्थल डेवलप नहीं हुआ।
शहर में पार्किंग नहीं होने से सड़कों पर ही वाहनों को पार्क करना पड़ता है।
जिन कामों की लागत 2-3 करोड़ थी, अब 8-10 करोड़ हो गई
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