रायपुर. लॉकडाउन के बाद राजधानी में प्रदूषण का स्तर कम हो गया है। शहर के ज्यादातर हिस्सों में एयर क्वालिटी इंडेक्स 100 के नीचे चला गया है। आम दिनों में यह 100 से ऊपर रहता है। जानकारों का कहना है कि वाहनों से निकले वाले कार्बन की मात्रा कम हो गई है। होटलों, रेस्टोरेंट तथा कारखानों के बंद होने से धुआंभी नहीं है। शहर में निर्माण कार्य भी पूरी तरह थमा हुआहै। इस वजह से हवा के दूषित करनेवाले कण पीएम-10 और पीएम-2.5 का स्तर काफी नीचे जा चुका है। इन सबके औसत मिश्रण से किसी भी शहर का तय होने वाला एयर क्वालिटी इंडेक्स का स्तर इस समय राजधानी में संतोषजनक पाया गया है।
राजधानी के करीब 226 वर्ग किमी क्षेत्र के करीब ढाई लाख घरों में 16 लाख लोग रहते हैं। इसी के मुताबिक शहर में प्रदूषण का स्तर भी आम दिनों में काफी रहता है। 25 मार्च कीरात से शहर में लॉकडाउन के कारण लगभग 90 फीसदी आबादी घरों के भीतर है। सड़क पर वाहनों की संख्या भी बमुश्किल पांच फीसदी ही रह गई है। निर्माण काम तो पूरी तरह बंद हो गया है। वाहनों के नहीं चलने से सड़कों से उड़ने वाली धूल भी अब मुश्किल से पांच फीसदी ही रह गई है। इन सब कारणों से शहर में एयर क्वालिटी इंडेक्स का स्तर राजधानी में घटा है।
प्रदूषण 40 फीसदी तक कम
पं. रविशंकर शुक्ल विवि में केमिस्ट्री के एचओडी डा. शम्स परवेज ने कहा कि लॉकडाउन के कारण राजधानी में प्रदूषण का स्तर 40 से 50 फीसदी तक कम हो सकता है। यह कहा जा रहा है कि वाहनों की संख्या कम होने या अन्य सभी काम लगभग बंद होने की वजह से प्रदूषण में काफी कमी आनी चाहिए, लेकिन शहर के आसपास कुछ फैक्ट्रियां अभी चालू हैं। इस समय की ओर से राजस्तान से भी रेतीली हवा आने लगी है। अन्य कई कारण हैं, जिसकी वजह से प्रदूषण बढ़ता है।
लॉकडाउन के बाद संभालना होगा शहर को
डा. शम्स परवेज ने कहा कि शहर में लॉकडाउन तक प्रदूषण का स्तर काफी कम रहेगा, यह अच्छी बात है लेकिन लॉकडाउन खुलने के बाद हमें ज्यादा सावधान रहना होगा। लगभग एक महीने तक काम-काज और लोगों का मोबिलिटी थमे रहने के बाद लॉकडाउन खुलते ही लोग सड़कों पर टूट पड़ेंगे। इससे प्रदूषण काफी तेजी से बढ़ेगा। यह कई तरह से घातक हो सकता है। प्रदूषण ज्यादा होने पर वायरल इंफेक्शन बढ़ जाएगा। क्योंकि प्रदूषण ज्यादा रहने पर वाइरस एक तरह से बीमारियों के लिए कैरियर का काम करने लगते हैं। सड़कों पर ज्यादा वाहन चलने और उनसे निकलने वाले धुएं में कार्बनिक यौगिक की मात्रा अधिक होगी। विशेषज्ञों का कहना है कि प्रशासन के लॉकडाउन के बाद भी प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए कुछ ठोस कदम उठाने होंगे। लोगों से यह अपील करनी होगी कि वे निजी वाहनों का कम से कम उपयोग करें। पब्लिक ट्रांसपोर्ट का ज्यादा उपयोग करें।
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